Rajasthan News: व्हाट्सएप पर बॉस बनकर लगाई 5.30 करोड़ की चपत, 17 साइबर ठग गिरफ्तार

Rajasthan News: राजस्थान में साइबर ठगों ने कंपनी चेयरमैन की फोटो लगाकर अकाउंटेंट को झांसे में लिया, पुलिस ने कई जिलों में कार्रवाई कर गिरोह का खुलासा किया।

Newstrack Network
Published on: 2 May 2026 7:25 PM IST
cyber fraudsters arrested for becoming boss on WhatsApp worth Rs 5.30 crore
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व्हाट्सएप पर बॉस बनकर लगाई 5.30 करोड़ की चपत, 17 साइबर ठग गिरफ्तार (Photo- Social Media)

Rajasthan News: जयपुर, 2 मई। राजस्थान में साइबर अपराधियों के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर ने 17 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने व्हाट्सऐप पर कंपनी के चेयरमैन की फोटो और नाम लगाकर अकाउंटेंट को झांसे में लिया और 5 करोड़ 30 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

मामले में परिवादी दीपेन्द्र सिंह ने 24 अप्रैल 2026 को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई थी। परिवादी ने बताया कि वह गैलेक्सी माइनिंग कम्पनी में अकाउंटेंट है। उसे कंपनी मालिक के नाम और फोटो वाले दूसरे व्हाट्सऐप नंबर से संदेश मिला, जिसमें दो अलग-अलग बैंक खातों में तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए गए। भरोसा कर उसने 5.30 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए, बाद में यह साइबर ठगी निकली।

साइबर क्राइम पुलिस मुख्यालय के उप महानिरीक्षक शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरडा के सुपरविजन में विशेष टीमों ने बैंक खातों की तकनीकी जांच की। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई बैंक खातों में घुमाई गई और बाद में नकद निकासी यूएसडीटी और हवाला के जरिए रकम को ठिकाने लगाया गया।

पुलिस ने जिला पुलिस कोटा ग्रामीण, पाली, बांसवाड़ा, जोधपुर और बाड़मेर जिला पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, नकद निकासी करने वाले, कमीशन एजेंट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए राशि ट्रांसफर करने वाले लोग शामिल हैं।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

मामले में ​पुलिस ने कोटा निवासी सोहेल खान, मोहम्मद राशीद, समीर, तोहिद मोहम्मद, नवीन सिंह चौहान, बांसवाड़ा निवासी अविनाश जैन, प्रवीण रावल, अमित रावल, भव्य गिरी, मुकेश चौहान, जोधपुर निवासी घनश्याम धतरवाल, राहुल आरडीएक्स, कमलेश, पाली निवासी दिपेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र, हरीश और बाड़मेर निवासी सदराम को गिरफ्तार किया है।

चाय की थड़ी पर बंटता था ठगी का कमीशन

​गिरफ्तार आरोपियों में वकालत का छात्र, सैलून कर्मी और ऑटो पार्ट्स दुकानदार तक शामिल हैं। ये आरोपी बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक और डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने, नकद निकासी और कमीशन के बंटवारे के लिए चाय की दुकानों या थड़ियों पर मिलते थे ताकि किसी को शक न हो।

कोटा कनेक्शन

यहाँ के आरोपी ठगी की राशि को नकद निकालने और उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलने के केंद्र थे। मूलतः गुजरात निवासी तोहिद मोहम्मद कोटा ने वकालत की पढ़ाई करने के साथ-साथ इसने हेयर सैलून वालों के बैंक खाते खुलवाए और ठगी की राशि विड्रोल करवाकर ठगों तक पहुँचाई। (कमीशन: 15,000 रुपये)

सोहेल खान, मोहम्मद राशीद और समीर ये तीनों हेयर सैलून में काम करते थे। इन्होंने अपने खातों में ठगी की राशि मंगवाई और उसे 3 से 6 हजार कमीशन पर नकद निकालकर ठगों को देते।

ऑटो पार्ट्स संचालक नवीन सिंह चौहान की मुख्य भूमिका ठगी की राशि से Angelx App के जरिए यूएसडीटी खरीदना था ताकि पैसा ट्रेस न हो सके। (कमीशन: 5 लाख पर 50,000 रुपये)

बांसवाड़ा कनेक्शन

यहाँ के आरोपी ठगी के लिए नए बैंक खाते और राशि को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने का काम करते थे। अमित रावल ई-मित्र की दुकान चलाने के साथ इसने अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के बैंक खाते ठगों को 5 हजार प्रति खाता उपलब्ध कराए। अविनाश जैन और मुकेश चौहान का काम ठगी की राशि को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाना था। भव्य गिरी गोस्वामी कपड़ों की दुकान चलाने के साथ यह राशि का नकद विड्रोल कर ठगों को उपलब्ध करवाता था। प्रवीण रावल ने स्वयं का बैंक खाता कमीशन के बदले ठगों को दे रखा था।

पाली कनेक्शन

यहाँ के आरोपी मुख्य रूप से ठगों को नए बैंक खाते उपलब्ध कराने की कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। दिपेन्द्र सिंह और वीरेन्द्र ने अपने दोस्तों और परिचितों को लालच देकर उनके बैंक खाते ठगों को सौंपे थे।

राहुल उर्फ आरडीएक्स, कमलेश और हरीश ने स्वयं के नाम से बैंक खाते खुलवाकर ठगों को दिए और प्रत्येक खाते के बदले 5,000 रुपये कमीशन प्राप्त किया।

जोधपुर कनेक्शन

घनश्याम धतरवाल ने परिचितों के बैंक खाते खुलवाकर ठगी की राशि जमा करवाता था। उसके बाद नकद विड्रोल कर उस राशि से यूएसडीटी खरीदना और बेचना इसका मुख्य काम था ताकि ठगी का पैसा लाभांश के साथ सुरक्षित किया जा सके।

बाड़मेर कनेक्शन

सदराम ने स्वयं के नाम से बैंक खाता खुलवाकर ठगों को दिया और इसके बदले कमीशन प्राप्त किया। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों को देते थे और बदले में 3 हजार से 50 हजार रुपये तक कमीशन लेते थे। कुछ आरोपी ठगी की राशि निकालकर सीधे साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे, जबकि कुछ आरोपी इस रकम से यूएसडीटी खरीदकर लेन-देन को छिपाने का काम करते थे।

इस कार्रवाई में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर की टीम के साथ पाली, जोधपुर, कोटा ग्रामीण, बांसवाड़ा और बाड़मेर पुलिस की संयुक्त टीमों ने अहम भूमिका निभाई। साइबर क्राइम थाना प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक सुगन सिंह के नेतृत्व में गठित टीमों ने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर पूरे नेटवर्क को ट्रैक कर गिरफ्तारियां कीं।

साइबर क्राइम शाखा ने आमजन से अपील की है कि किसी भी व्हाट्सऐप संदेश, कॉल या वित्तीय निर्देश की पुष्टि किए बिना बड़ी राशि ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

Shashi kant gautam

Shashi kant gautam

Publisher Mail ID - skgautam1208@gmail.com

Experienced Hindi Journalist with 6 Years of Experience

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