UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा या नहीं? ग्राहकों की टेंशन पर NPCI ने साफ कर दी पूरी तस्वीर

UPI Charges Row: यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगने की खबरों के बीच एनपीसीआई ने स्थिति साफ कर दी है। ग्राहकों से यूपीआई ट्रांजेक्शन के लिए कोई फीस नहीं ली जाएगी और छोटे दुकानदारों पर भी कोई एमडीआर चार्ज नहीं लगेगा। जानिए पूरी जानकारी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 7 Aug 2026 7:51 PM IST
UPI Charges Row
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UPI Charges Row: जब से यूपीआई आया है, तब से लोगों की जिंदगी काफी आसान हो गई है। चाहे 5 रुपये का भुगतान करना हो या 50 हजार रुपये का, बस एक क्लिक में पेमेंट हो जाता है। लेकिन हाल के दिनों में UPI से भुगतान पर चार्ज लगाए जाने की चर्चा ने ग्राहकों से लेकर दुकानदारों तक सभी की चिंता बढ़ा दी थी। लोगों के मन में सवाल था कि कहीं उन्हें भी यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त पैसे तो नहीं देने पड़ेंगे। अब इस पूरे मामले पर पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (Payments Council of India) ने स्थिति साफ कर दी है।

ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने साफ किया है कि यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर किसी तरह का कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा।

साल 2016 में यूपीआई की शुरुआत के बाद से ही आम लोगों के लिए यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त रही है और आगे भी ग्राहक बिना किसी ट्रांजेक्शन फीस के यूपीआई के जरिए पैसे भेज सकेंगे।

छोटे दुकानदारों पर भी नहीं लगेगा चार्ज

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे दुकानदारों और किराना स्टोर पर भी कोई एमडीआर (MDR) यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) लागू नहीं होगा।

इसका मतलब है कि छोटे व्यापारी यूपीआई पेमेंट स्वीकार करने के लिए किसी तरह का शुल्क देने के लिए बाध्य नहीं होंगे। यूपीआई का उद्देश्य ही देश के छोटे से छोटे दुकानदार तक डिजिटल पेमेंट की सुविधा पहुंचाना है।

क्यों शुरू हुई फिर UPI चार्ज की चर्चा?

यूपीआई अब केवल एक पेमेंट प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम (Real-Time Payment System) बन चुका है।

हर महीने इस प्लेटफॉर्म पर अरबों ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। ऐसे में इसे चलाने वाले डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) को लंबे समय तक मजबूत और सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार निवेश और खर्च की जरूरत पड़ रही है। इसी वजह से यूपीआई भुगतान पर चार्ज लगाने को लेकर चर्चा शुरू हुई।

लगातार हो रहा निवेश

पिछले करीब 10 वर्षों में बैंक (Bank), पेमेंट कंपनियां (Payment Companies), फिनटेक कंपनियां (FinTech Companies), एनपीसीआई (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार यूपीआई सिस्टम को बेहतर बनाने में निवेश कर रहे हैं।

टेक्नोलॉजी (Technology), साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security), फ्रॉड रोकने, नई सुविधाएं जोड़ने और ग्राहकों को बेहतर सहायता देने पर लगातार खर्च किया जा रहा है।

जब UPI मुफ्त है तो कौन उठा रहा है खर्च?

यूपीआई जैसे राष्ट्रीय स्तर के पेमेंट सिस्टम को चलाने में लगातार खर्च होता है। फिलहाल यह खर्च मुख्य रूप से बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (Payment Service Provider) और इस पूरे इकोसिस्टम से जुड़े दूसरे संस्थान उठा रहे हैं।

इसी निवेश की वजह से लोगों को 24 घंटे तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिल रही है।

ग्राहकों पर पड़ेगा असर

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह भी साफ किया है कि अगर भविष्य में बड़े व्यापारियों पर कोई मर्चेंट सर्विस चार्ज (Merchant Service Charge) लागू होता है, तो वह केवल व्यापारी और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच की व्यावसायिक व्यवस्था होगी।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यूपीआई इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से कोई शुल्क लिया जाएगा।

दुनिया के कई देशों में भी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारियों से सर्विस चार्ज लिया जाता है, जबकि ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते रहते हैं।

UPI को मजबूत बनाए रखना क्यों है जरूरी?

यूपीआई अब भारत के सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बन चुका है। करोड़ों लोग हर दिन इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

जैसे-जैसे यूपीआई ट्रांजेक्शन की संख्या बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने की व्यवस्था, सर्वर और नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नई तकनीकों पर भी लगातार निवेश करना जरूरी होगा, ताकि लोगों को भविष्य में भी सुरक्षित और तेज डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती रहे।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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