H-1B Visa: चिलकुर बालाजी मंदिर से H-1B वीजा का क्या है कनेक्शन ? अमेरिकी सीनेटर ने भारतीय पर क्यों उठाए सवाल?

H-1B Visa: अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट ने हैदराबाद के चिलकुर बालाजी मंदिर को 'वीजा मंदिर' कहकर H-1B वीजा प्रणाली पर विवाद खड़ा कर दिया।

Akriti Pandey
Published on: 15 May 2026 1:52 PM IST (Updated on: 15 May 2026 1:52 PM IST)
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H-1B Visa: अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर एरिक श्मिट (Eric Schmitt) ने हाल ही में हैदराबाद के चिलकुर बालाजी मंदिर को लेकर ऑनलाइन विवाद खड़ा कर दिया। यह मंदिर आमतौर पर “वीजा मंदिर” के नाम से जाना जाता है। श्मिट ने यह टिप्पणी अमेरिका के H-1B वीजा प्रोग्राम की आलोचना के दौरान की। सीनेटर श्मिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट की एक श्रृंखला में आरोप लगाया कि अमेरिका की रोजगार-आधारित वीजा प्रणाली स्थानीय मजदूरी को कम करती है और एक वैश्विक “वीजा कार्टेल” बनाती है, जो अमेरिकी कामगारों को नौकरी से विस्थापित करता है।

अमेरिकी मध्यम वर्ग पर असर

श्मिट (Eric Schmitt) ने कहा कि H-1B, L-1, F-1 और ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) जैसे वीजा प्रोग्राम अमेरिकी मध्यम वर्ग को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब अरबों डॉलर AI ट्रेनिंग के लिए भारत भेजे जा रहे हैं, जिसका खर्च अमेरिकी करदाता उठा रहे हैं।अपने दावे को साबित करने के लिए श्मिट ने चिलकुर बालाजी मंदिर की तस्वीर साझा की और इसे ‘वीजा मंदिर’ बताया। उनका कहना था कि यहां हजारों भारतीय वीजा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं और पासपोर्ट पर आशीर्वाद लेते हैं। श्मिट का कहना था कि अमेरिकी कामगारों को इस प्रकार की धांधली वाली प्रणाली का सामना नहीं करना चाहिए।

योग्यता के बजाय जातीय पक्षपात का आरोप

एक अन्य ट्वीट में सीनेटर (Eric Schmitt) ने आरोप लगाया कि विदेशी छात्रों, जिनमें लगभग आधे भारतीय हैं, टैक्स से चलने वाले वर्क परमिट प्राप्त करते हैं। कंपनियों को पेरोल टैक्स या मजदूरी नियमों का पालन नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि भारतीय वीजा धारक पहले H-1B वीजा पाते हैं और फिर ग्रीन कार्ड प्राप्त करते हैं, जबकि अमेरिकी ग्रेजुएट कर्ज में डूबकर सस्ते श्रम के साथ मुकाबला कर रहे हैं। श्मिट ने यह भी दावा किया कि भारतीय वीजा धारक इंटरव्यू के गोपनीय सवालों को साझा करते हैं, और कई बड़ी टेक कंपनियां इसका फायदा उठाकर अमेरिकियों को नौकरियों से बाहर कर देती हैं।

चिलकुर बालाजी मंदिर का महत्व

हैदराबाद में कई मंदिर ऐसे हैं, जहां वीजा प्राप्त करने के लिए भक्त आशीर्वाद लेते हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध है चिलकुर बालाजी मंदिर, जिसे “वीजा बालाजी मंदिर” भी कहा जाता है। यहां भक्त US वीजा आवेदन के लिए भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) का आशीर्वाद लेने आते हैं। भक्त यहां 11 परिक्रमा करते हैं और मन्नत पूरी होने पर 108 परिक्रमा कर धन्यवाद देते हैं। मंदिर में कोई विशेष VIP दर्शन व्यवस्था नहीं है, जिससे यह सभी के लिए समान रूप से खुला है। यह मंदिर 500 साल से अधिक पुराना है और तेलंगाना के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है।

H-1B वीजा क्या है (What Is H-1B Visa)

H-1B वीजा अमेरिका में विदेशी पेशेवरों को काम करने की अनुमति देने वाला वर्क परमिट है। यह मुख्य रूप से IT, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और शोध क्षेत्रों के कुशल पेशेवरों (Professional) के लिए जारी किया जाता है। इस वीजा के लिए किसी अमेरिकी कंपनी का स्पॉन्सर होना आवश्यक है। H-1B वीजा की अवधि प्रारंभ में तीन साल होती है, जिसे छह साल तक बढ़ाया जा सकता है। भारतीय पेशेवरों में इस वीजा की काफी मांग है क्योंकि यह अमेरिका में बेहतर करियर और रोजगार के अवसर देता है।

H-1B वीजा पाने के नियम (H-1B Visa Rules)

H-1B वीजा के लिए विदेशी नागरिक आवेदन कर सकते हैं। आवेदनकर्ता के पास कम से कम 12 साल का कार्य अनुभव होना चाहिए। वीजा का चयन लॉटरी सिस्टम के माध्यम से होता है। इसके तहत वीजा धारक अपने परिवार, यानी पत्नी और बच्चों के साथ अमेरिका में रह सकते हैं और पांच साल बाद नागरिकता के लिए आवेदन भी कर सकते हैं।

विवाद और प्रतिक्रिया

चिलकुर बालाजी मंदिर को “वीजा मंदिर” बताने वाले श्मिट के बयान ने सोशल मीडिया और दोनों देशों के लोगों में बहस छेड़ दी। जबकि मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है, अमेरिकी सीनेटर के आरोपों ने इसे अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया।

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