Vande Bharat Express Revenue: वंदे भारत ने बढ़ाई रेलवे का मान और आमदनी दोनों

Vande Bharat Express Trains Revenue: वंदे भारत ने रेलवे की रफ्तार के साथ आमदनी और यात्री मांग भी बढ़ाई है। जानिए कितनी वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं, कौन से रूट सबसे लोकप्रिय हैं और क्या वंदे भारत मुनाफे में है या घाटे में?

Yogesh Mishra
Published on: 18 Aug 2026 8:25 PM IST
Vande Bharat Express Trains Revenue
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Vande Bharat Express Trains Revenue 

Vande Bharat Express Trains Revenue: वंदे भारत का मूल नाम ट्रेन-18 था। इसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में भारतीय इंजीनियरों ने विकसित किया। इसकी खास बात यह थी कि परंपरागत भारतीय एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह इसके आगे अलग से इंजन लगाकर डिब्बों को खींचने की आवश्यकता नहीं थी। यह एक स्वचालित ट्रेनसेट है, जिसमें ट्रैक्शन व्यवस्था ट्रेन के विभिन्न डिब्बों में वितरित रहती है। पहला ट्रेन-18 रेक अक्टूबर, 2018 में तैयार हुआ। बाद में इसका नाम बदलकर वंदे भारत एक्सप्रेस किया गया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के दस्तावेज में भी दर्ज है कि पहली ट्रेन-18 अक्टूबर 2018 में तैयार हुई। और पहली यात्री सेवा 15 फरवरी य, 2019 को शुरू की गई।

15 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली–वाराणसी वंदे भारत को हरी झंडी दिखाई। इसका मार्ग नई दिल्ली–कानपुर–प्रयागराज–वाराणसी था। यही भारत की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस थी। बाद में उसी वर्ष दूसरी वंदे भारत नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच शुरू हुई।

इसके बाद इसका दूसरा उन्नत संस्करण आया। 30 सितंबर, 2022 को गांधीनगर कैपिटल–मुंबई सेंट्रल वंदे भारत के साथ वंदे भारत 2.0 की शुरुआत हुई। नया संस्करण पहले की लगभग 430 टन की ट्रेन के मुकाबले करीब 392 टन का था, जिससे उसकी गति पकड़ने की क्षमता बेहतर हुई। इसमें कवच, बेहतर पुनर्योजी ब्रेकिंग और अधिक ऊर्जा-कुशल वातानुकूलन जैसी सुविधाएं जोड़ी गईं।

और अब कहानी केवल बैठने वाली वंदे भारत तक सीमित नहीं है। जनवरी 2026 में पहली वंदे भारत स्लीपर—हावड़ा से कामाख्या—नियमित सेवा में आई।

आज देश में कितनी वंदे भारत चल रही हैं?

यहां संख्या समझने में अक्सर भ्रम होता है। रेलवे एक दिशा की सेवा को भी एक सेवा गिनता है। इसलिए 162 चेयरकार सेवाओं का अर्थ 81 जोड़ी वंदे भारत है। जुलाई 2026 के नवीनतम सरकारी आंकड़े के अनुसार देश में 162 वंदे भारत चेयरकार सेवाएं और 2 वंदे भारत स्लीपर सेवाएं संचालित हो रही थीं। अर्थात कुल 164 सेवाएं, जिन्हें आने-जाने की जोड़ी में देखें तो 82 जोड़ी ट्रेनें कहा जा सकता है। यानी 81 जोड़ी चेयरकार और एक जोड़ी स्लीपर।

मार्च, 2026 में रेलवे ने संसद/पीआईबी में 81 चेयरकार जोड़ियों की पूरी आधिकारिक सूची दी थी। वह सूची इस प्रकार है।

1–20: नई दिल्ली–वाराणसी। नई दिल्ली–श्री माता वैष्णो देवी कटरा। गांधीनगर कैपिटल–मुंबई सेंट्रल। अंब अंदौरा–नई दिल्ली। मैसूरु–चेन्नई सेंट्रल; नागपुर–बिलासपुर। न्यू जलपाईगुड़ी–हावड़ा। सिकंदराबाद–विशाखापत्तनम। साईंनगर शिर्डी–मुंबई सीएसएमटी। सोलापुर–मुंबई सीएसएमटी; निजामुद्दीन–रानी कमलापति; तिरुपति–सिकंदराबाद। कोयंबटूर–चेन्नई। चंडीगढ़–अजमेर। तिरुवनंतपुरम–कासरगोड। पुरी–हावड़ा। देहरादून–आनंद विहार। गुवाहाटी–न्यू जलपाईगुड़ी। नागपुर–इंदौर। मडगांव–मुंबई सीएसएमटी।

21–40: रांची–पटना। धारवाड़–बेंगलुरु। रीवा–रानी कमलापति। गोरखपुर–प्रयागराज। साबरमती–जोधपुर। ओखा–अहमदाबाद। तिरुनेलवेली–चेन्नई एग्मोर। नरसापुर–चेन्नई। यशवंतपुर–काचीगुडा। तिरुवनंतपुरम–मंगलुरु। उदयपुर–असारवा। पटना–हावड़ा। पुरी–राउरकेला। रांची–हावड़ा। दूसरी नई दिल्ली–वाराणसी। कोयंबटूर–बेंगलुरु कैंट। मंगलुरु–मडगांव। मुंबई सीएसएमटी–नांदेड़। दूसरी कटरा–नई दिल्ली। आनंद विहार–अयोध्या कैंट।

