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कौन हैं मुफ्ती शमाइल नदवी? जिनकी बातें सुन खुद-ब-खुद 'इस्लाम' अपना रहे लोग?
Mufti Shamail Nadvi: दिल्ली में जावेद अख्तर और मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच 'ईश्वर के अस्तित्व' पर हुई बहस ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया।
Mufti Shamail Nadvi: दिल्ली के कन्स्टिट्यूशन क्लब में हाल ही में दो घंटे तक बहस चली, जिसमें मशहूर कवि और गीतकार जावेद अख्तर और युवा इस्लामी विद्वान मुफ्ती शमाइल नदवी शामिल रहे। दोनों के बीच ‘ईश्वर के अस्तित्व’ यानी Does God Exit पर चर्चा हुई, जिसकी वीडियोज पूरे सोशल मीडिया पर छाई हुई है। इस बीच कई ऐसे दावे भी किए जा रहे हैं कि इस वीडियो को देखने के बाद और मुफ्ती नदवी का इल्म और उनकी बातें सुनने के बाद कई हिंदू लोग अपने आप इस्लाम कबूल कर रहे हैं।
कहा जा रहा है कि उनके तर्कों और कुरान के संदेशों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग इस्लाम की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ये सब सोशल मीडिया पोस्ट्स, फेसबुक वीडियोज़, और यूट्यूब वीडियोज़ में दिखाए गए हैं, जहां लोग इस डिबेट के बाद इस्लाम अपनाने की बात कर रहे हैं और मुफ्ती नदवी के विचारों की सराहना कर रहे हैं। इन सबके बीच आइये जानते हैं कि मुफ्ती नदवी कौन हैं...
मौलाना मुफ्ती शमाइल नदवी कौन हैं?
मौलाना शमाइल नादवी का पूरा नाम शमाइल अहमद अब्दुल्ला है। वे 7 जून 1998 को कोलकाता में जन्मे। उनके पिता मौलाना अबू सईद एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान हैं। धार्मिक परिवार में जन्मे शमाइल ने बचपन से ही धर्म और दर्शन में रुचि दिखाई।
कोलकाता में प्रारंभिक कुरआनी शिक्षा प्राप्त करने के बाद शमाइल ने 2014 में लखनऊ के दारुल उलूम नदवातुल उलमा में प्रवेश लिया और छह साल की पढ़ाई पूरी करके मुफ़्ती की डिग्री प्राप्त की। इस संस्था में अध्ययन करने के कारण उन्होंने अपने नाम के साथ ‘नदवी’ जोड़ लिया। इसके बाद वे मलेशिया गए और मौजूदा वक्त में पीएचडी कर रहे हैं।
वाहियान फाउंडेशन और ऑनलाइन शिक्षा
नदवी ने मार्कज़-ए-वाहियान और 2024 में वाहियान फाउंडेशन की स्थापना की, जो इस्लामी शिक्षा और सामाजिक सेवा को बढ़ावा देता है। वह यूट्यूब और सोशल मीडिया पर इस्लाम और आधुनिक समाज पर अपने विचार साझा करते हैं। मौलाना मुफ्ती शमाइल नदवी आज युवा मुस्लिम वर्ग में एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में जाने जाते हैं, जो धर्म, तर्क और आधुनिक जीवन के सवालों पर स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हैं।
जावेद अख्तर संग बहस के बाद चर्चा में
मुफ्ती नदवी और जावेद अख्तर की बहस काफी चर्चा में है। इस दौरान जावेद अख्तर ने सर्वशक्तिमान और दयालु ईश्वर की अवधारणा पर सवाल उठाया। उन्होंने गाजा में चल रही युद्ध की स्थिति का हवाला देते हुए पूछा कि कैसे एक सर्वशक्तिमान ईश्वर बच्चों की मौत और मानव पीड़ा को रोक सकता है। अख्तर ने कहा, “अगर ईश्वर हर जगह मौजूद है और सर्वशक्तिमान है, तो वह गाजा में भी मौजूद है। ऐसे दुःख को देखकर इसे स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है कि ईश्वर दयालु है।” उनके इन विचारों ने दर्शकों में गहरी बहस को जन्म दिया और धार्मिक संवेदनाओं और नैतिक चिंतन के बीच टकराव को उजागर किया।
जावेद अख्तर के सवालों के बाद मौलाना शमाइल नदवी ने स्पष्ट किया कि हिंसा और अन्याय मानव की स्वतंत्र इच्छा का परिणाम है, न कि ईश्वर की इच्छा। उन्होंने कहा, “रचनाकार बुराई की संभावना देता है, लेकिन वह स्वयं बुराई नहीं है। अन्याय का जिम्मा इंसान पर है।” नदवी का यह उत्तर युवाओं के बीच तेजी से चर्चा का विषय भी बन गया। और ऐसी ही कई अन्य दलिलें हैं, जो दोनों के बीच हुई और जमकर वायरल हो रही है।


