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Shiv Sena UBT Split Again: NDA में दबदबा और उद्धव को मात, जानें आखिर क्यों सांसदों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं शिंदे
Shiv Sena UBT Split Again: शिवसेना के मुखिया एकनाथ शिंदे लगातार कोशिश कर रहे हैं कि वह अपनी पार्टी को महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक मजबूत कर सकें। उनका पहला कदम लोकसभा सांसदों की संख्या बढ़ाने की दिशा में बढ़ा है।
Eknath Shinde
Shiv Sena UBT Split Again: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। उद्धव ठाकरे से अलग होकर असली शिवसेना की कमान संभालने वाले एकनाथ शिंदे अब ठाकरे गुट को एक और गहरा घाव देने की तैयारी में हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि शिंदे अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने के लिए उद्धव गुट (शिवसेना यूबीटी) के कई सांसदों और विधायकों को अपने पाले में खींच सकते हैं। इसके पीछे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का अपना कुनबा बढ़ाने का लक्ष्य तो है ही, साथ ही शिंदे की खुद को मुंबई से लेकर दिल्ली तक एक कद्दावर नेता के रूप में स्थापित करने की निजी महत्वाकांक्षा भी अहम भूमिका निभा रही है।
सत्ता के समीकरण और शिंदे की छटपटाहट
दरअसल, 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले तक राज्य की कमान एकनाथ शिंदे के ही हाथों में थी और चुनाव भी उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा गया था। लेकिन नतीजों में भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा भारी रहा, जिसके फलस्वरूप मुख्यमंत्री की कुर्सी देवेंद्र फडणवीस के खाते में चली गई। तमाम सियासी जोर-आजमाइश के बाद भी शिंदे न तो अपना पद बचा पाए और न ही उन्हें अपनी पसंद के विभाग मिल सके। तभी से वे अपनी ताकत को फिर से आंकने और बढ़ाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। अपने संगठन को मजबूत करने की इसी कवायद के तहत वे लगातार उद्धव खेमे के नेताओं को अपने साथ जोड़ते जा रहे हैं।
महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनने की होड़
अगर हालिया लोकसभा चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो महाराष्ट्र की कुल 48 सीटों में से कांग्रेस ने सर्वाधिक 13 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं, भाजपा और उद्धव गुट को 9-9, शरद पवार की एनसीपी को 8 और शिंदे की शिवसेना को महज 7 सीटें हासिल हुई थीं। इसके अलावा एक सीट अजित पवार गुट और एक निर्दलीय के खाते में गई थी। इस लिहाज से शिंदे की पार्टी राज्य में पांचवें पायदान पर खड़ी है। लेकिन अब जो नए समीकरण बन रहे हैं, उनके मुताबिक उद्धव गुट के करीब छह से सात सांसद शिंदे के खेमे में छलांग लगा सकते हैं। यदि छह सांसद आते हैं तो शिंदे की शिवसेना सीधे कांग्रेस के बराबर आ खड़ी होगी। वहीं, अगर सात सांसद टूटते हैं तो उनकी कुल संख्या 14 तक पहुंच जाएगी, जो एक ही झटके में उन्हें महाराष्ट्र में लोकसभा सांसदों के लिहाज से सबसे बड़ी पार्टी बना देगी।
दिल्ली के दरबार में दबदबा कायम करने की रणनीति
मौजूदा केंद्र सरकार गठबंधन के फॉर्मूले पर चल रही है, जिसमें भाजपा के 240 सांसदों के बाद टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सांसदों की भूमिका बेहद अहम है। इनको मिलाकर आंकड़ा 268 तक पहुंचता था और बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करने के लिए शिंदे के 7 सांसदों की सख्त जरूरत पड़ती थी। लेकिन हाल ही में जब तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के भाजपा के साथ आने की खबरें सामने आईं, तो इससे एनडीए के भीतर एकनाथ शिंदे का मोल अचानक कम होता नजर आने लगा। छोटी-मोटी मांगों के लिए दिल्ली के चक्कर काटने को मजबूर शिंदे अब अपना राजनीतिक वजन बढ़ाना चाहते हैं।
सांसदों की संख्या बढ़ाकर शिंदे न सिर्फ एनडीए में खुद को एक ताकतवर सहयोगी के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, बल्कि वे महाराष्ट्र की राजनीति में भी भाजपा के बढ़ते वर्चस्व को संतुलित करना चाहते हैं। भाजपा अब धीरे-धीरे उन इलाकों में भी अपना विस्तार कर रही है जो पारंपरिक तौर पर शिवसेना और एनसीपी के मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं। ऐसे में अपना कुनबा बढ़ाकर एकनाथ शिंदे दिल्ली पर दबाव बनाने और महाराष्ट्र में अपने संगठन को अजेय बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।