41–60: अमृतसर–दिल्ली। मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद। विशाखापत्तनम–सिकंदराबाद। चेन्नई–मैसूर। पटना–न्यू जलपाईगुड़ी। खजुराहो–निजामुद्दीन। बेंगलुरु–कलबुर्गी। विशाखापत्तनम–भुवनेश्वर। गोमतीनगर–पटना। वाराणसी–रांची। देहरादून–लखनऊ। वाराणसी–मेरठ सिटी। नागरकोइल–चेन्नई एग्मोर। बेंगलुरु कैंट–मदुरै। देवघर–वाराणसी। जमालपुर–हावड़ा। राउरकेला–हावड़ा। पटना–टाटानगर। टाटानगर–ब्रह्मपुर। गया–हावड़ा।

61–81: पुणे–हुब्बली। पुणे–छत्रपति शाहू महाराज टर्मिनस। सिकंदराबाद–नागपुर। विशाखापत्तनम–दुर्ग। पटना–टाटानगर की अतिरिक्त सेवा। पटना–टाटानगर की दूसरी सेवा। बनारस–आगरा कैंट। वेरावल–साबरमती। श्रीनगर–श्री माता वैष्णो देवी कटरा की पहली सेवा। इसी मार्ग की दूसरी सेवा। पाटलिपुत्र–गोरखपुर। केएसआर बेंगलुरु–बेलगावी। अमृतसर–कटरा; पुणे–अजनी। जोगबनी–दानापुर। दिल्ली कैंट–जोधपुर। दिल्ली कैंट–बीकानेर। दिल्ली–फिरोजपुर कैंट। एर्नाकुलम–केएसआर बेंगलुरु। खजुराहो–बनारस। सहारनपुर–गोमतीनगर।

इसके अतिरिक्त हावड़ा–कामाख्या वंदे भारत स्लीपर है। इस तरह वर्तमान सरकारी गणना में कुल 164 एकल-दिशा सेवाएं बनती हैं।

दूसरी ट्रेनों से वंदे भारत इतनी अलग क्यों है?

सबसे बड़ा अंतर केवल इसकी शक्ल या सीटों का नहीं। बल्कि ट्रेन की मूल अभियांत्रिकी का है। राजधानी, शताब्दी या सामान्य मेल-एक्सप्रेस में इंजन आगे से डिब्बों को खींचता है। वंदे भारत एक वितरित शक्ति वाला ट्रेनसेट है। इससे वह बहुत जल्दी गति पकड़ सकती है और जल्दी नियंत्रित ढंग से गति कम कर सकती है। यही कारण है कि अनेक स्टेशनों पर रुकने के बावजूद यात्रा-समय कम किया जा सकता है।

इसकी डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा और अनुमत परिचालन गति अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालांकि वास्तविक गति संबंधित रेलखंड की पटरियों, सिग्नल व्यवस्था और अनुमत गति पर निर्भर करती है। इसलिए इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक वंदे भारत पूरी यात्रा में 160 किमी प्रति घंटा चलती है। रेलवे के अनुसार कई मार्गों पर इसके कारण यात्रा-समय में 45 प्रतिशत तक की कमी संभव हुई है।

इसके अलावा इसमें कवच, स्वचालित प्लग-दरवाजे, पूरी तरह बंद गैंगवे, झटका कम करने वाले सेमी-परमानेंट कपलर, आपातकालीन संवाद व्यवस्था, सीसीटीवी, बेहतर अग्नि-सुरक्षा, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, कोच निगरानी प्रणाली और पुनर्योजी ब्रेकिंग जैसी व्यवस्थाएं हैं। एग्जीक्यूटिव चेयरकार में घूम सकने वाली सीटें भी उपलब्ध हैं।

इसलिए इसकी तुलना केवल शताब्दी से करना कुछ अधूरा है। शताब्दी मूलतः पारंपरिक लोकोमोटिव से खींची जाने वाली प्रीमियम ट्रेन है, जबकि वंदे भारत एक एकीकृत आधुनिक ट्रेनसेट है।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल—कौन-सी वंदे भारत लाभ में और कौन घाटे में?

इसकी कोई विश्वसनीय आधिकारिक ट्रेन-वार लाभ/हानि सूची उपलब्ध नहीं है।

रेल मंत्रालय ने लोकसभा में साफ कहा था कि ट्रेन-वार और राज्य-वार राजस्व उत्पन्न होने का विवरण संधारित नहीं किया जाता। इससे भी स्पष्ट उत्तर मार्च 2023 में संसद में दिया गया था। सरकार ने बताया कि वंदे भारत से यात्री किराया आय तो निकाली गई थी—2019-20 में ₹172.90 करोड़, 2020-21 में ₹64.14 करोड़, 2021-22 में ₹150.35 करोड़ और फरवरी 2023 तक 2022-23 में ₹419.66 करोड़—लेकिन ट्रेन-वार लागत-बचत का आंकड़ा नहीं रखा जाता और ऑपरेटिंग रेशियो भी ट्रेन-वार नहीं रखा जाता।

लेकिन मांग के आधार पर कौन-सी बेहद सफल हैं?

