ममता के मेडिकल रिकॉर्ड पर कानूनी नोटिस, शुभेंदु अधिकारी के आरोपों के बीच क्यों गरमाया 2021 का विवाद?

Mamata Banerjee's Legal Notice: ममता बनर्जी ने 2021 के मेडिकल रिकॉर्ड के कथित खुलासे पर तीन अस्पतालों और डॉक्टरों को कानूनी नोटिस भेजा है। शुभेंदु अधिकारी के आरोपों के बीच जानिए पूरा विवाद।

Aditya Kumar Verma
Published on: 5 Oct 2026 10:42 PM IST
Mamata Banerjee Sends Legal Notice
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Mamata Banerjee's Legal Notice: तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2021 के अपने मेडिकल रिकॉर्ड (Medical Records) के कथित खुलासे को लेकर तीन अस्पतालों और संबंधित डॉक्टरों को कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा है। नोटिस में इस बात का जवाब मांगा गया है कि ममता बनर्जी के गोपनीय मेडिकल दस्तावेज शुभेंदु अधिकारी तक कैसे पहुंचे और बाद में उन्हें सार्वजनिक कैसे कर दिया गया।

यह कानूनी नोटिस ऐसे समय में आया है, जब नंदीग्राम में 2021 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) प्रचार के दौरान ममता बनर्जी को लगी चोट को लेकर पुराना राजनीतिक विवाद एक बार फिर गरमा गया है। भाजपा नेता और उस समय नंदीग्राम से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को ममता बनर्जी के चोट संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए इसे कथित तौर पर झूठा प्रचार बताया था। अब इसी विवाद के बीच ममता बनर्जी की ओर से मेडिकल रिकॉर्ड की गोपनीयता को लेकर अस्पतालों और डॉक्टरों से जवाब मांगा गया है।

तीन अस्पतालों के डॉक्टरों को नोटिस

ममता बनर्जी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में एसएसकेएम अस्पताल (SSKM Hospital) के निदेशक डॉ मणिमोय बंद्योपाध्याय को शामिल किया गया है। इसके अलावा बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज (Bangur Institute of Neurosciences) के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और वाइस-प्रिंसिपल डॉ पीयूष कुमार रॉय तथा इसी संस्थान के न्यूरोलॉजी विभाग (Neurology Department) के प्रमुख डॉ अतनु बिस्वास को भी नोटिस भेजा गया है।

नोटिस की एक प्रति राज्य स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी दी गई है। इसके जरिए स्वास्थ्य विभाग से भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

मेडिकल रिकॉर्ड कैसे पहुंचे शुभेंदु अधिकारी तक?

कानूनी नोटिस में गोपनीय मेडिकल दस्तावेजों के कथित खुलासे को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। इसमें उन परिस्थितियों की पूरी जानकारी मांगी गई है, जिनमें ममता बनर्जी के मेडिकल रिकॉर्ड देखे गए और साझा किए गए।

नोटिस के जरिए यह पूछा गया है कि मेडिकल रिकॉर्ड बताने या उपलब्ध कराने से पहले ममता बनर्जी की सहमति ली गई थी या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या किसी अदालत के आदेश (Court Order) के जरिए इन दस्तावेजों को जारी करने की अनुमति दी गई थी।

ममता बनर्जी की ओर से यह भी पूछा गया है कि उनके मेडिकल रिकॉर्ड कथित तौर पर शुभेंदु अधिकारी तक किस माध्यम या रास्ते से पहुंचे। इसके बाद जो कागज सार्वजनिक किए गए, क्या वे वास्तव में ममता बनर्जी के असली मेडिकल रिकॉर्ड थे या नहीं, इस पर भी जवाब मांगा गया है।

नोटिस में निजी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बिना अनुमति के सार्वजनिक होने को लेकर भी सवाल उठाया गया है। ममता बनर्जी की ओर से जानना चाहा गया है कि उनकी निजी मेडिकल जानकारी किस तरह बाहर चली गई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी थी।

शुभेंदु अधिकारी ने फिर उठाया 2021 की चोट का मुद्दा

यह कानूनी नोटिस नंदीग्राम में 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी को लगी चोट को लेकर शुरू हुए पुराने विवाद के बीच आया है। शुभेंदु अधिकारी, जो उस समय भाजपा नेता थे और नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे, ने शनिवार को आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी चोट को लेकर गलत दावे किए थे।

शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले को कथित तौर पर झूठा प्रचार बताया और कहा कि इसकी नई जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जांच की डिटेल 9 तारीख के बाद बताई जाएगी।

अधिकारी ने कहा कि 2021 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया था कि उनके साथ बदसलूकी हुई और उनका पैर टूट गया था। हालांकि, उस समय बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज की रिपोर्ट में कहा गया था कि कोई फ्रैक्चर नहीं था।

व्हीलचेयर पर किया था चुनाव प्रचार

यह पूरा विवाद मार्च 2021 का है। नंदीग्राम में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान ममता बनर्जी घायल हो गई थीं। इसके बाद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार जारी रखा था। उनकी चोट की वजह और उसकी गंभीरता को लेकर उसी समय से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि उस समय की मेडिकल रिपोर्ट में फ्रैक्चर नहीं पाया गया था, जबकि ममता बनर्जी की ओर से अपनी चोट को गंभीर बताया गया था। इसी अंतर को लेकर अब एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

सीआईडी कर रही मामले की जांच

इस मामले की जांच सीआईडी (CID) कर रही है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि झूठे प्रचार के आरोपों को लेकर नई जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच से जुड़ी डिटेल 9 तारीख के बाद सामने रखी जाएगी।

एक तरफ शुभेंदु अधिकारी 2021 की चोट और उस समय किए गए दावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस का केंद्र मेडिकल रिकॉर्ड की गोपनीयता और उनके कथित सार्वजनिक किए जाने पर है।

यानी 2021 की नंदीग्राम चुनावी चोट का पुराना विवाद अब एक नए कानूनी सवाल के साथ सामने आया है। सवाल यह है कि ममता बनर्जी के निजी मेडिकल रिकॉर्ड किस तरह शुभेंदु अधिकारी तक पहुंचे और उनकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की अनुमति किसने दी।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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