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न संसाधन, न बड़ा मंच…फिर भी 3 सहेलियों ने रचा इतिहास! 5000 महिलाओं की बदली जिंदगी, स्मृति ईरानी ने किया सम्मानित
Smriti Irani Honours WWA: भारत मंडपम में व्यापार महोत्सव के दौरान WWA की संस्थापक चेतना मिश्रा, रीता जोशी और डॉ. शफाली गुप्ता को सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। संगठन से 5,000 महिलाएं और बुनकर जुड़े हैं।
Women Empowerment
Smriti Irani Honours WWA: देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित भव्य भारत मंडपम में आयोजित 'व्यापार महोत्सव' के दौरान भारतीय हस्तकला और हथकरघा जगत को एक नई पहचान मिली। ऑल इंडिया 6 यार्ड्स वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन (WWA) की संस्थापक त्रयी- चेतना मिश्रा, रीता जोशी और डॉ. शफाली गुप्ता को उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए मंच पर विशेष सम्मान प्रदान किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने स्वयं अपने हाथों से इन तीनों महिला उद्यमियों को प्रतिष्ठित सम्मान देकर उनकी लगन और सेवा भावना की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
2009 में 3 दोस्तों ने बोया था बीज, आज 5,000 सदस्यों का बना कारवां
इस पूरी सफलता की नींव साल 2009 में पड़ी थी, जब 3 पक्की सहेलियों ने मिलकर समाज के वंचित वर्ग और पारंपरिक कारीगरों के जीवन में उजाला लाने का संकल्प लिया था। शुरुआती दिनों में बिना किसी बड़े संसाधन के शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास आज एक विराट वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान समय में इस संगठन से पूरे देश भर की लगभग 5,000 महिलाएं और बुनकर सीधे तौर पर जुड़ चुके हैं। जो सफर कभी एक छोटे विचार से शुरू हुआ था, उसने आज राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी है।
4 राज्यों में फैला सेवा का दायरा
संगठन का कार्यक्षेत्र अब केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे 4 प्रमुख राज्यों में व्यापक रूप से फैला हुआ है। खासतौर पर रीवा और विंध्य अंचल के दूरदराज इलाकों में महिला कारीगरों और बुनकर परिवारों के उत्थान के लिए लगातार काम किया जा रहा है। संस्था न केवल इन कारीगरों के कौशल को तराशने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं आयोजित करती है, बल्कि प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से उनके हस्तनिर्मित सामानों को सीधा बाजार भी उपलब्ध कराती है।
'नारी वंदन अवार्ड' मिलने से गूंजी मेहनत की पहचान
व्यापार महोत्सव के इस भव्य मंच पर संस्था को 'नारी वंदन अवार्ड' से भी नवाजा गया। इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए संस्थापकों ने कहा कि यह सम्मान उन हजारों महिला कारीगरों, बुनकरों और महिला उद्यमियों के कठिन परिश्रम की जीत है जो दिन-रात अपनी कला को जीवित रखने में जुटी हैं। दिल्ली के इस प्रतिष्ठित मंच पर मिली यह सराहना पूरे संगठन और उनसे जुड़े हर परिवार के लिए नए उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करने वाली साबित हुई है।
रोजी-रोटी के साथ मानसिक और सामाजिक खुशहाली का अनोखा मॉडल
यह संस्था केवल सामान बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनकर परिवारों के संपूर्ण विकास पर ध्यान देती है। कारीगरों की आजीविका सुधारने के साथ-साथ उनके बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक अधिकारों के लिए भी लगातार योजनाएं चलाई जाती हैं। भारत की समृद्ध और प्राचीन हथकरघा विरासत को सहेजने के साथ-साथ यह संगठन आधुनिक दौर की जरूरतों के हिसाब से ग्रामीण हुनरमंदों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है।
बदलाव का नया संकल्प
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद तीनों संस्थापकों ने ईश्वर और अपने सभी सहयोगियों के प्रति दिल से आभार जताया। उन्होंने साझा संदेश में कहा कि वास्तविक सफलता केवल व्यक्तिगत सम्मान पाने में नहीं है, बल्कि इस बात में छिपी है कि हम समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला पाते हैं। 3 सहेलियों के एक विजन से शुरू हुई यह यात्रा साबित करती है कि जब नीयत साफ हो और इरादे नेक हों, तो सामूहिक प्रयास से समाज में एक बड़ा और ऐतिहासिक परिवर्तन लाया जा सकता है।


