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'वक्फ मुसलमानों की धार्मिक संस्था नहीं...' वक्फ संशोधन कानून पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब
Waqf Act: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि जब तक मामला पूरी तरह नहीं सुना जाता, तब तक कानून के किसी भी प्रावधान पर अंतरिम रोक न लगाई जाए।
Waqf Amendment Act
Waqf Act: वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है जिसमें उसने कानून की वैधता का पुरजोर बचाव किया है। सरकार ने साफ किया है कि यह कानून न तो किसी की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल देता है और न ही किसी समुदाय के खिलाफ है। इसका मकसद केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को बेहतर बनाना और व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि वक्फ संपत्तियों को पिछले एक सदी से केवल पंजीकरण के बाद ही मान्यता दी जाती रही है, मौखिक रूप से नहीं। ऐसे में नए संशोधन इसी प्रणाली को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक जरूरी कदम हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि जब तक मामला पूरी तरह नहीं सुना जाता, तब तक कानून के किसी भी प्रावधान पर अंतरिम रोक न लगाई जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह संशोधन किसी भी व्यक्ति के धार्मिक अधिकारों को प्रभावित नहीं करता। बल्कि यह कानून केवल प्रबंधन सुधारने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है। हलफनामे में बताया गया कि वक्फ परिषद और औकाफ बोर्ड में कुल 22 सदस्यों में से अधिकतम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे। सरकार ने इसे समावेशी प्रतिनिधित्व का उदाहरण बताया और कहा कि ये सदस्य वक्फ प्रशासन में हस्तक्षेप नहीं करते।
केंद्र का तर्क है कि वक्फ कोई धार्मिक संस्था नहीं बल्कि एक वैधानिक निकाय है, और मुतवल्ली का काम धर्मनिरपेक्ष होता है। यह कानून पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पारित हुआ है, जिसमें जनप्रतिनिधियों की भावनाओं और सुझावों का समावेश है।सरकार ने जानकारी दी कि वक्फ संशोधन कानून को अंतिम रूप देने से पहले संसद की संयुक्त समिति (JPC) की 36 बैठकें हुईं, जिसमें 97 लाख से अधिक हितधारकों ने सुझाव और ज्ञापन दिए। समिति ने देश के 10 बड़े शहरों का दौरा कर आम जनता से सीधे बातचीत भी की।
विवादों को दूर करते हुए केंद्र ने यह भी कहा कि वक्फ के रूप में दर्ज सरकारी भूमि की पहचान का उद्देश्य केवल राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त करना है। ऐसी जमीन को किसी धार्मिक समुदाय की संपत्ति नहीं माना जा सकता। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का रुख यह है कि वक्फ संशोधन अधिनियम एक संतुलित और पारदर्शी कानून है, जो किसी भी समुदाय के अधिकारों को प्रभावित किए बिना, व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास करता है। अदालत अब इस पर अगली सुनवाई में निर्णय लेगी।