नई दिल्ली–वाराणसी सबसे सफल मार्गों में सबसे ऊपर है। अप्रैल 2026 तक इस मार्ग पर संचयी रूप से 73 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की थी। नई दिल्ली–कटरा पर लगभग 56 लाख, सिकंदराबाद–विशाखापत्तनम पर 48 लाख से अधिक और चेन्नई–मैसूरु पर 36 लाख से अधिक यात्रियों की यात्रा दर्ज की गई।

मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद की मांग इतनी मजबूत रही कि अप्रैल 2026 से रेलवे ने इसे स्थायी रूप से 16 से बढ़ाकर 20 डिब्बों का कर दिया।

इसी तरह जम्मू/कटरा–श्रीनगर गलियारे पर भारी मांग देखने को मिली और क्षमता बढ़ाने के बाद भी कई दिनों में ट्रेन लगभग पूरी भरी रही।

और वंदे भारत स्लीपर ने भी शुरुआती तीन महीनों में 1.21 लाख यात्रियों और 100 प्रतिशत से अधिक औसत भराव का आंकड़ा हासिल किया।

पूरे नेटवर्क का आंकड़ा और दिलचस्प है। 2024-25 में वंदे भारत की औसत यात्री-भराव दर 102.01 प्रतिशत बताई गई और 2025-26 के शुरुआती हिस्से में यह 105.03 प्रतिशत तक पहुंची। 100 प्रतिशत से ऊपर का अर्थ यह नहीं कि लोग खड़े होकर यात्रा कर रहे थे। रेलवे की गणना में बीच के स्टेशन पर एक यात्री उतरने और उसी सीट पर आगे दूसरे यात्री के बैठने से एक ही सीट यात्रा के अलग-अलग खंडों में एक से अधिक बार उपयोग हो सकती है।

वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.98 करोड़ लोगों ने वंदे भारत से यात्रा की, जो पिछले वित्त वर्ष के 2.97 करोड़ से करीब 34 प्रतिशत अधिक था। शुरुआत से अप्रैल 2026 तक कुल यात्रियों की संख्या 9.1 करोड़ से अधिक हो चुकी थी।

तो क्या कम यात्री वाली वंदे भारत घाटे में है?

मान लीजिए किसी वंदे भारत में केवल 70 प्रतिशत सीटें भरती हैं। इससे हमें पता चलता है कि उसकी मांग अपेक्षाकृत कमजोर है। लेकिन घाटा निकालने के लिए हमें चाहिए—उस ट्रेन की टिकट आय, बिजली की लागत, चालक एवं अन्य कर्मचारियों की लागत, रखरखाव, खानपान से संबंधित लागत, ट्रेनसेट की पूंजीगत लागत और मूल्यह्रास, स्टेशन एवं पथ उपयोग से जुड़ी लागत, सफाई, मरम्मत आदि।

रेलवे जब यह पूरा खर्च ट्रेन-वार प्रकाशित ही नहीं करता, तो यात्री-भराव प्रतिशत को लाभ प्रतिशत मान लेना आर्थिक दृष्टि से गलत होगा।

तो सभी वंदे भारत मिलाकर कुल लाभ या घाटा कितना है?

रेलवे ने वंदे भारत नेटवर्क के लिए अलग से ऐसा समेकित लेखा सार्वजनिक नहीं किया है जिसमें कहा गया हो—

कुल वंदे भारत आय = X करोड़

कुल परिचालन एवं पूंजीगत लागत = Y करोड़

शुद्ध लाभ/हानि = Z करोड़।

रेलवे के पूरे नेटवर्क के वित्तीय आंकड़े उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए 2023-24 में भारतीय रेल की कुल आय ₹2,56,093 करोड़ और राजस्व व्यय ₹2,52,834 करोड़ था, जिससे ₹3,260 करोड़ का शुद्ध राजस्व बचा। लेकिन इसमें वंदे भारत को अलग करके शुद्ध लाभ निकालना संभव नहीं है।

इसी प्रकार 2025-26 में पूरे भारतीय रेल की यात्री आय करीब ₹80,000 करोड़ रही, लेकिन इसमें वंदे भारत का अलग हिस्सा और उसके विरुद्ध पूरा खर्च सार्वजनिक नहीं किया गया।

इसलिए वंदे भारत परियोजना कुल इतने हजार करोड़ लाभ में/घाटे में है कहना उपलब्ध सरकारी लेखे से सिद्ध नहीं किया जा सकता।

वंदे भारत को लेकर दो अतिवादी दावे—‘ ये ट्रेनें भारी घाटे में चल रही हैं’ और ‘वंदे भारत से रेलवे को भारी मुनाफा हो रहा है’—दोनों को उपलब्ध सरकारी आंकड़े पूरी तरह सिद्ध नहीं करते। इतना जरूर प्रमाणित है कि कुल मिलाकर यात्री मांग बहुत मजबूत है, नेटवर्क का औसत भराव लगभग 100 प्रतिशत या उससे अधिक रहा है और कुछ मार्ग असाधारण रूप से लोकप्रिय हैं। लेकिन लोकप्रियता और वित्तीय लाभ एक ही चीज नहीं हैं।

देश की 81 वंदे भारत : कौन कितनी सफल?

1. नई दिल्ली–वाराणसी

यह केवल पहली वंदे भारत नहीं, बल्कि अब तक पूरे वंदे भारत नेटवर्क की सबसे मजबूत और सर्वाधिक स्थापित सेवा है। फरवरी 2019 में शुरू हुई इस ट्रेन ने दिल्ली और वाराणसी के बीच रेल यात्रा की प्रकृति बदल दी। कानपुर और प्रयागराज जैसे विशाल यात्री केंद्र इसके बीच में हैं, जबकि वाराणसी धार्मिक पर्यटन, व्यवसाय, शिक्षा और पूर्वी उत्तर प्रदेश का बड़ा केंद्र है। अप्रैल 2026 तक इस मार्ग की वंदे भारत सेवाओं से 73 लाख से अधिक यात्री यात्रा कर चुके थे—रेल मंत्रालय ने इसे देश का सबसे व्यस्त वंदे भारत मार्ग बताया।

