TMC में बगावत के बीच Abhishek Banerjee को लोकसभा से बुलावा, 19 जून को रख सकेंगे अपना पक्ष

Abhishek Banerjee News: टीएमसी में बगावत के बीच अभिषेक बनर्जी को लोकसभा सचिवालय ने 19 जून को बुलाया है। 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय और अलग गुट की मान्यता को लेकर अभिषेक अपना पक्ष रखेंगे।

Aditya Kumar Verma
Published on: 17 Jun 2026 8:49 PM IST
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Abhishek Banerjee News: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची टूट और राजनीतिक हलचल के बीच पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को लोकसभा सचिवालय (Lok Sabha Secretariat) की ओर से पत्र भेजा गया है। पत्र के अनुसार अभिषेक बनर्जी को 19 जून को शाम पांच बजे लोकसभा पहुंचने के लिए कहा गया है।

बताया जा रहा है कि लोकसभा से भेजा गया यह पत्र अभिषेक बनर्जी के उस ई-मेल के जवाब में जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की थी।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखा था पत्र

अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) ओम बिरला (Om Birla) को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि उन्हें इस पूरे मामले में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।

उन्होंने यह मांग ऐसे समय उठाई थी जब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के समूह का विलय नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

बागी सांसदों ने मांगी अलग समूह की मान्यता

ताजा घटनाक्रम के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने एनसीपीआई (NCPI) में विलय के बाद स्वयं को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनने का निर्णय लिया है। इसी प्रक्रिया के तहत अभिषेक बनर्जी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है।

अलग गुट को मान्यता देने का किया था विरोध

अभिषेक बनर्जी ने 10 जून को लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में अनुरोध किया था कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सुविधा न दी जाए।

उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि संविधान (Constitution) और दल-बदल विरोधी कानून (Anti Defection Law) किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह के गठन की अनुमति नहीं देते हैं। साथ ही उन्होंने मांग की थी कि सदन में तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व केवल उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक के माध्यम से ही माना जाए।

कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी सौंपा था पत्र

इस मामले को लेकर पार्टी सांसद कीर्ति आजाद (Kirti Azad) और सागरिका घोष (Sagarika Ghose) भी सक्रिय नजर आए थे। दोनों नेताओं ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर पहुंचकर यह पत्र उन्हें सौंपा था। पत्र में आग्रह किया गया था कि किसी भी कथित अलग समूह या गुट को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या विशेष सुविधा प्रदान न की जाए।

महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का दिया हवाला

अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में महाराष्ट्र (Maharashtra) के राजनीतिक संकट से जुड़े उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की संविधान पीठ के फैसले का भी उल्लेख किया था। उन्होंने तर्क दिया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) के तहत अब विभाजन का बचाव करने का कोई रास्ता नहीं बचा है। मौजूदा कानूनी व्यवस्था एक संपूर्ण राजनीतिक दल को मान्यता देती है, न कि उसके भीतर मौजूद अलग-अलग प्रतिद्वंद्वी गुटों को।

उन्होंने यह भी कहा था कि यदि इस तरह का कोई अनुरोध लोकसभा के समक्ष आता है तो उस पर कोई निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

कानून और नियमों के आधार पर होगा फैसला

संसदीय सूत्रों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस पूरे मामले में कानून, नियम और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप फैसला लेंगे। फिलहाल सभी की निगाहें 19 जून की बैठक पर टिकी हैं, जहां अभिषेक बनर्जी अपना पक्ष रखेंगे और उसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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