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ममता बनर्जी को झटके पे झटका! नामांकन वापस लेने के बाद अब रबीउल आलम देंगे इस्तीफा, किया बड़ा ऐलान
West Bengal Bypolls: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों के उपचुनाव से ममता बनर्जी गुट बाहर हो गया है। रेजीनगर के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लेने के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है।
Image Source- Social Media
West Bengal Bypolls: पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का गुट पूरी तरह बाहर हो गया है। नंदीग्राम (Nandigram) के बाद अब रेजीनगर (Rejinagar) सीट से भी ममता गुट के उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इतना ही नहीं, रेजीनगर से उम्मीदवार रहे रबीउल आलम चौधरी (Rabiul Alam Chowdhury) ने अब पार्टी छोड़ने का भी ऐलान कर दिया है।
रबीउल आलम चौधरी ने कहा है कि वह आज ही दोपहर तीन बजे पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, ममता बनर्जी का साथ छोड़ने के बाद वह किस पार्टी में जाएंगे, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है।
रेजीनगर से उम्मीदवार ने भी छोड़ा मैदान
रेजीनगर विधानसभा सीट से ममता बनर्जी गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी से भी अलग होने का फैसला किया है।
रबीउल आलम चौधरी के मुताबिक, वह आज दोपहर तीन बजे पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। हालांकि, इस्तीफा देने के बाद उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और वह किस पार्टी में शामिल होंगे, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इस घटनाक्रम के साथ ही पश्चिम बंगाल की इन दोनों विधानसभा सीटों पर ममता गुट के उम्मीदवार अब चुनावी मैदान में नहीं हैं।
नंदीग्राम में भी हुआ था ऐसा ही फैसला
रेजीनगर से पहले नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी ममता गुट को इसी तरह का झटका लगा था। एक दिन पहले ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे (Sanchita Pradhan Dey) ने उपचुनाव की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया था।
संचिता प्रधान डे ने कहा था कि नामांकन वापस लेने का फैसला उन्होंने खुद ममता बनर्जी से बातचीत के बाद लिया है। इसके बाद नंदीग्राम में ममता गुट की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया गया। अब रेजीनगर में भी उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने और पार्टी छोड़ने के ऐलान के बाद दोनों सीटों पर ममता गुट की स्थिति बदल गई है।
ममता के लिए नंदीग्राम क्यों है खास?
नंदीग्राम का ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर (Political Career) में खास महत्व रहा है। साल 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुआ आंदोलन उनके राजनीतिक सफर की अहम लड़ाइयों में शामिल रहा था।
इस आंदोलन ने वाम मोर्चा (Left Front) के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के अभियान को आगे बढ़ाने में मदद की। इसके बाद साल 2011 में तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई।
2011 में कांग्रेस के साथ था गठबंधन
तृणमूल कांग्रेस ने साल 2011 का विधानसभा चुनाव (Assembly Election) कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़ा था। इस चुनाव में गठबंधन ने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा के 34 साल लंबे शासन को खत्म किया था।
नंदीग्राम की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए इस सीट का ममता बनर्जी की राजनीति में अलग स्थान रहा है। अब 15 साल बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में एक बार फिर कांग्रेस को समर्थन दिया है। हालांकि, इस बार विपक्ष की स्थिति पहले से अलग है।
रेजीनगर में क्यों हो रहा है उपचुनाव?
रेजीनगर विधानसभा सीट के खाली होने के बाद यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। यह सीट आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) के कारण खाली हुई।
हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नौदा दोनों विधानसभा सीटों से जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी। सीट खाली होने के बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
इस दिन है मतदान और मतगणना
नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होगा। वहीं दोनों सीटों के नतीजों के लिए मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी।
लेकिन मतदान से पहले ही दोनों सीटों पर ममता बनर्जी के गुट के उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर हो चुके हैं। पहले नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे ने नाम वापस लिया और अब रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी ने भी नामांकन वापस ले लिया है।
रेजीनगर के उम्मीदवार ने इसके साथ ही पार्टी छोड़ने का भी ऐलान कर दिया है। अब वह ममता बनर्जी का साथ छोड़ने के बाद किस राजनीतिक दल में जाएंगे, यह अभी साफ नहीं है।


