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40 घंटे की मशक्कत, JCB की पूरी ताकत... फिर भी नहीं हिले उज्जैन के खड़े हनुमान! अब स्कैनिंग से खुलेगा राज
Ujjain Khade Hanuman Mandir: उज्जैन के प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने में प्रशासन नाकाम रहा। 40 घंटे की कोशिश के बाद भी JCB से प्रतिमा नहीं हिली। जानें पुरातत्वविद् ने क्या बताया।
Ujjain Khade Hanuman Mandir: उज्जैन के अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने की प्रशासनिक कोशिश लगातार चुनौती बनी हुई है। सड़क चौड़ीकरण की जद में आए मंदिर की प्रतिमा को हटाने के लिए करीब 40 घंटे तक अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। JCB और अन्य संसाधनों की मदद के बावजूद सफलता नहीं मिलने के बाद अब प्रशासन ने जल्दबाजी से बचते हुए विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।
प्रतिमा को हटाए जाने के विरोध में साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों का विरोध भी जारी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रतिमा का इस तरह से नहीं हिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। वहीं पुरातत्व विशेषज्ञ इसे प्राचीन निर्माण तकनीक और प्रतिमा के आधार की संरचना से जोड़कर देख रहे हैं।
चार बार कोशिश, फिर भी टस से मस नहीं हुई प्रतिमा
कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी की जद में अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर भी आ गया है। मंदिर के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को हटाया जा चुका है, लेकिन प्रतिमा को विस्थापित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बताया जा रहा है कि प्रतिमा को हटाने के लिए कई बार प्रयास किए गए। करीब 40 घंटे तक मशीनों और तकनीकी संसाधनों की मदद से कोशिश की गई, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। इसके बाद फिलहाल प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है।
मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने चेतावनी वाला पोस्टर भी लगाया है। इसमें कहा गया है कि प्रतिमा को हटाने के दौरान यदि उसे किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
पुरातत्वविद् ने बताई प्रतिमा की खासियत
विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, खड़े हनुमान जी की यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र के विशेष बेसाल्ट पत्थर से बनी दुर्लभ प्रतिमाओं में शामिल है। इसकी शिल्पकला में परमार काल और राजा भोज के दौर की विशेषताएं दिखाई देती हैं।
डॉ. सोलंकी के मुताबिक, संभव है कि प्रतिमा को प्राचीन समय में विशेष तकनीक से उसके आधार में स्थापित किया गया हो। पुराने समय में आधुनिक मशीनें उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन उस दौर के कारीगर और इंजीनियर पत्थरों में छेद और लॉकिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर विशाल संरचनाओं और प्रतिमाओं को मजबूती से स्थापित करते थे।
यही वजह हो सकती है कि आधुनिक मशीनों से खींचने के बावजूद प्रतिमा आसानी से अपने स्थान से नहीं निकल रही है।
ASI और पुरातत्व विभाग से सलाह लेने का सुझाव
पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने प्रशासन को सुझाव दिया है कि प्रतिमा को हटाने या दूसरी जगह पुनर्स्थापित करने से पहले मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों से सलाह ली जाए।
उनका कहना है कि ऐसी प्राचीन प्रतिमाओं और मंदिरों को सुरक्षित तरीके से विस्थापित एवं पुनर्स्थापित करने का तकनीकी अनुभव विशेषज्ञ एजेंसियों के पास है। इसलिए प्रतिमा की ऐतिहासिक और संरचनात्मक स्थिति को समझने के बाद ही अगला कदम उठाया जाना चाहिए।
अब स्कैनिंग रिपोर्ट से खुलेगा राज
प्रशासन ने भी अब प्रतिमा को जबरन हटाने के बजाय तकनीकी जांच कराने का फैसला किया है। प्रतिमा के आधार की स्थिति समझने के लिए उसके नीचे करीब डेढ़ फीट तक खुदाई की गई है।
अब आर्कियोलॉजिस्ट की टीम अत्याधुनिक मशीनों से प्रतिमा के आधार, उसकी अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। स्कैनिंग रिपोर्ट सामने आने के बाद यह तय किया जाएगा कि प्रतिमा को किस तकनीक से सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है।
प्रशासन की योजना प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित करने की है।
संत बोले- बाबा का संकेत है, यहीं रहना चाहते हैं हनुमान जी
प्रतिमा को हटाने का विरोध कर रहे साधु-संत और स्थानीय श्रद्धालु इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। मंदिर के सेवादार और पुजारी महेश पंडित (बैरागी) का कहना है कि उन्हें लगातार ऐसा महसूस हो रहा है कि बाबा संकेत दे रहे हैं कि वे इसी स्थान पर रहना चाहते हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि जब प्रतिमा को हटाने में लगातार मुश्किल आ रही है तो प्रशासन को इसे किसी दूसरी जगह ले जाने के बजाय इसी स्थान पर मंदिर का पुनर्निर्माण करना चाहिए।
सड़क चौड़ीकरण के कारण हटाया जा रहा मंदिर
दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को देखते हुए सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई इलाकों में विकास कार्य चल रहे हैं। कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण भी इसी योजना का हिस्सा है।
इसी परियोजना की जद में खड़े हनुमान मंदिर आया है। प्रशासन का उद्देश्य प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थापित करना है, लेकिन ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था और प्रतिमा की तकनीकी संरचना के कारण मामला अब बेहद संवेदनशील हो गया है।
फिलहाल सभी की नजरें विशेषज्ञों की स्कैनिंग रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि प्रतिमा आखिर किस तकनीक से अपने आधार में स्थापित है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए हटाना संभव है या नहीं।


