सायोनी घोष समेत TMC के 20 बागी सांसदों को बड़ी राहत! स्पीकर ने बढ़ाई मोहलत; जवाब की मियाद क्या?

TMC Rebel MPs Get Relief: सायोनी घोष समेत टीएमसी के 20 बागी सांसदों को लोकसभा स्पीकर ने फिर 15 दिन की मोहलत दी है। अब सभी सांसदों को 8 अक्टूबर तक अयोग्यता मामले में अपना जवाब दाखिल करना होगा।

Aditya Kumar Verma
Published on: 25 Sept 2026 7:11 PM IST
TMC Rebel MPs Get Relief
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TMC Rebel MPs Get Relief: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी (TMC) से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई (NCPI) में जाने वाले 20 सांसदों की सदस्यता का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए लोकसभा सचिवालय ने एक बार फिर समय बढ़ा दिया है।

लोकसभा सचिवालय ने अब इन 20 बागी सांसदों को जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन और दिए हैं। उन्हें अब 8 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। इससे पहले दी गई समय-सीमा 22 सितंबर को खत्म हो गई थी। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से एक महीने का और समय मांगा था, लेकिन उन्हें 15 दिन की ही मोहलत मिली है।

पहले भी मिल चुकी है मोहलत

इन सांसदों को जवाब देने के लिए इससे पहले भी समय बढ़ाया जा चुका है। 26 अगस्त को लोकसभा सचिवालय ने बागी सांसदों को जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया था। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह समय बढ़ाकर 22 सितंबर कर दिया था।

अब एक बार फिर जवाब दाखिल करने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। ऐसे में अयोग्यता की कार्यवाही में अगला अहम पड़ाव 8 अक्टूबर होगा, जब इन सांसदों को अपना पक्ष लोकसभा सचिवालय के सामने रखना होगा।

अभिषेक बनर्जी ने जून में की थी कार्रवाई की मांग

पूरा मामला टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से जून में शुरू हुई अयोग्यता की कार्यवाही से जुड़ा है। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के तहत इन 20 सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

टीएमसी की ओर से आरोप है कि इन सांसदों ने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में जाने का फैसला किया है और इसलिए उनके खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। शीर्ष अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बागी सांसदों को नोटिस जारी किया और लोकसभा अध्यक्ष के सामने चल रही कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही।

दो दिन पहले SC ने भी कहा था- जल्द फैसला हो

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले भी लोकसभा अध्यक्ष से जल्द फैसला लेने की उम्मीद जताई थी। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा था कि उसे उम्मीद है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 20 बागी टीएमसी सांसदों की अयोग्यता की मांग वाली याचिका पर जल्द फैसला लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह लोकसभा अध्यक्ष को सीधे निर्देश नहीं दे सकता, लेकिन अदालत मामले के जल्द समाधान के लिए उन्हें याद दिलाना चाहती है।

कोर्ट ने कहा था कि वह लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की स्थिति में नहीं है, लेकिन मामले के शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

‘लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है’

सुनवाई के दौरान टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि बागी सांसदों को नोटिस जारी होने के बावजूद उन्होंने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है और लगातार और समय मांग रहे हैं।

वहीं, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अध्यक्ष पहले ही अयोग्यता याचिकाओं पर नोटिस जारी कर चुके हैं।

तुषार मेहता ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है और वह मामले की गंभीरता को समझते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी दौरान मामले को जल्द निपटाने की उम्मीद जताई थी। कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई थी, जब इन सांसदों को जवाब देने की पहले से तय समय-सीमा खत्म हो चुकी थी।

20 सांसदों की सदस्यता पर क्यों उठ रहा सवाल

अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 20 बागी सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लेने में देरी हो रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से लोकसभा अध्यक्ष को संविधान के दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी।

इस पूरे विवाद का केंद्र यही सवाल है कि टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में जाने वाले इन सांसदों की स्थिति संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत क्या होगी। बागी सांसदों की ओर से अपने कदम को अलग राजनीतिक समूह के तौर पर पेश किया गया है, जबकि टीएमसी की ओर से उनके खिलाफ अयोग्यता की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई इसी अयोग्यता की कार्यवाही को जल्द आगे बढ़ाने की मांग को लेकर हुई है।

20 में से 17 सांसद BJP में जाने की चर्चा

इस बीच इन 20 बागी सांसदों के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें जारी हैं। पिछले सप्ताह बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था कि 20 में से 17 सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

यानी एक तरफ इन सांसदों की सदस्यता को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के सामने अयोग्यता की कार्यवाही चल रही है और दूसरी तरफ इनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी चर्चा बनी हुई है।

अब लोकसभा सचिवालय ने जवाब दाखिल करने की नई तारीख 8 अक्टूबर तय की है। इसके बाद इन 20 सांसदों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और लोकसभा अध्यक्ष की आगे की कार्रवाई पर इस पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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