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PM मोदी की नाराजगी से डर रहे थलपति विजय? विपक्षी प्रदर्शन से बनाई दूरी! जानें क्या है सियासी खेल
Vijay Thalapathy Row: राहुल गांधी से मुलाकात के बाद पीएम मोदी के साथ नजर आए विजय। इंडिया गठबंधन में शामिल होने के बावजूद विपक्षी प्रदर्शन से दूरी ने तमिलनाडु की सियासत में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Vijay Thalapathy Row: तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय यानी विजय थलपति को लेकर इन दिनों कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। विजय तमिलनाडु में अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं और हाल ही में उन पर एआईएडीएमके (AIADMK) के विधायकों को तोड़ने की कोशिश के आरोप भी लगे थे। इसी बीच विजय की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुलाकात हुई और इसके बाद उनका राजनीतिक तेवर कुछ बदला-बदला नजर आ रहा है।
गुरुवार को चेन्नई में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके (TVK) ने बेहद सीमित भागीदारी की। पार्टी की तरफ से सिर्फ स्कूल शिक्षा मंत्री ए राजमोहन पहुंचे। इस प्रदर्शन में टीवीके का कोई दूसरा नेता या कार्यकर्ता नजर नहीं आया और न ही पार्टी का झंडा दिखाई दिया।
ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी (BJP) को नाराज करने से बचना चाहते हैं।
इंडिया गठबंधन में शामिल हो चुकी है TVK
विजय की पार्टी टीवीके इसी महीने की शुरुआत में कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) में शामिल हुई थी। इसके बाद गुरुवार का विरोध प्रदर्शन टीवीके के लिए पहला बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन था।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस प्रदर्शन में विपक्ष के कई नेता चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़क पर उतरे, उसमें टीवीके की मौजूदगी बेहद सीमित रही। विजय ने खुद इसमें हिस्सा नहीं लिया और पार्टी की ओर से सिर्फ मंत्री ए राजमोहन को भेजा गया।
राजमोहन ने अपने भाषण में मतदान के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन पूरे भाषण के दौरान एक बार भी बीजेपी का नाम नहीं लिया।
मंच पर अकेले पहुंचे विजय के मंत्री
विरोध प्रदर्शन में टीवीके की तरफ से राजमोहन की मौजूदगी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी हाल ही में इंडिया गठबंधन में शामिल हुई है। इसके बावजूद प्रदर्शन में पार्टी की ओर से बड़े स्तर पर भागीदारी नहीं दिखाई दी।
राजमोहन ने अपने भाषण के दौरान विजय को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि विजय ने एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता को इतने वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच साझा करने का मौका दिया।
अपने भाषण में राजमोहन ने एसआईआर (SIR) को लेकर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत पर एसआईआर की पूरी प्रक्रिया थोपी गई है। उन्होंने दावा किया कि टीवीके ने तमिलनाडु में सत्ता में आने से पहले ही बिहार में इस प्रक्रिया के लागू होने के समय से इसका विरोध किया था।
राजमोहन ने कहा, हमारा रुख नहीं बदलता
राजमोहन ने अपने भाषण में कहा कि टीवीके की आदत नहीं है कि विपक्ष में रहते हुए कुछ और कहा जाए और सरकार में आने के बाद कुछ और।
उनका कहना था कि टीवीके ने बिहार में एसआईआर लागू होने के समय से ही इसका विरोध किया है और तमिलनाडु में सत्ता में आने से पहले भी पार्टी का यही रुख रहा है।
हालांकि, प्रदर्शन में बीजेपी के खिलाफ सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया गया। यही वजह है कि विजय की सीमित भागीदारी और टीवीके के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या केंद्र को नाराज नहीं करना चाहते विजय?
इंडिया गठबंधन के नेताओं के बीच यह चर्चा है कि तमिलनाडु में अल्पमत सरकार होने के कारण विजय केंद्र सरकार को नाराज करने से बचना चाहते हैं।
विजय की पार्टी पर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के घटक दल एआईएडीएमके के विधायकों को तोड़ने की कोशिश करने के आरोप भी लगे हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में केंद्र के साथ संबंधों को लेकर विजय का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और उसके बाद विपक्ष के प्रदर्शन में टीवीके की सीमित भागीदारी को जोड़कर देखा जा रहा है।
मोदी से मुलाकात के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?
विजय के राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा उस समय और बढ़ गई जब उन्होंने चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। प्रधानमंत्री के साथ उन्होंने मेट्रो के नए हिस्से के उद्घाटन के दौरान सफर किया।
इसके अलावा विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंदिर भी गए और एक सरकारी कार्यक्रम में उनके साथ मंच साझा किया।
इन मुलाकातों से पहले और बाद के राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए अब सवाल उठ रहा है कि आखिर विजय किस दिशा में जाना चाहते हैं।
राहुल गांधी से भी हुई थी मुलाकात
विजय की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी उनसे मिले थे। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी ने विजय के नीलांकरई स्थित आवास पर उनके साथ दोपहर का भोजन किया था।
इस मुलाकात से पहले दोनों पक्षों के बीच काफी अनिश्चितता बनी हुई थी। लेकिन इसके पांच दिन बाद 12 अक्टूबर को डीएमके (DMK) ने इंडिया गठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी।
डीएमके ने कांग्रेस नेताओं पर धोखा देने और द्रविड़ पार्टी पर बार-बार हमले करने का आरोप लगाया।
अब सवाल, विजय कहां जाएंगे?
तमिलनाडु की राजनीति में यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ विजय की पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी नजदीकी मुलाकातें भी सामने आई हैं।
इसके बीच विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में टीवीके की बेहद सीमित मौजूदगी और बीजेपी का नाम तक नहीं लिए जाने ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।
विजय के सामने एक तरफ इंडिया गठबंधन के साथ खड़े रहने की चुनौती है तो दूसरी तरफ तमिलनाडु में अल्पमत सरकार के नेतृत्व के कारण केंद्र के साथ टकराव से बचने की जरूरत भी दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि विजय आगे किस राजनीतिक रास्ते पर जाएंगे और क्या उनका बदला हुआ तेवर केंद्र के साथ संतुलन बनाने की रणनीति है।