इसी गलियारे में दूसरी वंदे भारत भी बाद में शुरू करनी पड़ी। इसका अर्थ है कि मांग केवल प्रारंभिक आकर्षण तक सीमित नहीं रही। दिल्ली–वाराणसी में विमान और दूसरी प्रीमियम ट्रेनों के बीच वंदे भारत ने दिन की यात्रा का अलग बाजार बनाया है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल। इसे वंदे भारत परियोजना की सबसे मजबूत व्यावसायिक सेवाओं में रखना उचित है। हालांकि “इतने करोड़ रुपये लाभ” का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

2. नई दिल्ली–श्री माता वैष्णो देवी कटरा

यह भी नेटवर्क की सबसे सफल सेवाओं में है। धार्मिक यात्रियों के कारण इसमें मांग लगभग पूरे वर्ष बनी रहती है। अप्रैल 2026 तक इस मार्ग से करीब 56 लाख यात्रियों के यात्रा करने की पुष्टि रेलवे ने की है।

कटरा के लिए राजधानी, उत्तर संपर्क क्रांति और अन्य ट्रेनें पहले से मौजूद थीं, फिर भी वंदे भारत ने तेज दिन-यात्रा और बेहतर सुविधाओं के कारण अपना अलग यात्री-वर्ग बनाया। बाद में इसी मार्ग पर अतिरिक्त वंदे भारत सेवा का चलना भी मजबूत मांग का संकेत है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

3. गांधीनगर कैपिटल–मुंबई सेंट्रल

यह पश्चिम भारत के सबसे समृद्ध आर्थिक गलियारों में से एक को जोड़ती है। मुंबई–सूरत–वडोदरा–अहमदाबाद–गांधीनगर के बीच व्यापारिक यात्रा बहुत बड़ी है। इस गलियारे की विशेषता यह है कि यात्रियों की मांग केवल दो अंतिम स्टेशनों से नहीं आती; बीच के औद्योगिक शहर भी पर्याप्त यात्री देते हैं।

इसी गलियारे में मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद की एक और वंदे भारत को अप्रैल 2026 में स्थायी रूप से 16 से बढ़ाकर 20 डिब्बों का करना पड़ा क्योंकि रेलवे के अनुसार मांग लगातार बहुत अधिक थी।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

4. नई दिल्ली–अंब अंदौरा

दिल्ली से हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाली इस सेवा को धार्मिक, पर्यटन और स्थानीय आवागमन तीनों प्रकार का यात्री मिलता है। ऊना और आसपास के क्षेत्र के लिए दिल्ली की सीधी तेज कड़ी इसका बड़ा लाभ है। हालांकि इसका बाजार दिल्ली–वाराणसी या दिल्ली–कटरा जैसा विशाल नहीं है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

5. चेन्नई–मैसूरु

दक्षिण भारत की पहली वंदे भारत सेवाओं में यह शामिल है। चेन्नई–बेंगलुरु–मैसूरु गलियारा देश के सबसे सक्रिय प्रौद्योगिकी, उद्योग और पर्यटन गलियारों में से है। अप्रैल 2026 तक इस मार्ग पर 36 लाख से अधिक यात्रियों के सफर की आधिकारिक पुष्टि है।

बेंगलुरु इस ट्रेन की मांग का सबसे महत्वपूर्ण मध्यवर्ती केंद्र भी है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

6. बिलासपुर–नागपुर

यह मध्य भारत के बिलासपुर–रायपुर–दुर्ग–राजनांदगांव–नागपुर गलियारे को जोड़ती है। शुरुआती दौर में इसकी यात्री-भराव को लेकर प्रश्न उठे थे और रेक संरचना में भी परिवर्तन हुए, इसलिए इसे वंदे भारत की सबसे सफल शुरुआती सेवाओं की श्रेणी में रखना कठिन है। लेकिन यह महत्वपूर्ण क्षेत्रीय राजधानी और औद्योगिक नगरों को जोड़ती है तथा सेवा लगातार बनी हुई है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

7. हावड़ा–न्यू जलपाईगुड़ी

कोलकाता से उत्तर बंगाल और सिक्किम के प्रवेश-द्वार तक यह बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। दार्जिलिंग, सिक्किम और डुआर्स के पर्यटक भी न्यू जलपाईगुड़ी का उपयोग करते हैं। बड़ी दूरी पर दिन में तेज यात्रा उपलब्ध कराने के कारण यह सेवा अपनी मजबूत उपयोगिता साबित कर चुकी है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल/सफल की ऊपरी श्रेणी।

8. सिकंदराबाद–विशाखापत्तनम

यह आधिकारिक आंकड़ों में देश की सर्वाधिक यात्री वाली वंदे भारत सेवाओं में तीसरे प्रमुख मार्ग के रूप में सामने आती है। अप्रैल 2026 तक इस गलियारे पर 48 लाख से अधिक यात्री यात्रा कर चुके थे।

हैदराबाद महानगर और विशाखापत्तनम के बीच व्यापार, नौकरी, शिक्षा और पर्यटन की बड़ी मांग है। इसी गलियारे पर दूसरी वंदे भारत भी शुरू की गई।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

9. मुंबई सीएसएमटी–साईंनगर शिर्डी

मुंबई और शिर्डी के बीच धार्मिक यात्रा का बहुत बड़ा स्थायी बाजार है। सड़क से जाने वाले यात्रियों में से भी वंदे भारत ने हिस्सा खींचा। मुंबई–नासिक क्षेत्र स्वयं बड़ी यात्री मांग उत्पन्न करता है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल/सफल।

