Bengal New CM: बंगाल की राजनीति के ‘अधिकारी’: कांग्रेस से टीएमसी, फिर बीजेपी तक शुभेंदु की कहानी

West Bengal New CM: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अगर किसी परिवार ने पिछले तीन दशकों में सबसे तेज़ी से अपना प्रभाव बढ़ाया है, तो उसमें अधिकारी परिवार का नाम सबसे ऊपर आता है।

Neel Mani Lal
Published on: 8 May 2026 7:01 PM IST
West Bengal New CM Suvendu Adhikari Wikipedia
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West Bengal New CM Suvendu Adhikari Wikipedia

West Bengal New CM: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अगर किसी परिवार ने पिछले तीन दशकों में सबसे तेज़ी से अपना प्रभाव बढ़ाया है, तो उसमें अधिकारी परिवार का नाम सबसे ऊपर आता है। इसी परिवार के शुभेंदु अधिकारी आज पश्चिम बंगाल में पहली भाजपा सरकार के सीएम घोषित किये गए हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक जड़ें कांग्रेस की मिट्टी से निकली थीं। पूर्व मेदिनीपुर के कांथी इलाके से उभरे इस परिवार ने पहले कांग्रेस, फिर तृणमूल कांग्रेस और अब भाजपा के जरिए बंगाल की राजनीति में अपना दबदबा बनाया है।

पिता से मिली राजनीति की विरासत (West Bengal New CM Suvendu Adhikari Career)

शुभेंदु अधकारी के पिता शिशिर अधिकारी लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहे। बाद में वे ममता बनर्जी के साथ टीएमसी में गए और केंद्र में मनमोहन सिंह सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री भी बने। वे कांथी लोकसभा सीट से कई बार सांसद रहे।

कांग्रेस से शुरू हुआ शुभेंदु का सफर (West Bengal New CM Suvendu Adhikari Politics)

बहुत कम लोग जानते हैं कि शुभेंदु अधकारी ने अपना पहला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 1995 में कांग्रेस पार्टी के पार्षद के तौर पर हुई थी जब वे कांथी नगरपालिका के काउंसलर बने। 1998 में जब ममता बनर्जी ने टीएमसी बनाई, तब अधिकारी परिवार भी उनके साथ आ गया। 2007 के नंदीग्राम आंदोलन ने शुभेंदु को राज्यव्यापी पहचान दिलाई। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन में वे टीएमसी के सबसे आक्रामक चेहरों में से एक बने। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम आंदोलन ने ही 2011 में लेफ्ट फ्रंट के 34 साल पुराने शासन को खत्म करने की जमीन तैयार की।

एक परिवार, कई सांसद (West Bengal New CM Suvendu Adhikari Family)

अधिकारी परिवार की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि एक समय एक ही परिवार के कई सदस्य संसद और विधानसभा में थे। शुभेंदु अधकारी पहले नंदीग्राम से विधायक थे फिर बाद में भाजपा का चेहरा बने, इनके भाई दिब्येंदु अधिकारी 2019 में तमलुक से टीएमसी सांसद रहे और अब ये भाजपा में हैं। एक अन्य भाई सौमेंदु अधिकारी कांथी से भाजपा के सांसद हैं। इनके पिता सिसिर अधिकारी पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

दिलचस्प बात यह भी है कि जब शुभेंदु 2020 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में गए तब परिवार के भीतर भी राजनीतिक खींचतान की चर्चा तेज़ हो गई थी। हालांकि बाद में पिता सिसिर अधकारी भी भाजपा में शामिल हो गए।

एक समय शुभेंदु अधकारी को ममता बनर्जी का सबसे भरोसेमंद नेता माना जाता था। लेकिन 2020 में उन्होंने भाजपा में शामिल हो कर बंगाल की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद वे बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने।

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अधिकारी परिवार की ताकत सिर्फ चुनाव जीतने में नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने में रही है। पूर्व मेदिनीपुर में पंचायत से लेकर लोकसभा तक परिवार का प्रभाव लंबे समय तक कायम रहा।

Admin 2

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