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इस राज्य में टूटेगा BJP गठबंधन! प्रद्योत देववर्मा दिया सीधा अल्टीमेटम, कहा- ‘वादा पूरा करो, वरना...'
Tripura BJP TMP Alliance Crisis: त्रिपुरा में बीजेपी और टिपरा मोथा पार्टी के गठबंधन पर संकट गहराता दिख रहा है। प्रद्योत देववर्मन ने 2024 के त्रिपक्षीय समझौते को लागू करने की मांग करते हुए बीजेपी को सीधा अल्टीमेटम दिया है।
Tripura BJP TMP Alliance Crisis: त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के तहत 587 ग्राम परिषद चुनावों की आहट के साथ ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। 18 अगस्त 2026 को टिपरा मोथा पार्टी (TMP) के सर्वेसर्वा प्रद्योत विक्रम माणिक्य प्रद्योत देववर्मन ने भारतीय जनता पार्टी को सीधी चेतावनी जारी कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने 2 मार्च 2024 को हुए त्रिपक्षीय समझौते को धरातल पर लागू नहीं किया, तो उनकी पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने और अपना रास्ता अलग करने में जरा भी देर नहीं लगाएगी।
नई दिल्ली की बेनतीजा बैठक के बाद देववर्मा का सख्त रुख
टीएमपी प्रमुख प्रद्योत देववर्मन ने पार्टी नेताओं के साथ अहम बैठक के बाद मीडिया से कड़े लहजे में बातचीत की। उन्होंने कहा कि आगामी ग्राम समिति चुनावों की साझा रणनीति तय करने के लिए नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रही है। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन यदि आदिवासियों को संवैधानिक अधिकार नहीं मिलते हैं, तो गठबंधन में रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता। भाजपा को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए समझौते की शर्तों पर तुरंत अमल करना होगा।
मार्च 2024 का ऐतिहासिक समझौता
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्री की मौजूदगी में 2 मार्च 2024 को हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद टिपरा मोथा मार्च 2024 में माणिक साहा सरकार में शामिल हुई थी। इसके तहत टीएमपी के 2 विधायक, अनीमेश देववर्मा और वृषकेतु देवबर्मा, कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। TTAADC क्षेत्र में टिपरा मोथा की पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। बीते 12 अप्रैल के जिला परिषद चुनावों में 28 में से 24 सीटों पर टीएमपी ने परचम लहराया था, जबकि भाजपा को सिर्फ 4 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।
भाजपा का पलटवार
दूसरी तरफ, भाजपा के जनजातीय नेताओं ने टिपरा मोथा पर दोहरा खेल खेलने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एक तरफ तो टीएमपी दिल्ली में बातचीत की मेज पर बैठती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी इलाकों में पूर्व उग्रवादियों की मदद से चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन भड़का रही है। बारामुरा पहाड़ियों जैसे प्रमुख मार्गों पर किए जा रहे इन विरोध प्रदर्शनों से आम यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है और राज्य सरकार पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।
गैर-जनजातीय वोट बैंक पर असर
भाजपा के अंदरूनी गुटों का दावा है कि पूर्व उग्रवादियों का सहारा लेकर केंद्र पर दबाव बनाने की यह रणनीति सोची-समझी योजना का हिस्सा है। इससे राज्य के गैर-जनजातीय वोट बैंक में नकारात्मक संदेश जा रहा है। ग्राम समिति चुनावों से ठीक पहले शुरू हुई इस तनातनी ने त्रिपुरा के सियासी पारे को गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि भाजपा नेतृत्व इस संकट को टालने के लिए क्या कदम उठाता है या दोनों पार्टियां चुनावी मैदान में आमने-सामने होंगी।


