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Sengol बनाने वाले शिल्पकार वुम्मिडी एथिराज का निधन, PM मोदी और उपराष्ट्रपति ने जताया शोक
सेंगोल के शिल्पकार वुम्मिडी एथिराज का 99 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। PM मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केशव प्रसाद मौर्य ने जताया शोक।
Sengol Craftsman Vummidi Ethiraj Death: देश की ऐतिहासिक धरोहर सेंगोल को आकार देने वाले दिग्गज शिल्पकार वुम्मिडी एथिराज का 21 अक्टूबर को निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय आभूषण निर्माण और पारंपरिक शिल्पकला की दुनिया में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
एथिराज वही शिल्पकार थे, जिन्होंने 1947 में देश की आजादी के समय भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपे गए ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। वर्ष 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल को सम्मानजनक स्थान दिए जाने के बाद उनकी इस ऐतिहासिक भूमिका को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
PM मोदी ने याद किया ऐतिहासिक योगदान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एथिराज के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की पारंपरिक विरासत से जुड़े एथिराज को ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
पीएम मोदी ने 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल को सम्मान देने के अवसर को याद करते हुए कहा कि उन्हें एथिराज से मिलने और राष्ट्र तथा संस्कृति के प्रति उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर मिला था। प्रधानमंत्री के मुताबिक, उनका जीवन और कलात्मक कौशल भारत की समृद्ध विरासत तथा देश की विकास यात्रा के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने भारतीय शिल्प परंपरा में योगदान को सराहा
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी एथिराज के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में उनके प्रयासों को भारत की सभ्यतागत विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण योगदान बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय आभूषण निर्माण की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने में एथिराज का योगदान अमूल्य है। उनकी कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
20 साल की उम्र में बनाया था सेंगोल
वुम्मिडी एथिराज का जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ था। तमिलनाडु के वुम्मिडी परिवार से ताल्लुक रखने वाले एथिराज ने महज 20 वर्ष की उम्र में 1947 के ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में भूमिका निभाई थी। वह 125 साल पुराने वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स परिवार के मुखिया थे।
सेंगोल पारंपरिक राजदंड है, जिसे भारत में सत्ता हस्तांतरण और न्यायपूर्ण शासन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। आजादी के समय इसे जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। हालांकि, बाद के वर्षों में इसकी ऐतिहासिक भूमिका पर सार्वजनिक चर्चा सीमित रही।
2023 में केंद्र सरकार ने सेंगोल को नए संसद भवन में स्थापित किया। इसके बाद यह भारतीय सभ्यतागत विरासत और स्वतंत्रता के समय सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय विमर्श का प्रमुख हिस्सा बना।
केशव मौर्य और तमिलनाडु के राज्यपाल ने भी दी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एथिराज के निधन को दुखद बताते हुए कहा कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को संरक्षित करने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल देने की प्रार्थना की।
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी एथिराज के निधन पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय सेंगोल के निर्माण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका देश के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। राज्यपाल के अनुसार, सेंगोल भारत की सभ्यतागत विरासत, न्यायपूर्ण शासन और आजादी के समय सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक है।
वुम्मिडी एथिराज का निधन ऐसे समय हुआ है, जब सेंगोल भारतीय इतिहास, परंपरा और संसद की नई पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में स्थापित है। उनके निधन के साथ भारतीय पारंपरिक आभूषण निर्माण की एक विशिष्ट विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण शख्सियत का अध्याय समाप्त हो गया।


