NDA Magic Number: TMC गई, शिवसेना टूटी...अब DMK पर नजर! जानिए क्यों 362 के आंकड़े के पीछे हाथ धोकर पड़ी है NDA?

NDA Magic Number: दिल्ली के सियासी गलियारों में भारी हलचल! TMC में भगदड़ के बाद अब उद्धव गुट पर नजर। जानिए क्या NDA जुटा पाएगा लोकसभा का 362 का वो 'जादुई आंकड़ा' और क्या है पूरा सियासी गणित।

Harsh Srivastava
Published on: 18 Jun 2026 10:40 AM IST (Updated on: 18 Jun 2026 10:40 AM IST)
NDA Magic Number: TMC गई, शिवसेना टूटी...अब DMK पर नजर! जानिए क्यों 362 के आंकड़े के पीछे हाथ धोकर पड़ी है NDA?
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NDA Magic Number: दिल्ली के सियासी गलियारों में भारी हलचल है और सबकी नजर संसद के जादुई आंकड़े पर टिकी है। देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है जिसने विपक्षी खेमे की नींद उड़ा दी है। तृणमूल कांग्रेस में मची भगदड़ के बाद अब निगाहें शिवसेना के उद्धव गुट पर आकर टिक गई हैं। कयास हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां भी बिखर सकती हैं। इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए लोकसभा में वह ऐतिहासिक आंकड़ा हासिल कर पाएगा जिससे वह देश के संविधान में बड़े बदलाव करने की ताकत पा सके। इस महाबहुमत की चर्चा ने देश में राजनीतिक सरगर्मी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

क्यों खास है 362 का आंकड़ा और इसकी जरूरत

लोकसभा में आम कानून पास कराने के लिए साधारण बहुमत चाहिए होता है लेकिन संविधान संशोधन के लिए सरकार को दो तिहाई सांसदों के समर्थन की आवश्यकता पड़ती है। सदन की कुल 543 सीटों के हिसाब से यह जादुई नंबर 362 बैठता है। हालांकि मौजूदा समय में तीनों सीटें खाली होने की वजह से यह जरूरी आंकड़ा घटकर 360 पर आ गया है। साल 2024 के आम चुनावों में बड़े राज्यों में करारी शिकस्त झेलने के बाद बीजेपी अपने दम पर बहुमत से दूर रह गई थी। फिलहाल एनडीए के पास सहयोगियों को मिलाकर 293 सांसद हैं जो सरकार चलाने के लिए तो काफी हैं लेकिन बड़े फैसलों के लिए यह संख्या अब भी काफी कम है।

विपक्षी खेमे में सेंधमारी और NDA का बढ़ता कुनबा

इस समय विपक्ष के भीतर मचे घमासान ने एनडीए की राह को थोड़ा आसान बना दिया है। तृणमूल कांग्रेस में हुई टूट पर अब लगभग अंतिम मुहर लग चुकी है और उसके बीस बागी सांसद एनसीपीआई में शामिल होकर सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। इसके तुरंत बाद अब शिवसेना के उद्धव गुट से भी छह सांसदों के अलग होने की खबरें तेज हैं जिसका औपचारिक ऐलान बहुत जल्द होने की उम्मीद है। इन दोनों झटकों के बाद समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसी ताकतों के अंदर भी बगावत की अफवाहें उड़ रही हैं हालांकि सपा ने इससे साफ इनकार किया है। अगर केवल तृणमूल और शिवसेना के बागी सांसदों को जोड़ लिया जाए तो सत्ताधारी गठबंधन की ताकत 293 से बढ़कर सीधे 319 तक पहुंच जाती है।

दक्षिण से बड़ी उम्मीद और निर्दलीयों का बड़ा रोल

एनडीए की नजरें सिर्फ इन बागी सांसदों पर ही नहीं टिकी हैं बल्कि वह दक्षिण भारत की एक बड़ी ताकत के साथ भी लगातार संपर्क में है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके जिसके पास 22 लोकसभा सांसद हैं कांग्रेस के साथ मतभेदों के बाद विपक्षी गठबंधन से दूरी बना चुकी है। हालांकि डीएमके ने अभी तक खुलकर एनडीए का साथ देने की घोषणा नहीं की है लेकिन यदि रणनीतिक तौर पर उनके 22 सांसद सरकार के पक्ष में आ जाते हैं तो यह आंकड़ा छलांग लगाकर 341 के पास पहुंच जाएगा। इसके अलावा सदन में लगभग 38 ऐसे सांसद भी मौजूद हैं जो किसी बड़े गुट का हिस्सा नहीं हैं और स्वतंत्र रूप से अपना समर्थन देते हैं।

क्या सच हो पाएगा इस महाबहुमत का अधूरा सपना

विपक्ष के पास डीएमके को मिलाकर कुल 184 सांसद बचे हैं जिसमें 99 सांसदों वाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। लेकिन जिस रफ्तार से विपक्षी एकता लगातार बिखर रही है उसने सबको हैरान कर दिया है। एनडीए के लिए 360 का जादुई आंकड़ा छूना अभी भी कठिन है क्योंकि तमाम जोड़ तोड़ के बाद भी वह अपने लक्ष्य से काफी दूर दिखाई दे रहा है।

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