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उद्धव ने खेला 'सॉफ्ट हिंदुत्व' कार्ड? चंदा चोरी विवाद को हथियार बना चमका रहे अपनी राजनीति, समझिए कैसे
Uddhav Thackeray Soft Hindutva: उद्धव ठाकरे ने 'राम रक्षा आंदोलन' के जरिए अयोध्या राम मंदिर के चंदा विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाया। क्या यह सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे अपनी पारंपरिक राजनीति को फिर से मजबूत करने की रणनीति है?
Uddhav Thackeray Soft Hindutva: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ने के बाद, शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी राजनीति में हिंदुत्व को कभी बहुत ज्यादा आगे नहीं रखा था। लेकिन अब उन्होंने अपनी पूरी रणनीति को अचानक बदल दिया है। दादर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के बाहर खड़े होकर उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के भव्य 'राम रक्षा आंदोलन' की शुरुआत कर दी है। इस मौके पर उन्होंने पुराने राम जन्मभूमि आंदोलन को याद किया और अपने पिता बाल ठाकरे की भूमिका को सबके सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में चंदे के प्रबंधन को लेकर सीधे तौर पर हमला बोला और कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात हुआ है।
बगावत से ध्यान भटकाने की चाल
इस नए आंदोलन को शुरू करने के पीछे की वजह बेहद दिलचस्प है। दरअसल, मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित गड़बड़ियों को एक बड़ा मुद्दा बनाया गया है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी राजनीतिक चाल छिपी हुई है। यह कदम तब उठाया गया है जब अभी दो हफ्ते भी नहीं बीते हैं और उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, मुंबई के उनके बेहद वरिष्ठ नेता सचिन अहीर ने भी पाला बदल लिया है। इन बड़े झटकों के बाद, उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी की चर्चा को बगावत और दलबदल की खबरों से हटाकर वापस अपनी पुरानी और मूल विचारधारा पर लाना चाहते हैं।
हमारा हिंदू भोला है मूर्ख नहीं
सांसदों की इस बड़ी बगावत के बाद, उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के लिए उनके क्षेत्रों का दौरा भी किया था। लेकिन यह नया आंदोलन उनके लिए राज्य स्तर पर अपनी ताकत दिखाने का पहला बड़ा मौका है। मंदिर के बाहर महाआरती करने और रामरक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा और मारुति स्तोत्र का पाठ करने के बाद उद्धव ने अपने भाषण में दलबदल की बात कम की और अयोध्या मुद्दे पर पूरा जोर दिया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हम हिंदू बहुत भोले हैं, लेकिन हम मूर्ख बिल्कुल नहीं हैं। अगर कोई हमारी आस्था का फायदा उठाकर हमारे पवित्र मंदिर को लूटेगा, तो अब देश का हिंदू उसे कभी माफ नहीं करेगा।
राम नहीं चंदे के चोर निशाने पर
उन्होंने 12 साल पुरानी बातों को याद करते हुए कहा कि पहले लोग सोचते थे कि अब हिंदू मार नहीं खाएगा, लेकिन आज हिंदुओं को लूटा जा रहा है। अपने पूरे भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे ने बड़ी समझदारी दिखाते हुए भगवान राम और मंदिर के ट्रस्ट को अलग-अलग रखा। उन्होंने साफ किया कि वे भगवान राम पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं, बल्कि वे तो उन लोगों से हिसाब मांग रहे हैं जो भक्तों के चंदे को संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके पैसे का क्या हुआ। इस रैली में उन्होंने मराठी भाषा में एक नया नारा भी दिया, जिसका अर्थ है कि राम को अपने दिल में रखो और मुंह पर जय श्री राम का नाम रखो।
विचारधारा की याद दिलाने की कोशिश
हालांकि, शिवसेना यूबीटी के बड़े नेताओं का कहना है कि यह कोई नया राजनीतिक रास्ता नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि बाल ठाकरे ने हिंदुत्व को कभी चुनाव का मुद्दा नहीं माना, बल्कि यह तो हमारी पार्टी की आत्मा है। हम तो बस जनता को यह याद दिला रहे हैं कि राम जन्मभूमि आंदोलन में हमारी शिवसेना का कितना बड़ा योगदान था। पार्टी ने बहुत ही चालाकी से इस पूरे मामले को भगवान राम के बजाय भक्तों की आस्था और उनके भरोसे से जोड़ दिया है। नेताओं का कहना है कि अगर चंदे में कोई गड़बड़ी हुई है, तो जिम्मेदार लोगों को इसका जवाब देना ही पड़ेगा। साल 1966 में बनी शिवसेना ने 1980 के दशक में हिंदुत्व अपनाया था, जिसने 1995 में सरकार बनाई थी।


