सुवेंदु अधिकारी नहीं होंगे बंगाल CM! BJP इस बार फिर पलट सकती है 'खेल', जानें नया 'नाम'

West Bengal New CM: बंगाल में भाजपा की जीत जितनी ऐतिहासिक है, उतना ही जटिल है मुख्यमंत्री का चयन।

Snigdha Singh
Published on: 5 May 2026 1:17 PM IST
सुवेंदु अधिकारी नहीं होंगे बंगाल CM! BJP इस बार फिर पलट सकती है खेल, जानें नया नाम
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West Bengal New CM: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त ऐसा भूचाल आया है जिसने दशकों की जमी-जमाई सियासत को हिला कर रख दिया है। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर भगवा लहर का यह उभार सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि वैचारिक बदलाव का ऐलान माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने 206 सीटों के साथ जो परचम लहराया है, उसने पूरे देश की राजनीति को एक नया संकेत दे दिया है कि बंगाल अब बदल चुका है। लेकिन असली सियासी घमासान अब शुरू होता है कौन बनेगा बंगाल का “किंग”?

सत्ता की कुर्सी पर किसका अधिकार?

दिल्ली से लेकर कोलकाता तक एक ही सवाल गूंज रहा है। भाजपा के भीतर कई नाम तेजी से उभर रहे हैं। सबसे चर्चित चेहरा हैं सुवेंदु अधिकारी, वही नेता जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ भवानीपुर में करारी शिकस्त दी। यह जीत सिर्फ चुनावी नहीं, प्रतीकात्मक भी है दीदी के किले में सेंध। इसके अलावा समिक भट्टाचार्य, उत्पल ब्रह्मचारो (उत्पल महाराज) और स्वपन दासगुप्ता जैसे नाम भी चर्चा में हैं। हर नाम के पीछे अपनी ताकत, अपना समीकरण और अपनी लॉबी है।

“बंगाल का बेटा” ही बनेगा मुख्यमंत्री

गृह मंत्री अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं सीएम चेहरा कोई बाहरी नहीं होगा। वह बंगाल की मिट्टी से जुड़ा, बंगाली भाषा और संस्कृति को समझने वाला बंगाल का बेटा होगा। इसका मतलब साफ है दिल्ली से पैराशूट लैंडिंग नहीं होने वाली।

सुवेंदु अधिकारी क्यों सबसे आगे?

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा गूंज अगर किसी नाम की है, तो वह है सुवेंदु अधिकारी। वजह साफ है कि ममता बनर्जी को दो बार हराने का रिकॉर्ड है। नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर दमदार जीत हासिल की। अधिकारी की संगठन और कार्यकर्ताओं में मजबूत पकड़ भी है। यह भी कहा जा रहा है कि अमित शाह के कहने पर ही उन्होंने भवानीपुर से चुनाव लड़ा और नतीजा सबके सामने है।

समिक भट्टाचार्य: संगठन का चेहरा

अगर पार्टी संगठन को इनाम देती है, तो समिक भट्टाचार्य का दावा मजबूत हो जाता है। उन्होंने बंगाल में भाजपा को जड़ से खड़ा किया, कार्यकर्ताओं को जोड़ा और एक मजबूत ढांचा तैयार किया। उनकी छवि एक संतुलित, पढ़े-लिखे और आरएसएस से जुड़े नेता की है जो भाजपा के कोर वोटर को पसंद आती है।

“योगी मॉडल” की चर्चा, उत्पल महाराज

बंगाल की सियासत में इस बार धार्मिक राष्ट्रवाद भी एक बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है। ऐसे में उत्पल महाराज का नाम अचानक तेजी से ऊपर आया है। उनका प्रभाव, धार्मिक छवि और भारी मतों से जीत उन्हें एक फायरब्रांड विकल्प बनाती है। कुछ लोग इसे उत्तर प्रदेश मॉडल की झलक मान रहे हैं।

क्या भाजपा फिर चौंकाएगी?

भाजपा का इतिहास रहा है आखिरी समय में ऐसा नाम सामने लाना, जिसकी चर्चा कम हो। जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुआ। इसलिए यह मान लेना कि रेस सिर्फ एक-दो नामों तक सीमित है, शायद जल्दबाजी होगी।

बंगाल में भाजपा की जीत जितनी ऐतिहासिक है, उतना ही जटिल है मुख्यमंत्री का चयन। यह सिर्फ एक चेहरे का फैसला नहीं होगा, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा तय करेगा। एक बात तय है बंगाल की सत्ता अब नई कहानी लिखने जा रही है। और इस कहानी का नायक कौन होगा, यह फैसला ही सबसे बड़ा राजनीतिक थ्रिलर बन चुका है।

Snigdha Singh

Snigdha Singh

Director : Content snigdhajimmc098@gmail.com

Hi! I am Snigdha Singh, Leadership role in Newstrack. Leading the editorial desk team with ideation and news selection and also contributes with special articles and features as well. I started my journey in journalism in 2017 and has worked with leading publications such as Jagran, Hindustan and Rajasthan Patrika and served in Kanpur, Lucknow, Noida and Delhi during my journalistic pursuits.

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