West Bengal News: बंगाल में जाति प्रमाण पत्रों पर बड़ा एक्शन! 1.69 करोड़ SC-ST और OBC सर्टिफिकेट की होगी जांच

West Bengal News: पश्चिम बंगाल सरकार ने 2011 से जारी 1.69 करोड़ SC, ST और OBC जाति प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। सरकार को कई प्रमाण पत्रों की सत्यता पर शिकायतें मिली हैं।

Harsh Sharma
Published on: 16 May 2026 4:34 PM IST (Updated on: 16 May 2026 4:35 PM IST)
West Bengal News: बंगाल में जाति प्रमाण पत्रों पर बड़ा एक्शन! 1.69 करोड़ SC-ST और OBC सर्टिफिकेट की होगी जांच
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Bengal News: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में साल 2011 से अब तक जारी किए गए अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इन प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाए। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमाण पत्रों की सत्यता को लेकर सवाल उठे हैं।

1.69 करोड़ प्रमाण पत्रों की होगी जांच

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 2011 से अब तक करीब 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। अब सरकार को शिकायतें मिल रही हैं कि इनमें से कुछ प्रमाण पत्र गलत तरीके से जारी किए गए हो सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन ने दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। सरकार ने सभी उप-विभागीय अधिकारियों (SDO) को निर्देश दिया है कि प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों से सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। जांच के दौरान आवेदकों की सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी समीक्षा की जाएगी।

गलत तरीके से प्रमाण पत्र देने के आरोप

राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में ऐसी कई शिकायतें सामने आई थीं कि कुछ लोगों को बिना सही जांच के SC, ST और OBC प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। आरोप है कि कई ऐसे लोग भी लाभ ले रहे थे जो वास्तव में इन वर्गों में शामिल नहीं थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2021 विधानसभा चुनाव से पहले जंगलमहल और दूसरे इलाकों में बड़ी संख्या में जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। उस समय राजनीतिक कारणों से प्रक्रिया में तेजी लाई गई थी, जिसके कारण कई मामलों में सही तरीके से जांच नहीं हो सकी।

‘दुआरे सरकार’ कार्यक्रम के बाद बढ़े आवेदन

सरकार द्वारा चलाए गए ‘दुआरे सरकार’ कार्यक्रम के दौरान लाखों लोगों ने जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत करीब 47 लाख से ज्यादा प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। इनमें लगभग 32 लाख SC प्रमाण पत्र, 6 लाख से अधिक ST प्रमाण पत्र और 8 लाख से ज्यादा OBC प्रमाण पत्र शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर आवेदन आने के कारण कई मामलों में जल्दबाजी में फैसले लिए गए।

दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा मामला

अधिकारियों के मुताबिक, मामला तब और गंभीर हो गया जब पहले जारी किए गए संदिग्ध प्रमाण पत्रों के आधार पर परिवार के अन्य सदस्यों को भी नए प्रमाण पत्र मिलने लगे। इससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। अब सरकार चाहती है कि सभी पुराने रिकॉर्ड की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल पात्र लोगों को ही जाति प्रमाण पत्र का लाभ मिले। प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की जाएगी और जरूरत पड़ने पर गलत प्रमाण पत्र रद्द भी किए जा सकते हैं।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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