10. मुंबई सीएसएमटी–सोलापुर

मुंबई–पुणे–सोलापुर का विशाल शहरी और औद्योगिक गलियारा इसका आधार है। यहां यात्रियों के पास इंटरसिटी, बस और निजी वाहन के विकल्प भी बहुत हैं, फिर भी वंदे भारत ने तेज प्रीमियम सेवा के रूप में स्थान बनाया।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

11. रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन

भोपाल–दिल्ली रेल गलियारा पहले से शताब्दी का मजबूत बाजार रहा है। वंदे भारत को उसी स्थापित प्रीमियम यात्री बाजार का लाभ मिला। भोपाल, झांसी, आगरा और दिल्ली जैसे केंद्र इसे मजबूत बनाते हैं।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल/सफल।

12. सिकंदराबाद–तिरुपति

हैदराबाद और तिरुपति दोनों विशाल यात्री केंद्र हैं। तिरुमला धार्मिक यात्रा इस ट्रेन को वर्ष भर मांग देती है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

13. चेन्नई–कोयंबटूर

चेन्नई और पश्चिमी तमिलनाडु के सबसे बड़े औद्योगिक नगर के बीच पहले से ही बहुत बड़ा रेल बाजार है। सड़क और विमान दोनों से प्रतिस्पर्धा के बावजूद वंदे भारत का यात्रा-समय और दिन में सुविधाजनक आवागमन इसे आकर्षक बनाता है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

14. अजमेर–चंडीगढ़

यह राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा–चंडीगढ़ क्षेत्र को जोड़ती है। मार्ग लंबा और बहु-नगर वाला है; मांग अंतिम स्टेशन से अधिक बीच के शहरों से भी बनती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

15. तिरुवनंतपुरम–कासरगोड

केरल वंदे भारत के लिए असाधारण रूप से अनुकूल राज्य सिद्ध हुआ है। घनी आबादी, लगभग लगातार शहरी पट्टी, धीमी पारंपरिक रेल गति और लंबी उत्तर-दक्षिण यात्रा इसकी वजह हैं। केरल की वंदे भारत सेवाओं में कई बार अत्यंत ऊंची यात्री-भराव दर दर्ज हुई है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

16. हावड़ा–पुरी

कोलकाता और जगन्नाथ पुरी के बीच धार्मिक और पर्यटन दोनों प्रकार की मांग अत्यंत बड़ी है। सप्ताहांत और धार्मिक अवसरों पर मांग और बढ़ती है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

17. आनंद विहार–देहरादून

दिल्ली–देहरादून मार्ग पर पर्यटन, शिक्षा, नौकरी और उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों का बड़ा बाजार है। सड़क से प्रतिस्पर्धा के बावजूद रेल की आरामदायक तेज सेवा इसका मजबूत पक्ष है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल/सफल।

18. न्यू जलपाईगुड़ी–गुवाहाटी

यह पूर्वोत्तर और उत्तर बंगाल के बीच महत्वपूर्ण संपर्क है। दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरीय यात्री आधार के मुकाबले कुल बाजार छोटा है, पर क्षेत्रीय महत्व बहुत अधिक है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

19. इंदौर–नागपुर

दो बड़े मध्य भारतीय शहरों को जोड़ने वाली सेवा है, लेकिन दोनों के बीच प्रतिदिन का व्यावसायिक यात्री प्रवाह मुंबई–अहमदाबाद जैसे मार्ग जितना बड़ा नहीं है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

20. मुंबई सीएसएमटी–मडगांव

मुंबई–गोवा भारत के सबसे मजबूत पर्यटन गलियारों में है। कोंकण रेलवे का प्राकृतिक दृश्य और तेज दिन-यात्रा इसे आकर्षक बनाते हैं। पर्यटन मौसम में मांग विशेष रूप से मजबूत रहती है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

21. पटना–रांची

बिहार और झारखंड की राजधानियों के बीच सीधा व्यावसायिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक और पारिवारिक आवागमन इसका आधार है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

22. बेंगलुरु–धारवाड़

कर्नाटक की राजधानी को हुब्बली-धारवाड़ औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्र से जोड़ती है। इसी मांग के कारण इसका विस्तार/संपर्क क्षेत्र आगे बेलगावी तक विकसित हुआ।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

23. रानी कमलापति–रीवा

भोपाल को विंध्य क्षेत्र से जोड़ती है। इसका बाजार महानगरीय से अधिक क्षेत्रीय है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

24. गोरखपुर–प्रयागराज

पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो बड़े धार्मिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्रों को जोड़ती है। अयोध्या मार्ग इसका अतिरिक्त लाभ है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

25. जोधपुर–साबरमती

राजस्थान और गुजरात के दो महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों के बीच तेज संपर्क। पर्यटन और व्यापार दोनों आधार हैं।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

26. अहमदाबाद–ओखा

राजकोट, जामनगर और द्वारका की वजह से यह धार्मिक, औद्योगिक और पर्यटन—तीनों प्रकार का यात्री बाजार प्राप्त करती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

27. चेन्नई एग्मोर–तिरुनेलवेली

दक्षिण तमिलनाडु का चेन्नई से बहुत मजबूत रेल संपर्क है। लंबी दूरी होने के कारण यात्रा-समय बचत महत्वपूर्ण है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल/सफल।

28. चेन्नई–नरसापुर

आंध्र तटीय क्षेत्र को चेन्नई से जोड़ने वाली लंबी सेवा है। मांग कई बीच के शहरों में विभाजित होती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल से मध्यम।

29. काचीगुडा–यशवंतपुर

हैदराबाद–बेंगलुरु भारत के बड़े प्रौद्योगिकी और व्यापार गलियारों में है। मगर विमान और रात्रिकालीन बसों से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

