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ममता बनर्जी को लग सकता है एक और झटका…नागांव उम्मीदवार के नॉमिनेसन पर भी संकट! समझें सिंबल का गणित
TMC Symbol Row: तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह फ्रीज होने के बाद असम की नागांव लोकसभा सीट पर ममता गुट के उम्मीदवार अब्दुल सलाम की उम्मीदवारी पर संकट है। ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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TMC Symbol Row: असम की नागांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव (By-election) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के उम्मीदवार अब्दुल सलाम की उम्मीदवारी पर अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग (Election Commission) की ओर से तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और उसके ऐतिहासिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह (Election Symbol) को फ्रीज किए जाने का असर अब पश्चिम बंगाल से बाहर असम की राजनीति में भी दिखाई देने लगा है।
अब्दुल सलाम ने नागांव लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ाफूल’ निशान के साथ अपना नामांकन दाखिल किया था। लेकिन चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद अब उनकी उम्मीदवारी पर सवाल खड़ा हो गया है। ऐसे में उनका नामांकन रद्द होने की आशंका बढ़ गई है।
पर्चा रद्द होने की आशंका
नामांकन रद्द होने की तलवार लटकने के बावजूद अब्दुल सलाम अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश के मुताबिक ही आगे बढ़ेंगे।
अब्दुल सलाम का कहना है कि वह किसी भी स्थिति में अपना नामांकन वापस नहीं लेंगे। उनका कहना है कि अगर चुनाव आयोग उनका पर्चा रद्द भी कर देता है, तब भी वह खुद से नामांकन वापस लेने का फैसला नहीं करेंगे।
यानी एक तरफ चुनाव आयोग के आदेश के बाद उनके नामांकन को लेकर संकट पैदा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ उम्मीदवार ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ओर से पर्चा वापस नहीं लेने वाले हैं।
आखिर क्यों फंसा अब्दुल सलाम का नामांकन?
पूरे विवाद की जड़ चुनाव आयोग का वह अंतरिम आदेश (Interim Order) है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पुराने चुनाव चिन्ह को लेकर फैसला किया गया है।
आयोग ने साफ किया था कि 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों में कोई भी गुट ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
अब्दुल सलाम ने इसी नाम और चुनाव चिन्ह के साथ अपना नामांकन दाखिल किया था। ऐसे में आयोग के नए आदेश के बाद उनकी उम्मीदवारी सीधे प्रभावित हो रही है और उनका पर्चा रद्द होने की आशंका जताई जा रही है।
ममता गुट को मिला नया नाम और निशान
चुनाव आयोग के आदेश के बाद दोनों धड़ों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह (Election Symbol) आवंटित किए गए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इस गुट को चुनाव चिन्ह के तौर पर ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का निशान आवंटित किया गया है।
वहीं ऋतब्रत बनर्जी के गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम मिला है। इस गुट के लिए चुनाव चिन्ह के तौर पर ‘लिफाफा’ आवंटित किया गया है।
इस बदलाव के बाद अब असम के नागांव लोकसभा उपचुनाव में ममता गुट के उम्मीदवार अब्दुल सलाम की ओर से दाखिल नामांकन को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि उन्होंने पुराने नाम और पुराने ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह के साथ अपना पर्चा दाखिल किया था।
6 अक्टूबर को होना है उपचुनाव
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में यह भी साफ किया गया है कि 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों में दोनों में से कोई भी गुट ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम या ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
यही आदेश अब अब्दुल सलाम के लिए परेशानी की वजह बन गया है। वह जिस नाम और निशान के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं, उसी पर आयोग ने रोक लगा दी है। इसके बाद उनके नामांकन के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
आयोग के फैसले के खिलाफ SC पहुंचीं ममता
तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और 28 साल पुराने चुनाव चिन्ह के फ्रीज किए जाने के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी है।
ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका में चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में चुनाव आयोग के साथ-साथ बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
यानी अब तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद चुनाव आयोग से निकलकर देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है।
अगले हफ्ते हो सकती है SC में सुनवाई
ममता बनर्जी की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार है। संभावना जताई जा रही है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी सीजेआई (CJI) की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच (Division Bench) अगले हफ्ते इस मामले की सुनवाई कर सकती है।
ऐसे में एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है, तो दूसरी तरफ असम की नागांव लोकसभा सीट पर ममता गुट के उम्मीदवार अब्दुल सलाम के नामांकन का मामला भी इसी विवाद से जुड़ गया है।
फिलहाल अब्दुल सलाम ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वह खुद से नामांकन वापस नहीं लेंगे और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश का पालन करेंगे। वहीं चुनाव आयोग के आदेश के बाद उनके पुराने नाम और चुनाव चिन्ह के साथ दाखिल पर्चे के भविष्य पर फैसला होना बाकी है।


