इस राज्य में BJP की होगी प्रचंड वापसी! सर्वे के नतीजों ने उड़ाए विपक्ष के होश...70 में 54 सीटें मिलने का दावा

BJP Victory 2027 Election Survey: इस राज्य में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सामने आए सर्वे में बीजेपी को 70 में 54 सीटें मिलने का दावा किया गया है। CM की लोकप्रियता, महिला आरक्षण और यूसीसी जैसे मुद्दों पर जनता की राय ने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है।

Harsh Srivastava
Published on: 14 Sept 2026 8:06 AM IST (Updated on: 14 Sept 2026 8:06 AM IST)
इस राज्य में BJP की होगी प्रचंड वापसी! सर्वे के नतीजों ने उड़ाए विपक्ष के होश...70 में 54 सीटें मिलने का दावा
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BJP Victory 2027 Election Survey: आगामी विधानसभा चुनावों से पहले देश के एक प्रमुख पहाड़ी राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। हाल ही में सामने आए एक ताजा और विस्तृत राजनीतिक सर्वे के नतीजों ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। इस सर्वे ने साफ कर दिया है कि राज्य की जनता का मौजूदा नेतृत्व और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है। अगर आज की तारीख में चुनाव करा दिए जाएं या मौजूदा जनमत वोटों में तब्दील हो जाए, तो राज्य की 70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को अकेले 54 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। यह आंकड़ा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के राजनीतिक रुझानों का सबसे बड़ा और निर्णायक संकेत माना जा रहा है।

किस पहाड़ी राज्य में आया यह चुनावी तूफान?

जिस राज्य की राजनीति को लेकर यह बड़ा खुलासा हुआ है, वह कोई और नहीं बल्कि खूबसूरत वादियों, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए मशहूर उत्तराखंड है। देवभूमि उत्तराखंड को लेकर किए गए एक नामी मीडिया संस्थान के इस सर्वे में राज्य के मतदाताओं से सीधे संवाद किया गया। सर्वे में उम्र, सामाजिक वर्ग और राज्य के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर जनता से निष्पक्ष राय मांगी गई थी। इस सर्वे के नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जादू हर वर्ग पर सिर चढ़कर बोल रहा है और राज्य में एक बार फिर पूर्ण बहुमत की प्रचंड सरकार बनने के साफ संकेत मिल रहे हैं।

महिलाओं और सांस्कृतिक रक्षा के फैसले पर जनता का मिला अटूट साथ

सर्वे के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली और ध्यान खींचने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के फैसलों को जनता का भारी समर्थन मिला है। राज्य में महिलाओं को सरकारी नौकरियों और अन्य क्षेत्रों में आरक्षण देने के मुख्यमंत्री के फैसले का 88 प्रतिशत लोगों ने खुलकर समर्थन किया है, जबकि महज 5 प्रतिशत लोगों ने इसका विरोध जताया। इसके अलावा, देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और इसके मूल स्वरूप की रक्षा के लिए उठाए गए सख्त कदमों पर 70 प्रतिशत जनता ने सीएम धामी के प्रयासों पर अपनी पूर्ण सहमति की मुहर लगाई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य की जनता विकास के साथ-साथ अपनी जड़ों और संस्कृति को बचाने वाली नीतियों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

हर सामाजिक वर्ग में बढ़ा CM धामी का राजनीतिक कद

उत्तराखंड के इस सर्वे में किसी एक खास जाति या वर्ग का झुकाव नहीं, बल्कि हर सामाजिक वर्ग का व्यापक समर्थन देखने को मिला है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बनिया और कायस्थ समुदाय में 57.3 फीसदी लोगों ने सरकार पर भरोसा जताया है। वहीं ओबीसी वर्ग से 50.6 फीसदी, पंजाबी-सिख समुदाय से 49.7 फीसदी, ब्राह्मण वर्ग से 46.3 फीसदी, राजपूत वर्ग से 46.1 फीसदी और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से 45.3 फीसदी समर्थन दर्ज किया गया है। यह रुझान साफ संकेत देता है कि मुख्यमंत्री धामी की स्वीकार्यता किसी एक वर्ग विशेष तक सीमित न रहकर पूरे उत्तराखंड के हर समुदाय में गहराई तक पहुंच चुकी है।

हर पीढ़ी ने जताया मजबूत विश्वास

केवल सामाजिक वर्ग ही नहीं, बल्कि उम्र के हर पड़ाव पर भी धामी सरकार का दबदबा कायम है। सर्वे में 18 से 25 वर्ष के 37.8 प्रतिशत युवाओं ने सरकार के काम को सराहा, वहीं 26 से 35 वर्ष के 43 प्रतिशत और 36 से 50 वर्ष के 46.8 प्रतिशत लोगों ने अपनी सहमति दी। 51 से 60 वर्ष के आयु वर्ग में 50.3 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक उम्र के 51.8 प्रतिशत बुजुर्गों ने धामी के नेतृत्व पर मुहर लगाई है।

इन बड़े फैसलों ने बदली तस्वीर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की पहल, देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाना, महिला सशक्तिकरण के कदम, देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा और पारदर्शी सुशासन जैसे बड़े और कड़े निर्णयों ने सीएम पुष्कर सिंह धामी की छवि को एक जनप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया है। 2027 के चुनाव से काफी पहले 54 सीटों का यह अनुमान धामी सरकार के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है, जिसने विपक्ष के तमाम दावों की हवा निकाल दी है।

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Harsh Srivastava

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Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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