30. मंगलुरु–तिरुवनंतपुरम

केरल के पूरे तटीय शहरी गलियारे का लाभ इसे मिलता है। रास्ते में अनेक महत्वपूर्ण शहर हैं।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

31. उदयपुर–असारवा

उदयपुर और अहमदाबाद क्षेत्र को जोड़ती है। पर्यटन बड़ा आधार है, लेकिन दैनिक व्यावसायिक यात्री आधार बड़े महानगरीय मार्गों से छोटा है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

32. पटना–हावड़ा

पटना–कोलकाता ऐतिहासिक रूप से बहुत बड़ा रेल बाजार है। व्यापार, शिक्षा और कामकाज के यात्रियों की स्थायी मांग है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

33. पुरी–राउरकेला

ओडिशा के धार्मिक-पर्यटन केंद्र को औद्योगिक पश्चिमी ओडिशा से जोड़ती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

34. रांची–हावड़ा

रांची–कोलकाता का व्यावसायिक और पारिवारिक यात्री बाजार मजबूत है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल/सफल।

35. दूसरी नई दिल्ली–वाराणसी

किसी मार्ग पर दूसरी वंदे भारत शुरू होना स्वयं मांग का महत्वपूर्ण संकेत है। पहली सेवा के बावजूद अतिरिक्त तेज प्रीमियम क्षमता की जरूरत बनी।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

36. कोयंबटूर–बेंगलुरु

दो बड़े औद्योगिक और प्रौद्योगिकी केंद्र। सड़क परिवहन से कड़ी प्रतिस्पर्धा है, लेकिन सुविधाजनक रेल समय इसे उपयोगी बनाता है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

37. मंगलुरु–मडगांव

तटीय कर्नाटक और गोवा को जोड़ती है। दूरी अपेक्षाकृत कम और पर्यटन प्रधान होने से कार्यदिवस तथा पर्यटन मौसम की मांग में अंतर हो सकता है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम।

38. मुंबई सीएसएमटी–नांदेड़

मुंबई, पुणे क्षेत्र और मराठवाड़ा के बीच मजबूत सामाजिक एवं आर्थिक संबंध हैं।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

39. दूसरी कटरा–नई दिल्ली

पहली दिल्ली–कटरा सेवा के लगभग 56 लाख यात्रियों का आंकड़ा इस पूरे गलियारे की ताकत दिखाता है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

40. आनंद विहार–अयोध्या कैंट

राम मंदिर के बाद अयोध्या की धार्मिक यात्रा में बहुत वृद्धि हुई। दिल्ली-एनसीआर इसके लिए विशाल स्रोत बाजार है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल/सफल।

41. अमृतसर–दिल्ली

दिल्ली–अमृतसर भारत के स्थापित प्रीमियम रेल बाजारों में है। शताब्दी पहले से सफल रही है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

42. मुंबई सेंट्रल–अहमदाबाद

इसे वंदे भारत की सबसे मजबूत सेवाओं में निर्विवाद रूप से रखा जा सकता है। रेलवे ने अप्रैल 2026 से इसकी क्षमता 16 से 20 डिब्बे स्थायी रूप से बढ़ाई, और इसका कारण लगातार अत्यधिक मांग बताया। 491 किलोमीटर की यात्रा लगभग 5 घंटे 30 मिनट में पूरी होती है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल—शीर्ष समूह।

43. दूसरी विशाखापत्तनम–सिकंदराबाद

इसी गलियारे की पहली सेवा के 48 लाख से अधिक यात्रियों के बाद दूसरी सेवा का होना मजबूत बाजार की पुष्टि करता है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

44. दूसरी चेन्नई–मैसूरु

चेन्नई–बेंगलुरु–मैसूरु गलियारे की भारी मांग के कारण दूसरी सेवा भी टिकाऊ यात्री बाजार पाती है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल।

45. पटना–न्यू जलपाईगुड़ी

बिहार और उत्तर बंगाल के बीच लंबी और उपयोगी दिन-यात्रा सेवा।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

46. खजुराहो–हजरत निजामुद्दीन

दिल्ली को बुंदेलखंड और खजुराहो से जोड़ती है। पर्यटन महत्व बड़ा है, लेकिन रोजमर्रा का व्यावसायिक यात्री आधार अपेक्षाकृत सीमित है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम।

47. बेंगलुरु–कलबुर्गी

उत्तर कर्नाटक और बेंगलुरु के बीच शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक आवागमन इसका आधार है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

48. विशाखापत्तनम–भुवनेश्वर

दो तटीय राज्य राजधानियों/महानगरों और औद्योगिक पट्टी के बीच अच्छा यात्री आधार।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

49. गोमतीनगर–पटना

लखनऊ–अयोध्या–गोरखपुर/उत्तर बिहार दिशा के यात्री प्रवाह को लक्ष्य करती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल से मध्यम।

50. वाराणसी–रांची

धार्मिक शहर और झारखंड की राजधानी को जोड़ती है। बीच के क्षेत्र से भी यात्री मिलते हैं।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

51. देहरादून–लखनऊ

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की राजधानियों को सीधे तेज सेवा से जोड़ती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

52. वाराणसी–मेरठ सिटी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रयागराज और वाराणसी क्षेत्र तक लंबा संपर्क देती है। मार्ग में लखनऊ जैसे केंद्र की भूमिका मांग बढ़ाती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

53. आगरा कैंट–उदयपुर

यह सेवा पर्यटन की दृष्टि से असाधारण मार्ग बनाती है—आगरा, जयपुर क्षेत्र और उदयपुर जैसे पर्यटन केंद्रों का संयोजन।

