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बंगाल में पलटने वाला है पूरा खेल! राज्यसभा की 3 सीटों पर BJP का ऐसा दांव, ममता की बढ़ीं मुश्किलें
WB Rajya Sabha Election 2026: चुनाव आयोग द्वारा तीनों सीटों के लिए अलग-अलग मतदान कराने के निर्णय ने पूरे चुनावी समीकरण को नया मोड़ दे दिया है।
West Bengal Rajya Sabha Election 2026
WB Rajya Sabha Election 2026: पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की 3 रिक्त सीटों पर आगामी 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस चुनाव को केवल 3 सीटों की तगड़ी लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर और विधानसभा के मौजूदा शक्ति संतुलन की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा तीनों सीटों के लिए अलग-अलग मतदान कराने के निर्णय ने पूरे चुनावी समीकरण को नया मोड़ दे दिया है। यही कारण है कि BJP और TMC दोनों की नज़रें अब विधानसभा के संख्या बल और विधायकों की एकजुटता पर टिकी हुई हैं।
दरअसल, ये तीनों सीटें तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। निर्वाचन आयोग ने इन खाली सीटों पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम जारी करते हुए 14 जुलाई को नामांकन की आखिरी तिथि और 24 जुलाई को मतदान की तारीख तय की है।
अलग-अलग चुनाव से बदल गया पूरा गणित
राज्यसभा की इन तीनों सीटों के चुनाव सामान्य चुनाव की तरह एक साथ नहीं होंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक, हर एक रिक्त सीट के लिए अलग अधिसूचना जारी की गई है और हर सीट के लिए अलग मतदान कराया जाएगा। यानी प्रत्येक सीट पर विधायकों के वोट स्वतंत्र रूप से गिने जाएंगे।
यह व्यवस्था जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुरूप है। ऐसे में किसी भी दल के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वह हर एक सीट पर अपने उम्मीदवार के पक्ष में पर्याप्त विधायक जुटा सके।
विधानसभा का संख्या बल क्यों बना निर्णायक?
इस बार पूरा चुनाव विधानसभा के मौजूदा गणित पर टिका हुआ माना जा रहा है। वोटिंग तक वर्तमान राजनीतिक स्थिति में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता, तो BJP अपने विधायकों के समर्थन के आधार पर तीनों सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग चुनाव होने के कारण प्रत्येक सीट पर आवश्यक समर्थन का आकलन अलग होगा। यही वजह है कि विधानसभा में विधायकों की संख्या और पार्टी अनुशासन इस चुनाव में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।
TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती
तृणमूल कांग्रेस के लिए यह चुनाव सिर्फ सीट बचाने की लड़ाई नहीं बल्कि संगठनात्मक मजबूती की भी परीक्षा माना जा रहा है। जिन 3 नेताओं ने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी, उन्होंने पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से पार्टी के अंदर असंतोष और आंतरिक खींचतान की चर्चाएं लगातार होती रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के अंदर एक असंतुष्ट गुट सक्रिय है। अगर मतदान के दौरान सभी विधायक पार्टी लाइन पर मतदान नहीं करते हैं, तो TMC के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व लगातार अपने विधायकों को एकजुट रखने के प्रयासों में पूरी तरह से जुटा हुआ है।
BJP को क्यों दिख रही है उम्मीद?
BJP इस उपचुनाव को पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी बढ़ती स्वीकार्यता के संकेत के रूप में देख रही है। पार्टी का मानना है कि अगर विधानसभा का मौजूदा समीकरण मतदान तक कायम रहता है और सभी विधायक अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करते हैं, तो उसे तीनों सीटों पर फायदा मिल सकता है।
हालांकि, अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों के नामांकन, मतदान के दिन वास्तविक संख्या बल और क्रॉस वोटिंग जैसी संभावनाओं पर भी निर्भर करेगी। इसलिए चुनाव नतीजे को लेकर अभी पूरी तरह निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
इन सीटों का कितना बचा है कार्यकाल?
तीनों रिक्त सीटों का शेष कार्यकाल अलग-अलग है।
- सुखेंदु शेखर रॉय का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक था।
- प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल भी 18 अगस्त 2029 तक निर्धारित था।
- सुष्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था।
इन इस्तीफों के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों की संख्या कम होकर 9 रह गई है।
परिणाम का राजनीतिक प्रभाव दूरगामी होगा
पश्चिम बंगाल की इन तीनों राज्यसभा सीटों का नतीजे सिर्फ संसद के उच्च सदन की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा। अगर BJP बेहतर प्रदर्शन करती है तो इसे राज्य की राजनीति में उसके बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जाएगा। वहीं, अगर तृणमूल कांग्रेस अपनी सीटें बचाने में सफल रहती है तो यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व और संगठनात्मक पकड़ का बड़ा संदेश होगा।
फिलहाल सभी की नज़रें 24 जुलाई को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं। यह उपचुनाव आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।


