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US के 100% टैरिफ धमकी के आगे नहीं झुका भारत! मोदी सरकार ने साफ किया अपना रुख, दिया दो टूक जवाब
India Response to US 100% Tariff: अमेरिकी संसद से रूस और ईरान पर प्रतिबंध वाले बिल को मंजूरी मिलने के बाद भारत पर 100% तक टैरिफ का खतरा बढ़ा है। मोदी सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए अपना रुख साफ किया है। अमेरिकी बिल अब राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए आगे बढ़ चुका है।
India Response to US 100% Tariff: अमेरिकी संसद में रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने तथा उनके ऊर्जा खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने से जुड़ा एक बड़ा कानून पास होने के बाद वैश्विक राजनीति गरमा गई है। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आते ही भारत सरकार ने बिना किसी झिझक के बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में अपना रुख जाहिर कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के इस कानून और उससे जुड़ी तमाम गतिविधियों पर बहुत करीब से अपनी नजर बनाए हुए है। भारत ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि देश के आर्थिक और ऊर्जा हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता
भारत सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में बेहद मजबूती से यह बात दोहराई है कि उसकी सबसे पहली और बड़ी जिम्मेदारी अपने डेढ़ अरब से भी अधिक नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल और प्राकृतिक गैस की खरीदारी लगातार जारी रखेगा। यह खरीदारी पूरी तरह से बाजार के बदलते माहौल, कीमतों और देश की प्राथमिकताओं के आधार पर तय होती है। भारत ने अमेरिका को साफ चेतावनी भरे लहजे में जता दिया है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश और व्यापार नीति पर कायम रहेगा और किसी भी बाहरी दबाव या टैरिफ की धमकी के आगे घुटने नहीं टेकेगा।
अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत
विदेश मंत्रालय ने इस बात का भी खुलासा किया कि यह संवेदनशील मुद्दा पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय वार्ताओं में लगातार उठाया जाता रहा है। भारत ने अमेरिकी पक्ष के सामने अपना पक्ष बहुत ही तीखे और तार्किक अंदाज में रखा है। भारतीय पक्ष ने अमेरिका को आगाह किया है कि इस तरह के एकतरफा और कड़े प्रतिबंधों का असर सिर्फ भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरी दुनिया का ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछल सकती हैं, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकती हैं।
व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए ठोस योजना
भारत ने अपना इरादा पूरी तरह से मजबूत कर लिया है कि वह अपने राष्ट्रीय आर्थिक हितों, भारतीय व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक और सख्त कानूनी या कूटनीतिक कदम होंगे, उन्हें पूरी ताकत से उठाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह देश के बड़े व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक रणनीतिक रूपरेखा तैयार कर रही है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में अमेरिकी टैरिफ कानून का कोई विपरीत असर भारतीय कंपनियों या आयात-निर्यात पर पड़ता है, तो उससे तुरंत और कुशलता से निपटा जा सके। कुल मिलाकर, भारत ने इस अमेरिकी कदम का मुकाबला करने के लिए अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ढाल पूरी तरह तैयार कर ली है।