वर्तमान श्रेणी : सफल, लेकिन पर्यटन-निर्भरता अपेक्षाकृत अधिक।

54. चेन्नई एग्मोर–नागरकोइल

तमिलनाडु के सुदूर दक्षिण को चेन्नई से जोड़ती है। लंबी दूरी और बड़ा पारिवारिक/रोजगार यात्री आधार इसके पक्ष में है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

55. बेंगलुरु कैंट–मदुरै

बेंगलुरु और दक्षिण तमिलनाडु के बीच कामकाजी और व्यावसायिक आवागमन काफी बड़ा है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

56. देवघर–वाराणसी

दो बड़े धार्मिक केंद्रों—बाबा बैद्यनाथ और काशी—को जोड़ती है। धार्मिक पर्यटन इसकी मुख्य ताकत है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

57. जमालपुर–हावड़ा

बिहार के भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र को कोलकाता से तेज संपर्क मिलता है। महानगर से क्षेत्रीय यात्रा इसका आधार है।

वर्तमान श्रेणी : सफल से मध्यम।

58. राउरकेला–हावड़ा

औद्योगिक राउरकेला और कोलकाता महानगर के बीच पर्याप्त व्यावसायिक यात्रा है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

59–60. पटना–टाटानगर सेवाएं

पटना और जमशेदपुर के बीच बिहार–झारखंड का बड़ा कामकाजी, व्यापारिक और पारिवारिक यात्री आधार है। बाद में इसी संबंध पर अतिरिक्त सेवा उपलब्ध होना इस बाजार की उपयोगिता की ओर संकेत करता है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

61. गया–हावड़ा

गया का धार्मिक महत्व और बिहार–कोलकाता का पुराना यात्री प्रवाह दोनों इसकी मांग बनाते हैं।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

62. हुब्बली–पुणे

दो बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ती है, मगर सड़क परिवहन भी मजबूत प्रतियोगी है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

63. कोल्हापुर–पुणे

महाराष्ट्र के भीतर व्यापार, शिक्षा और चिकित्सा संबंधों वाला सक्रिय गलियारा है। दूरी छोटी होने के कारण किराया और सड़क विकल्प इसकी मांग को प्रभावित करते हैं।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

64. नागपुर–सिकंदराबाद

दो बड़े शहर और मध्य भारत-दक्षिण भारत का व्यावसायिक संपर्क इसका आधार है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

65. दुर्ग–विशाखापत्तनम

छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के बीच क्षेत्रीय, औद्योगिक तथा पारिवारिक यात्रा इसका बाजार है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

66–67. टाटानगर–पटना की अतिरिक्त सेवाएं

एक ही शहर-युग्म पर एक से अधिक वंदे भारत सेवाओं की उपस्थिति बताती है कि रेलवे इस गलियारे में पर्याप्त यातायात क्षमता देख रहा है। जुलाई 2026 की संसदीय सूची में दोनों जोड़ी सेवाएं दर्ज हैं।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

68. बनारस–आगरा कैंट

काशी, प्रयागराज क्षेत्र और आगरा को जोड़ने से धार्मिक तथा पर्यटन दोनों बाजार मिलते हैं।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

69. साबरमती–वेरावल

सोमनाथ के धार्मिक पर्यटन के कारण इसका विशेष महत्व है। अहमदाबाद से सौराष्ट्र जाने का बड़ा यात्री प्रवाह भी इसका आधार है।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

70–71. जम्मू तवी–श्रीनगर की दो वंदे भारत

यह वंदे भारत नेटवर्क का आर्थिक ही नहीं, रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व वाला गलियारा है। जुलाई 2026 की नवीनतम आधिकारिक संसदीय सूची में इन्हें जम्मू तवी–श्रीनगर की दो जोड़ी सेवाओं के रूप में दर्ज किया गया है।

जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच सीधी रेल यात्रा का अपना विशाल संभावित बाजार है—स्थानीय यात्री, पर्यटक, तीर्थयात्री और प्रशासनिक यात्रा सभी इसमें शामिल हैं।

वर्तमान श्रेणी : मांग अत्यंत मजबूत होने की संभावना वाला नया प्रमुख मार्ग। नई सेवा होने के कारण इसे पुराने मार्गों की तरह कई वर्षों के आंकड़े पर नहीं परखा जा सकता।

72. पाटलिपुत्र–गोरखपुर

उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश का बहुत बड़ा सामाजिक और आर्थिक यात्री प्रवाह है।

वर्तमान श्रेणी : सफल होने की मजबूत संभावना।

73. बेलगावी–केएसआर बेंगलुरु

उत्तर और दक्षिण कर्नाटक के बीच सीधा प्रीमियम संपर्क।

वर्तमान श्रेणी : सफल।

74. अमृतसर–श्री माता वैष्णो देवी कटरा

दो प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ती है और पंजाब–जम्मू का प्राकृतिक यात्री बाजार भी मिलता है।

वर्तमान श्रेणी : सफल होने की मजबूत संभावना।

75. पुणे–अजनी

पुणे और नागपुर क्षेत्र के बीच बहुत लंबी इंटरसिटी सेवा है। महाराष्ट्र के दो बड़े शहरी-औद्योगिक केंद्र इसका आधार हैं, लेकिन विमान और रात्रिकालीन रेल सेवाओं से प्रतिस्पर्धा भी है।

वर्तमान श्रेणी : अभी विकसित होती मांग।

76. जोगबनी–दानापुर

सीमांचल और पटना महानगरीय क्षेत्र को जोड़ती है। बड़े महानगरों वाली प्रीमियम यात्रा के बजाय क्षेत्रीय संपर्क इसकी विशेषता है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल होने की क्षमता।

