ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ठाकरे बंधुओं के मार्च पर पुलिस का बड़ा एक्शन! आयोजकों पर दर्ज हुई FIR

Uddhav-Raj Thackeray March: मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त मार्च के बाद पुलिस ने आयोजकों पर केस दर्ज किया है। मार्च में SIR रद्द करने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 4 Oct 2026 9:33 PM IST
Uddhav Raj Thackeray March | Police Case
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Uddhav-Raj Thackeray March: मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के संयुक्त मार्च के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने संयुक्त मार्च के आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि यह मार्च जरूरी पुलिस अनुमति के बिना निकाला गया था। यह मार्च चुनाव आयोग (Election Commission) और महाराष्ट्र में हुई विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ निकाला गया था।

बिना अनुमति मार्च निकालने का आरोप

मुंबई के आजाद मैदान थाने में दर्ज शिकायत में आयोजकों पर आरोप लगाया गया है कि संयुक्त मार्च के लिए जरूरी पुलिस अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बाद पुलिस ने मार्च के आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

रविवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लंबे समय बाद एक साथ सड़क पर उतरे थे। दोनों नेताओं ने मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च निकाला था। मार्च का मुख्य मुद्दा चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां और महाराष्ट्र में चल रही एसआईआर प्रक्रिया थी।

मेट्रो स्टेशन से महानगरपालिका भवन तक मार्च

यह संयुक्त मार्च मेट्रो स्टेशन से महानगरपालिका भवन तक निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में दोनों दलों के समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में हुई विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को रद्द करने की मांग उठाई गई।

राज ठाकरे ने इस दौरान कहा कि सरकार चुनने का अधिकार जनता का है, चुनाव आयोग का नहीं। वहीं उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।

उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची पर उठाए सवाल

संयुक्त विरोध मार्च के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची (Voter List) से हटाए गए हैं।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के एक उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मतदान के अधिकार को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है, लेकिन अब तक सुनवाई को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है।

उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट की जा रही है और जनता को इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उनके मुताबिक यह सिर्फ किसी एक पार्टी या नेता का मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा सवाल है।

राज ठाकरे ने SIR रद्द करने की मांग की

वहीं मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में हुई विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक एसआईआर केवल आपात परिस्थितियों में कराया जाता है।

राज ठाकरे ने दावा किया कि विधानसभा चुनावों के दौरान 40 से 60 लाख नए मतदाता जोड़े गए और इसी के जरिए सत्ता हासिल की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अब एसआईआर के जरिए करीब दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।

राज ठाकरे ने सभी राजनीतिक दलों से दिल्ली जाकर एसआईआर रद्द कराने की मांग उठाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी दलों को एक साथ आवाज उठानी चाहिए।

ईवीएम पर भी राज ठाकरे का सवाल

राज ठाकरे ने चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम (EVM) के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। उन्होंने ईवीएम का उपयोग बंद कर चुनाव दोबारा मतपत्रों यानी बैलेट पेपर (Ballot Paper) के जरिए कराने की मांग की।

उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव कराने के तरीके पर भी चर्चा जरूरी है। इसी के साथ उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने की अपील की।

अब पुलिस कार्रवाई से बढ़ा विवाद

एक तरफ ठाकरे बंधुओं का संयुक्त मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग और एसआईआर के खिलाफ राजनीतिक विरोध का बड़ा मंच बना, तो दूसरी तरफ मार्च के आयोजकों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज होने से विवाद का एक नया पहलू सामने आ गया है।

अब मामला सिर्फ चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर के विरोध तक सीमित नहीं है। पुलिस की कार्रवाई के बाद संयुक्त मार्च के आयोजन और अनुमति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ठाकरे बंधुओं और उनके समर्थकों की ओर से उठाए गए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के बीच पुलिस की यह कार्रवाई मुंबई के राजनीतिक घटनाक्रम को और चर्चा में ले आई है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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