Earthquake Prediction: चांद तक पहुंच गया इंसान, पर पैरों तले हिलती जमीन को भांपने में क्यों नाकाम?

Earthquake Prediction: धरती जब कांपती है तो कुछ ही सेकंड में सब कुछ बदल जाता है। ऊंची-ऊंची इमारतें मलबे में तब्दील हो जाती हैं।

Shishumanjali kharwar
Published on: 28 Jun 2026 11:53 AM IST
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Earthquake Prediction: धरती जब कांपती है तो कुछ ही सेकंड में सब कुछ बदल जाता है। ऊंची-ऊंची इमारतें मलबे में तब्दील हो जाती हैं, हजारों परिवार उजड़ जाते हैं और कई बार पूरे शहर तबाही की चपेट में आ जाते हैं। हाल ही में वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक विज्ञान इतनी तरक्की के बावजूद भूकंप की सटीक भविष्यवाणी क्यों नहीं कर पाता। आज इंसान चांद और मंगल तक पहुंच चुका है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीक विकसित हो चुकी है और मौसम का पूर्वानुमान कई दिन पहले लगाया जा सकता है। लेकिन वैज्ञानिक अब भी यह निश्चित रूप से नहीं बता सकते कि अगला बड़ा भूकंप कब, कहां और कितनी तीव्रता का आएगा।

आखिर भूकंप क्यों आता है?

भूकंप का कारण पृथ्वी के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटें हैं। पृथ्वी की ऊपरी सतह कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार बेहद धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे सरकती हैं या अलग होती हैं, तब उनके बीच वर्षों तक दबाव जमा होता रहता है। जब यह दबाव अचानक टूटता है तो बड़ी मात्रा में ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है और धरती कांपने लगती है। यही घटना भूकंप कहलाती है। पृथ्वी पर सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटें और कई छोटी प्लेटें मौजूद हैं, जिनकी गतिविधियां भूकंप का मुख्य कारण हैं।

भूकंप से पहले संकेत क्यों नहीं मिलते?

वैज्ञानिक दशकों से ऐसे संकेतों की तलाश कर रहे हैं जिनसे भूकंप का पहले से अनुमान लगाया जा सके। कई शोधों में भूजल में रेडॉन गैस की मात्रा बढ़ने, जानवरों के व्यवहार में बदलाव, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन, सूक्ष्म कंपन और जमीन में छोटी दरारों जैसे संकेतों का अध्ययन किया गया है। लेकिन समस्या यह है कि ये संकेत हर भूकंप से पहले नहीं दिखाई देते। कई बार ऐसे संकेत मिलने के बावजूद भूकंप नहीं आता, जबकि कई बड़े भूकंप बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के आ जाते हैं। इसलिए वैज्ञानिक इन्हें भरोसेमंद भविष्यवाणी का आधार नहीं मानते।

AI भी नहीं बता सकता अगला भूकंप?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग ने चिकित्सा, अंतरिक्ष और मौसम विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल की है। भूकंप विज्ञान में भी AI का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल यह केवल जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और संभावित खतरे का आकलन करने तक ही सीमित है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पृथ्वी की सतह के हजारों किलोमीटर नीचे क्या हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी वैज्ञानिकों के पास नहीं है। इसके अलावा भूकंप से जुड़ा ऐतिहासिक डेटा भी सीमित है और छोटे व बड़े भूकंप की शुरुआती गतिविधियां लगभग एक जैसी दिखाई देती हैं। ऐसे में AI भी यह तय नहीं कर पाता कि कौन-सी हलचल बड़े भूकंप का रूप ले सकती है।

भारत में किन राज्यों को सबसे ज्यादा खतरा?

भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, सिक्किम, असम और पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्य भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। इसके अलावा गुजरात का कच्छ क्षेत्र और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भी उच्च जोखिम वाले इलाकों में शामिल हैं। देश को भूकंपीय जोखिम के आधार पर चार जोन में बांटा गया है। इनमें जोन-5 सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है, जहां बड़े और विनाशकारी भूकंप आने की संभावना अधिक रहती है।

दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देश

जापान, इंडोनेशिया, चिली, तुर्किये, ईरान, नेपाल, मेक्सिको और न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल हैं। इनमें से कई देश प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित हैं, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि सबसे अधिक रहती है। यही वजह है कि इन देशों में बार-बार शक्तिशाली भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट देखने को मिलते हैं।

जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है भूकंप?

अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक बड़े भूकंपों के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है। भूकंप मुख्य रूप से टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण आते हैं। हालांकि, बड़े बांध, खनन, तेल और गैस की ड्रिलिंग जैसी कुछ मानवीय गतिविधियां स्थानीय स्तर पर छोटे भूकंपों को प्रभावित कर सकती हैं। इस विषय पर अभी भी वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।

भूकंप के दौरान क्या करें और क्या नहीं?

क्या करें?

शांत रहने की कोशिश करें।

मजबूत टेबल या मेज के नीचे शरण लें।

सिर और गर्दन को हाथों से सुरक्षित रखें।

खिड़कियों, कांच और भारी फर्नीचर से दूर रहें।

यदि बाहर हों तो खुले स्थान पर चले जाएं।

क्या न करें?

लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

घबराकर सीढ़ियों की ओर न भागें।

बिजली के खंभों, दीवारों और कांच के पास खड़े न हों।

अफवाहों पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि के जानकारी साझा न करें।

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Shishumanjali kharwar

मीडिया क्षेत्र में 12 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव। इस दौरान विभिन्न अखबारों में उप संपादक और एक न्यूज पोर्टल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्य किया। वर्तमान में प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल ‘न्यूजट्रैक’ में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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