प्रेस कॉन्फ्रेंस में आवाज आई, चेहरा नहीं...आखिर कहां हैं शेख हसीना? दिखा केवल बेटा

Where Is Sheikh Hasina: दो साल बाद शेख हसीना पहली बार एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली शामिल हुईं, लेकिन उन्होंने अपना चेहरा नहीं दिखाया। उन्होंने बांग्लादेश लौटने की बात कही, जबकि उनके बेटे साजिब वाजेद ने भी मौजूदा हालात और राजनीतिक हत्याओं को लेकर कई बड़े दावे किए।

Aditya Kumar Verma
Published on: 5 Aug 2026 8:33 PM IST
Where Is Sheikh Hasina?
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Where Is Sheikh Hasina: बांग्लादेश (Bangladesh) की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) सत्ता गंवाने के दो साल बाद पहली बार किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुईं। नई दिल्ली (New Delhi) के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (Foreign Correspondents Club of South Asia) में आयोजित इस विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह वर्चुअली जुड़ीं। इस दौरान उनके बेटे साजिब वाजेद (Sajeeb Wazed) भी मौजूद रहे। हालांकि, शेख हसीना ने अपना संदेश दिया, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अपना चेहरा नहीं दिखाया।

5 अगस्त 2024 की घटनाओं को किया याद

आज ही के दिन यानी 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और ढाका (Dhaka) छोड़कर भारत आ गई थीं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने जुलाई और अगस्त 2024 की घटनाओं को याद करते हुए भावुक अंदाज में अपनी बात रखी। कई बार उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में छात्र प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और उनकी सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहती थी।

'हिंसा फैलाने के लिए छात्र आंदोलन का इस्तेमाल'

शेख हसीना ने आरोप लगाया कि बाद में कुछ संगठित समूहों ने छात्र आंदोलन (Student Protest) का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए किया। उन्होंने दावा किया कि 15 जुलाई 2024 के बाद आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और हिंसा शुरू हो गई।

उन्होंने यह भी कहा कि मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) ने भी पहले कहा था कि यह आंदोलन पहले से योजनाबद्ध था और इसकी तैयारी पहले ही कर ली गई थी।

'19 बार मेरी हत्या की कोशिश हुई'

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने कहा कि उनका बेटा जेल में पैदा हुआ था। उन्होंने दावा किया कि अब तक उनकी 19 बार हत्या की कोशिश की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वह बांग्लादेश जरूर लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है या जेल भेजा जा सकता है, लेकिन फिर भी वह अपने लोगों के बीच वापस जाएंगी।

लगाए राजनीतिक हत्याओं के आरोप

शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद ने दावा किया कि बांग्लादेश में अब भी आवामी लीग (Awami League) के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्याएं हो रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में भी पार्टी कार्यकर्ताओं की जान जा रही है और सरकार कार्रवाई करने के बजाय दोषियों को संरक्षण दे रही है।

'कट्टरपंथियों को रिहा किया गया'

साजिब वाजेद ने कहा कि पहले अंतरिम सरकार और अब मौजूदा सरकार के दौरान भी राजनीतिक हत्याएं जारी हैं। उनके मुताबिक, ऐसे कानून और अध्यादेश बनाए गए हैं, जिनसे हत्यारों को बचाया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में मानवाधिकार (Human Rights) की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और देश एक असफल राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कट्टरपंथी संगठनों के लोगों को रिहा किया गया है और भविष्य में बांग्लादेश से आतंकवाद का खतरा बढ़ सकता है।

सुरक्षा कारणों से दिल्ली में रह रही हैं शेख हसीना

पांच अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसक तख्तापलट के बाद शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और भारत आ गई थीं।

सुरक्षा कारणों से भारत सरकार (Government of India) ने उनके सटीक ठिकाने की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह दिल्ली के एक सुरक्षित क्षेत्र में रह रही हैं।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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