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बंगाल बीजेपी में ये क्या? पार्टी के अंदर से ही उठने लगी दोबारा SIR करवाने की मांग
West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने राज्य में दोबारा SIR कराने की मांग की है। उन्होंने पिछली प्रक्रिया में हिंसा और दस्तावेज जलाने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने बीजेपी से आंकड़े जारी करने को कहा है।
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West Bengal SIR: दिल्ली में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA Alliance) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शनिवार 17 अक्टूबर को राज्य में दोबारा एसआईआर (SIR) कराने की मांग उठाई है।
समिक भट्टाचार्य का आरोप है कि पिछली एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में बड़े पैमाने पर हिंसा, डराने-धमकाने और दस्तावेज जलाने की घटनाएं हुई थीं। उनका कहना है कि इन घटनाओं के कारण सभी घुसपैठियों और अवैध वोटरों के नाम मतदाता सूची (Voter List) से नहीं हटाए जा सके।
‘हमारे बूथ प्रतिनिधियों की पिटाई हुई’
समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हिंसा के जरिए एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में बाधा डाली थी। द टेलीग्राफ के मुताबिक, उन्होंने कहा कि पिछली एसआईआर प्रक्रिया हिंसा से प्रभावित रही और बीजेपी के बूथ-स्तरीय प्रतिनिधियों (BLAs) की पिटाई की गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोटर दस्तावेजों (Voter Documents) में आग लगा दी गई। समिक भट्टाचार्य के मुताबिक, मालदा के मोथाबाड़ी में उग्र प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों तक को बंधक बना लिया था।
समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल पर भी हमला किया गया था और उनके हाथ से दस्तावेज छीनकर जला दिए गए थे। उनका कहना है कि अगर प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी होती, तो लाखों और अवैध वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते थे।
SIR में 27 लाख नाम हटे, 22 लाख से ज्यादा अपीलें
पश्चिम बंगाल में पिछली एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बाद करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हटाए गए मतदाताओं से जुड़ी 22 लाख से ज्यादा अपीलें सामने आई हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन अपीलों पर ट्रिब्यूनल के सामने सुनवाई लंबित रही। नंदीग्राम और रेजीनगर में हाल ही में हुए उपचुनावों के दौरान जिन लोगों की अर्जियां ट्रिब्यूनल में लंबित थीं, वे मतदान नहीं कर सके थे।
बीजेपी का कहना है कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का मुख्य मकसद बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के फर्जी नामों को मतदाता सूची से बाहर करना है।
ज्ञानेश कुमार का बचाव, बताया ‘हीरो’
दिल्ली में विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच समिक भट्टाचार्य ने उनका बचाव किया और उनकी जमकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि तमाम हिंसा और बाधाओं के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल को बिना किसी चुनावी हिंसा के अभूतपूर्व और निष्पक्ष चुनाव का उपहार दिया है। समिक भट्टाचार्य ने कहा कि इसी वजह से बंगाल की जनता उन्हें एक हीरो के रूप में देखती है।
समिक भट्टाचार्य ने विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन विपक्षी नेताओं का बंगाल में जनाधार खत्म हो चुका है, वे अब दिल्ली जाकर कॉकरोचों और छिपकलियों के साथ हाथ मिला रहे हैं।
BJP से आंकड़े मांगकर सुजान चक्रवर्ती का पलटवार
बीजेपी के इस बयान पर सीपीएम के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने दावा किया था कि एसआईआर के बाद बंगाल की वोटर लिस्ट से 1 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के नाम हटेंगे।
सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि अब नया एसआईआर (SIR) मांगने से पहले बीजेपी नेताओं को देश के सामने आंकड़ा रखना चाहिए कि आखिर कितने घुसपैठिए पकड़े गए। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी नेता ज्ञानेश कुमार का बचाव इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार ही नरेंद्र मोदी की राजनीतिक साख के संरक्षक हैं।
इस तरह पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ बीजेपी पिछली प्रक्रिया में हिंसा और बाधाओं का आरोप लगाकर नए सिरे से एसआईआर कराने की मांग कर रही है, वहीं विपक्ष बीजेपी से उसके दावों के आंकड़े सार्वजनिक करने को कह रहा है।


