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ममता या विपक्ष... तीसरी राज्यसभा सीट पर कौन मारेगा बाजी? जानिए पूरा समीकरण
West Bengal Rajya Sabha Election: पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होगा। जानिए तीसरी सीट पर क्यों फंस सकता है मामला और क्या कहते हैं विधानसभा के चुनावी समीकरण।
West Bengal Rajya Sabha Election: पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 24 जुलाई को मतदान होगा और उसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे। दो सीटों पर मुकाबला साफ नजर आ रहा है, लेकिन तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। सभी की नजर इस बात पर है कि अलग-अलग दलों और गुटों की रणनीति चुनावी नतीजों को किस तरह प्रभावित करती है।
24 जुलाई को होगा मतदान
चुनाव आयोग ने तीनों रिक्त सीटों पर एक साथ मतदान कराने का फैसला किया है। वोटिंग सुबह से शुरू होगी और शाम को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। हालांकि चुनाव का कार्यक्रम एक जैसा है, लेकिन प्रत्येक सीट के लिए अलग-अलग चुनावी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
कैसे तय होती है राज्यसभा चुनाव में जीत?
राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे मतदान नहीं करती। इसमें संबंधित राज्य के विधायक अपने वोट के जरिए उम्मीदवारों का चुनाव करते हैं।पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 विधायक हैं। ऐसे में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 74 वोट की जरूरत होती है। इसी संख्या के आधार पर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार करते हैं।
तीसरी सीट पर क्यों है सबसे ज्यादा चर्चा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीसरी सीट का मुकाबला सबसे दिलचस्प हो सकता है। यदि किसी दल या गुट को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, तो परिणाम अप्रत्याशित भी हो सकते हैं। इस सीट पर क्रॉस वोटिंग, अतिरिक्त समर्थन या राजनीतिक समझौते जैसी संभावनाओं पर भी नजर रखी जा रही है।
सभी दलों की रणनीति पर नजर
राज्यसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में दलों के भीतर एकजुटता सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। अगर किसी भी पार्टी के विधायक अलग रुख अपनाते हैं, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। इसी वजह से सभी दल अपने विधायकों के संपर्क में हैं और चुनाव तक किसी तरह की टूट-फूट से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
क्रॉस वोटिंग भी बदल सकती है तस्वीर
राज्यसभा चुनाव में कई बार क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिलती है। अगर किसी पार्टी के विधायक दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करते हैं, तो नतीजों पर उसका सीधा असर पड़ सकता है। इसी कारण तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मतदान के दिन किस तरह की स्थिति बनेगी।
नतीजों पर रहेगी सबकी नजर
24 जुलाई को होने वाला यह उपचुनाव सिर्फ खाली सीटों को भरने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का भी अहम संकेत माना जा रहा है। मतदान के बाद यह साफ हो जाएगा कि किस दल ने अपने विधायकों को एकजुट रखा और किसकी रणनीति सफल रही। खासकर तीसरी सीट का परिणाम राज्य की राजनीति में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर मतदान और मतगणना के दिन पर टिकी है, जब यह स्पष्ट होगा कि राज्यसभा की तीनों सीटों पर कौन जीत दर्ज करता है और क्या चुनावी गणित के मुताबिक ही नतीजे आते हैं या कोई नया राजनीतिक उलटफेर देखने को मिलता है।


