अभिषेक बनर्जी और I-PAC कैसे बने हार के सबसे बड़े विलेन? TMC में शुरू हुई बगावत

TMC internal revolt 2026: बंगाल में TMC की करारी हार के बाद पार्टी में बगावत तेज! अभिषेक बनर्जी और I-PAC पर लगे गंभीर आरोप, नेताओं ने बताया हार का सबसे बड़ा जिम्मेदार। जानिए कैसे शुभेंदु अधिकारी की जीत ने ममता बनर्जी के किले में मचा दिया भूचाल।

Harsh Srivastava
Published on: 11 May 2026 3:08 PM IST
अभिषेक बनर्जी और I-PAC कैसे बने हार के सबसे बड़े विलेन? TMC में शुरू हुई बगावत
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TMC internal revolt 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसकी कल्पना शायद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कट्टर समर्थकों ने भी नहीं की थी। पांच साल पहले जिस ममता बनर्जी ने भाजपा को 100 सीटों के नीचे रोककर 'हैट्रिक' मारी थी, आज उसी बंगाल की धरती पर उनकी अपनी पार्टी 100 के आंकड़े को तरस गई है। 2021 में प्रशांत किशोर (PK) ने भाजपा की हार का दावा किया था, लेकिन 2026 में उनकी बनाई संस्था आईपैक (I-PAC) ममता बनर्जी के पतन की गवाह बन गई। भाजपा के पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ लेते ही टीएमसी के दफ्तरों में सन्नाटा पसर गया है, और पार्टी के भीतर एक ऐसा गृहयुद्ध शुरू हो गया है जो संगठन के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगा रहा है।

अभिषेक बनर्जी और I-PAC: हार के सबसे बड़े विलेन?

तृणमूल कांग्रेस में इस करारी शिकस्त का ठीकरा सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर फोड़ा जा रहा है। कभी पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और ममता के उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक आज अपनी ही पार्टी के सीनियर नेताओं के निशाने पर हैं। नेताओं का आरोप है कि अभिषेक ने पार्टी को एक राजनीतिक दल के बजाय 'कॉर्पोरेट हाउस' की तरह चलाया, जहां जमीन की हकीकत से ज्यादा डेटा और आधुनिक तकनीक को अहमियत दी गई।

मालदा के कद्दावर नेता कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने तो सीधे अभिषेक को पार्टी खत्म करने का जिम्मेदार बताया। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए ममता बनर्जी की तुलना 'धृतराष्ट्र' से कर दी, जो सब कुछ देखते हुए भी अपने भतीजे के मोह में चुप रहीं। टीएमसी उम्मीदवार आतिन घोष ने भी कड़े शब्दों में कहा कि आधुनिक तकनीक और लैपटॉप के जरिए बंगाल के लोगों की नब्ज नहीं समझी जा सकती।

आईपैक पर गंभीर आरोप: चुनावी मैनेजमेंट या भ्रष्टाचार का अड्डा?

पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार कल्याण बनर्जी और पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय ने हार के लिए 98 फीसदी जिम्मेदारी आईपैक पर मढ़ी है। कल्याण बनर्जी का मानना है कि पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म को संगठन से ऊपर रखने की कीमत पार्टी को चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि "तृणमूल को तृणमूल ने ही हराया है।"

इससे भी गंभीर आरोप भ्रष्टाचार और टिकटों की खरीद-फरोख्त को लेकर लगे हैं। निलंबित नेता रिजु दत्ता ने सवाल उठाया कि आईपैक के अधिकारी प्रतीक जैन और विनेश चंदेल जैसे लोग चुनाव के बाद कहां गायब हो गए? पूर्व विधायक खगेश्वर रॉय ने तो यहाँ तक दावा किया कि उन्हें टिकट देने के बदले पैसे की मांग की गई थी और वे पैसे की इस दौड़ में पिछड़ गए। आरोप है कि आईपैक के लोग स्थानीय स्तर के नेताओं से नियमित रूप से उगाही करते थे, जिससे जनता के बीच पार्टी की छवि 'भ्रष्ट' बन गई।

जब मंत्रियों और विधायकों ने खोला मोर्चा

हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में इस्तीफों और संन्यास की झड़ी लग गई है। बैरकपुर से उम्मीदवार और मशहूर फिल्म निर्देशक राज चक्रवर्ती ने राजनीति को अलविदा कह दिया है। वहीं, पूर्व क्रिकेटर और पूर्व खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने पार्टी के भीतर की कड़वी सच्चाई उजागर करते हुए कहा कि उन्हें 'लॉलीपॉप' की तरह मंत्री पद दिया गया था, जबकि उनके पास दफ्तर में चाय-बिस्किट पीने के अलावा कोई काम नहीं था। उन्होंने पूर्व खेल मंत्री अरूप बिश्वास पर काम न करने देने का आरोप लगाया। पार्टी के प्रवक्ता रहे रिजु दत्ता, पापिया घोष और कार्तिक घोष जैसे चेहरों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया गया है, लेकिन इससे नाराजगी कम होने के बजाय और बढ़ती दिख रही है। सीनियर नेता असित मजूमदार ने नेतृत्व के अहंकार और प्रशासनिक निष्क्रियता को हार की मुख्य वजह बताया है।

ममता बनर्जी के लिए आगे की राह

ममता बनर्जी के लिए यह समय उनके राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन परीक्षा है। आईपैक के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी और उसमें ममता पर जांच में बाधा डालने के आरोपों ने मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा दिया है। खुद ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर कहा कि वे एक वकील हैं और अब भाजपा के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई खुलकर लड़ेंगी।

संगठन को बिखरने से बचाने के लिए ममता ने अब अपने पुराने और अनुभवी वफादारों को मोर्चे पर लगाया है। 80 साल के शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाया गया है, जो ममता के हारने के बावजूद लगातार अपना 10वां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। उनके साथ फिरहाद हकीम और असीमा पात्रा जैसे अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।

क्या फिर खड़ा हो पाएगा 'जोड़ा घास'?

भाजपा की जीत और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब टीएमसी को डर है कि नगर पालिकाओं और पंचायतों में बड़े पैमाने पर दल-बदल शुरू हो सकता है। 2021 की जीत के बाद जो नेता भाजपा छोड़ टीएमसी में आए थे, अब वे फिर से भगवा खेमे की ओर रुख कर रहे हैं। ममता बनर्जी के सामने अब दोहरी चुनौती है एक तरफ अपनी छवि और कानूनी पेचों से निपटना और दूसरी तरफ अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सुलग रही बगावत को शांत करना। बंगाल की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहां 'दीदी' को अपनी पूरी शक्ति संगठन को बचाने में लगानी होगी, वरना 'मां, माटी, मानुष' का यह किला ढहने में देर नहीं लगेगी।

Harsh Srivastava

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Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

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