77. जोधपुर–दिल्ली कैंट

दिल्ली–राजस्थान पर्यटन और व्यापार दोनों का बड़ा गलियारा।

वर्तमान श्रेणी : सफल होने की मजबूत संभावना।

78. बीकानेर–दिल्ली कैंट

दिल्ली और उत्तर-पश्चिम राजस्थान के बीच तेज कड़ी। जोधपुर की तुलना में संभावित बाजार थोड़ा छोटा है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल।

79. दिल्ली–फिरोजपुर कैंट

पंजाब के मालवा क्षेत्र को दिल्ली से आधुनिक सीधी सेवा मिलती है।

वर्तमान श्रेणी : सफल होने की संभावना।

80. केएसआर बेंगलुरु–एर्नाकुलम

बेंगलुरु–केरल के बीच विमान, बस और रेल तीनों में भारी यात्री प्रवाह है। एर्नाकुलम/कोच्चि स्वयं बहुत बड़ा आर्थिक केंद्र है।

वर्तमान श्रेणी : बहुत सफल होने की मजबूत संभावना।

81. खजुराहो–बनारस

दो विश्वविख्यात धार्मिक-सांस्कृतिक-पर्यटन केंद्रों को जोड़ती है, लेकिन रोजाना कार्यालय या व्यापारिक यात्री का आधार दिल्ली–वाराणसी जैसे मार्ग से छोटा है।

वर्तमान श्रेणी : मध्यम से सफल; पर्यटन इसकी मुख्य ताकत।

और जुलाई 2026 की आधिकारिक सूची में 81वीं जोड़ी वास्तव में सहारनपुर–गोमतीनगर है; ऊपर की नवीनतम संसदीय सूची में क्रमांकन परिवर्तन के कारण खजुराहो–बनारस 80 और सहारनपुर–गोमतीनगर 81 हो गए हैं। इसलिए वर्तमान सही अंतिम सेवा है:

81. सहारनपुर–गोमतीनगर वंदे भारत

यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ के बीच नई तेज कड़ी है। मेरठ-मुजफ्फरनगर-सहारनपुर पट्टी की आबादी और राजधानी लखनऊ के प्रशासनिक संबंध इसकी संभावित मांग का आधार हैं। जुलाई 2026 की आधिकारिक लोकसभा सूची इसे 81वीं जोड़ी के रूप में दर्ज करती है।

वर्तमान श्रेणी : नई सेवा; मांग विकसित हो रही है।

अब सभी 81 का सार क्या निकलता है?

सबसे मजबूत समूह में मैं नई दिल्ली–वाराणसी, नई दिल्ली–कटरा, सिकंदराबाद–विशाखापत्तनम, चेन्नई–मैसूरु, मुंबई–अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम–कासरगोड/केरल गलियारा, चेन्नई–कोयंबटूर, हावड़ा–पुरी, अमृतसर–दिल्ली, पटना–हावड़ा और कुछ दूसरे बड़े महानगरीय गलियारों को रखूँगा। चार मार्गों के बारे में रेलवे ने स्वयं बहुत ठोस संचयी यात्री संख्या दी है—दिल्ली–वाराणसी 73 लाख से अधिक, दिल्ली–कटरा लगभग 56 लाख, सिकंदराबाद–विशाखापत्तनम 48 लाख से अधिक और चेन्नई–मैसूरु 36 लाख से अधिक।

मुंबई–अहमदाबाद इस सूची में खास तौर पर उल्लेखनीय है। अप्रैल 2026 में रेलवे ने 22961/22962 की क्षमता को 16 से 20 डिब्बे स्थायी रूप से बढ़ाया और साफ कहा कि निर्णय लगातार अत्यधिक यात्री मांग के कारण किया गया है। किसी सेवा की व्यावसायिक सफलता का यह यात्री-भराव प्रतिशत से भी मजबूत व्यावहारिक संकेत है—जब रेलवे को स्थायी रूप से सीट क्षमता बढ़ानी पड़े।

दूसरी ओर खजुराहो जैसे पर्यटन-प्रधान मार्ग, कुछ अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्रीय शहरों को जोड़ने वाली सेवाएं और हाल में शुरू हुए नए मार्ग अभी दिल्ली–वाराणसी जैसी स्थापित सफलता के स्तर पर नहीं रखे जा सकते। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे “घाटे वाली” ट्रेनें हैं। हमारे पास ऐसा कहने के लिए ट्रेन-वार खर्च और आय का सरकारी लेखा नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरी वंदे भारत व्यवस्था को असफल कहना उपलब्ध आंकड़ों से बिल्कुल मेल नहीं खाता। वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.98 करोड़ यात्रियों ने वंदे भारत में सफर किया, जबकि 2024-25 में यह संख्या 2.97 करोड़ थी—लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि। शुरुआत से अप्रैल 2026 तक कुल 9.1 करोड़ से अधिक यात्री लगभग एक लाख यात्राओं में इन ट्रेनों का उपयोग कर चुके थे।

रेलवे ने यह भी बताया है कि नेटवर्क-व्यापी यात्री-भराव लगातार लगभग 100 प्रतिशत के आसपास अथवा उससे अधिक रहा है। अप्रैल 2026 में रेलवे के अनुसार 162 चेयरकार सेवाओं में 90 सेवाएं 8 डिब्बों, 34 सेवाएं 16 डिब्बों और 38 सेवाएं 20 डिब्बों के साथ चल रही थीं। यानी मांग के अनुसार रेक की क्षमता भी अलग-अलग रखी जा रही है।

Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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