TRENDING TAGS :
Maharashtra Politics: उद्धव ठाकरे ने भरे मंच से जनता से क्यों मांगी माफी? अमित शाह को लेकर कह दी ये बड़ी बात
Maharashtra Politics: मुंबई के भांडुप में उद्धव ठाकरे ने बागी नेताओं, बीजेपी और अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पार्टी तोड़ने की साजिश का आरोप लगाते हुए गद्दार नेताओं को निशाने पर लिया और मतदाताओं से माफी मांगी। शिवसेना (यूबीटी) में बढ़ती बगावत के बीच उन्होंने संगठन को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
UBT Revolt
Maharashtra Politics: मुंबई के भांडुप इलाके में बागी सांसद संजय दिना पाटिल के गढ़ में उद्धव ठाकरे का एक बेहद आक्रामक रूप देखने को मिला। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने रैली में उमड़े जनसैलाब की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उन्हें अपने सामने सिर्फ शिवसैनिक नहीं, बल्कि धधकती हुई मशालें नजर आ रही हैं।
ठाकरे ने तंज कसते हुए इन बागियों और उनके आकाओं का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने सोई हुई आग को फिर से भड़का दिया है। पार्टी के स्थापना दिवस पर किए गए अपने वादे का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया कि वे अब हर उस जगह खुद जा रहे हैं, जहां पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा गया है। उन्होंने भरे मंच से मतदाताओं से माफी मांगी कि ऐसे गद्दारों को शिवसेना और 'मशाल' के नाम पर टिकट देकर उन्होंने बहुत बड़ी भूल की थी।
बीजेपी पर सीधा और तीखा वार करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस पार्टी ने हमेशा शिवसेना के वजूद को मिटाने की साजिश रची। उन्होंने कांग्रेस से अपनी तीन दशक पुरानी राजनीतिक लड़ाई का भी जिक्र किया, लेकिन साथ ही यह भी माना कि कांग्रेस ने कभी शिवसेना को उस तरह तोड़ने या उसके नेता चुराने की नीचता नहीं की जैसी बीजेपी ने की है।
ठाकरे ने पुराने दिन याद दिलाते हुए कहा कि जब देश में बीजेपी को सड़क पर कोई पूछता तक नहीं था और पूरे देश में उनके पास महज दो सांसद थे, तब शिवसेना ने ही उनका हाथ थामकर उन्हें बड़ा किया था। उनका सीधा आरोप था कि बीजेपी के पास अपना कोई जनाधार नहीं है, बल्कि यह दूसरों के बच्चे चुराकर बड़ी हुई एक खोखली पार्टी है।
अमित शाह को दी खुली चुनौती
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया कोल्हापुर दौरे पर पलटवार करते हुए उद्धव ने बिना नाम लिए उन्हें आड़े हाथों लिया। शाह ने अपनी रैली में दावा किया था कि एकनाथ शिंदे की पार्टी ही असली शिवसेना है। इसका कड़ा जवाब देते हुए ठाकरे ने कहा कि कोई बाहरी व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि बालासाहेब ठाकरे की बनाई इस पार्टी का वारिस कौन होगा।
उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि जो भी लड़ना चाहता है, वह छुपकर नहीं बल्कि खुले मैदान में आए। गृहमंत्री पर सीधा तंज कसते हुए उन्होंने यह भी कह दिया कि आज लोग सिर्फ उस कुर्सी के खौफ से डरते हैं जिस पर आप बैठे हैं। जिस दिन वह कुर्सी छिन जाएगी, आपकी अपनी कोई हैसियत या पहचान नहीं बचेगी।
किराए की दाढ़ी और बिके हुए जमीर पर तंज
बागी नेताओं की जमकर खिल्ली उड़ाते हुए ठाकरे ने सवाल किया कि क्या इन गद्दारों की दाढ़ी भी अपनी है या फिर उसे भी किराए पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि सियासत में आप कुर्सी, गाड़ी और दिखावा तो किराए पर ले सकते हैं, लेकिन जो वफादार आपके लिए अपनी जान न्योछावर करने को तैयार रहते हैं, उन्हें किसी बाजार में खरीदा नहीं जा सकता।
उन्होंने साफ कहा कि अगर इन लोगों को पार्टी ने टिकट देकर सांसद नहीं बनाया होता, तो आज इनकी कोई हैसियत नहीं होती। सम्मान और रुतबा पाने के लिए इंसान में खुद की कोई काबिलियत भी होनी चाहिए। उद्धव ने बीजेपी को चुनौती दी कि अगर वे वाकई शिंदे गुट के सगे हैं, तो अभी ऐलान करें कि अगले चुनाव में यह सीट वे एकनाथ शिंदे के लिए छोड़ रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) में सेंधमारी और बगावत का दौर
गौरतलब है कि बालासाहेब ठाकरे द्वारा 1966 में बनाई गई शिवसेना, जून 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद दो फाड़ हो गई थी। बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना मान लिया। हाल ही में 17 जून को दिल्ली में हुई शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की अहम बैठक से कई बड़े चेहरे नदारद थे।
इनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-आष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर जैसे नेताओं का शामिल न होना दल बदलने का साफ संकेत दे रहा था। इन अटकलों पर तब मुहर लग गई जब निंबालकर और आष्टीकर ने एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का दामन थामने की पुष्टि कर दी। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में कुल नौ सांसदों ने जीत दर्ज की थी, लेकिन अब अपने कुनबे को बिखरने से रोकना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।


