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“मैं आतंकी नहीं, इंकलाब हूं…” हाशिए पर खड़े युवाओं के हीरो उमर खालिद की बेगुनाही और संघर्ष की कहानी!
Umar Khalid Story: उमर खालिद की बेगुनाही, गिरफ्तारी, UAPA केस, JNU विवाद और दिल्ली दंगों से जुड़े आरोपों की पूरी कहानी। जानिए क्यों 2016 से 2025 तक चर्चा में हैं उमर खालिद।
Umar Khalid Story: मेरा नाम उमर खालिद जरूर है, लेकिन मैं आतंकी नहीं हूं…, यह बयान साल 2016 में उस वक्त सुर्खियों में आया, जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कथित देशविरोधी नारेबाजी के मामले में छात्र नेता उमर खालिद को गिरफ्तार किया गया था। उसी दौर में कन्हैया कुमार भी चर्चा में आए और तभी से बीजेपी ने इन छात्र नेताओं को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ कहना शुरू किया।
2016 से 2025 तक क्यों चर्चा
दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमए, एमफिल और पीएचडी करने वाले उमर खालिद छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। 2016 के बाद वे कई मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना करते रहे। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी कानूनी मुश्किल फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी है, जो CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे—ठीक उसी समय जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद पर UAPA के तहत गंभीर आरोप हैं। पांच साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद न तो ट्रायल शुरू हुआ और न ही जमानत मिली। दिल्ली हाई कोर्ट से निराशा के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन यहां भी राहत नहीं मिली। कोर्ट ने एक साल तक दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने पर रोक लगाई और दिल्ली पुलिस को गवाहों की जांच एक साल में पूरी करने का निर्देश दिया।
समर्थक बनाम आलोचक
उमर खालिद को लेकर देश में मत बंटे हुए हैं। एक वर्ग उन्हें पढ़ा-लिखा सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता मानता है, तो दूसरा उन्हें देशविरोधी गतिविधियों से जोड़ता है। उनके समर्थकों का तर्क है कि विचार व्यक्त करने की आजादी के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जबकि आलोचक आरोपों की गंभीरता की बात करते हैं।
परिवार और पृष्ठभूमि
उमर खालिद का परिवार तीन दशक पहले महाराष्ट्र के अमरावती जिले से दिल्ली आया था। उनके पिता सैयद कासिम रसूल इलियास सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। उमर की शिक्षा और छात्र राजनीति में सक्रियता ने उन्हें एक चर्चित चेहरा बनाया।
अमेरिका तक पहुंचा मामला
उमर खालिद को जमानत न मिलने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक गूंजा। 8 अमेरिकी सांसदों ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर निष्पक्ष और समयबद्ध सुनवाई की मांग की। वहीं, न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी ने 2023 में एक कार्यक्रम में उमर खालिद के जेल से लिखे पत्र की पंक्तियां पढ़ते हुए लंबी हिरासत पर सवाल उठाए। हाल ही में ममदानी का उमर खालिद को लिखा एक हस्तलिखित पत्र भी सामने आया, जिसे उनकी पार्टनर बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
किन आरोपों में फंसे हैं उमर खालिद?
2016 में JNU प्रकरण के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन 2020 के दिल्ली दंगों का मामला उनके लिए सबसे बड़ी कानूनी चुनौती बना हुआ है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने का आरोप है। अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम की कथित भूमिका को गंभीर माना है।
आगे का रास्ता
कोर्ट के आदेश के अनुसार, गवाहों की जांच पूरी होने या एक साल बाद उमर खालिद दोबारा निचली अदालत में जमानत की अर्जी दे सकते हैं। इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत मिल चुकी है, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। पिछले नौ वर्षों से उमर खालिद का नाम राजनीति, कानून और अभिव्यक्ति की आजादी की बहस के केंद्र में है, और सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है।


