UCC पर BJP से अपने ही बिफरे! 24 घंटे में 3 सहयोगियों ने बढ़ाई टेंशन, अमित शाह कैसे पार लगाएंगे नईया?

BJP Allies Oppose UCC: अमित शाह के 2029 तक 21 बीजेपी-एनडीए शासित राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान के बाद TDP, JDU और LJP ने अलग-अलग चिंताएं जाहिर की हैं। सहयोगियों के रुख से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

Harsh Srivastava
Published on: 15 Sept 2026 9:38 AM IST
UCC पर BJP से अपने ही बिफरे! 24 घंटे में 3 सहयोगियों ने बढ़ाई टेंशन, अमित शाह कैसे पार लगाएंगे नईया?
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BJP Allies Oppose UCC: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा साल 2029 तक सभी 21 बीजेपी-एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने के बड़े ऐलान के बाद देश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। हालांकि, इस फैसले के 24 घंटे के भीतर ही बीजेपी को सबसे बड़ा झटका अपने ही सहयोगियों से मिला है। केंद्र में एनडीए सरकार की बैसाखी बने तीन प्रमुख दलों- तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद सावधानी भरा रुख अपनाते हुए बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। सहयोगियों के इस बदले रुख से एनडीए के भीतर आंतरिक तनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

TDP ने साफ़ किया अपना रुख

संसद में केंद्र सरकार के बहुमत को टिकाए रखने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने यूसीसी पर बहुत ही नपा-तुला रुख दिखाया है। पार्टी के लोकसभा नेता लावु कृष्ण देवरायालु ने कहा कि टीडीपी सैद्धांतिक रूप से समानता का समर्थन करती है, लेकिन फिलहाल पार्टी के भीतर इस पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब सही समय और जरूरत महसूस होगी, तब सभी पक्षों से बात करके विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि एनडीए में शामिल होने से पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू कह चुके हैं कि यूसीसी के मामले में उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय के हितों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

JDU की कर दी बड़ी डिमांड

बिहार में सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने यूसीसी पर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। जेडीयू नेता श्याम रजक ने कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी कानून का समर्थन करती है, लेकिन इसे बिहार राज्य के भीतर लागू करने के सख्त खिलाफ है। उन्होंने याद दिलाया कि नीतीश कुमार हमेशा से संसद में विधेयक का समर्थन करने और राज्य स्तर पर इसे न थोपने के पक्षधर रहे हैं। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वे इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी की चिंताओं को सामने रखेंगे। नीतीश कुमार का साफ मानना है कि बिना सर्वसम्मति के इसे लागू करना ठीक नहीं होगा।

चिराग पासवान ने भी बढ़ाई टेंशन

लोजपा (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी यूसीसी के मुद्दे पर बीजेपी से अलग और सतर्क रुख अपनाया है। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी देश में एकरूपता के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों (ST) को मिली विशेष छूटों और अधिकारों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को सबसे पहले यूसीसी का अंतिम ड्राफ्ट सार्वजनिक करना चाहिए। सभी समुदायों और हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होने के बाद ही लोजपा इस पर अपना अंतिम रुख तय करेगी।

शिवसेना और HAM का खुला समर्थन

एक तरफ जहां टीडीपी, जेडीयू और लोजपा ने सावधानी बरती है, वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना और जीतन राम मांझी की हम (HAM) ने गृह मंत्री के बयान का खुलकर स्वागत किया है। शिवसेना ने इसे बालासाहेब ठाकरे के सपनों से जोड़ा है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सहयोगी एनसीपीआई ने भी इस पर जल्दबाजी न करने की सलाह दी है। लोकसभा में टीडीपी के 16, जेडीयू के 12 और लोजपा के 5 सांसद हैं, जिनके बिना सरकार चलाना नामुमकिन है। ऐसे में अमित शाह द्वारा 21 राज्यों में 2029 तक यूसीसी लागू करने के सपने की राह में अपने ही सहयोगियों के सवाल सबसे बड़ा रोड़ा बनते दिख रहे हैं।

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Harsh Srivastava

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Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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