फिर छिन जाएगी राहुल गांधी की सांसदी? 8 साल पुराने इस केस में फंसा पेंच

अमित शाह पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ आठ साल पुराना मुकदमा अंतिम दौर में है। कोर्ट में तीसरी पेशी के बाद फैसला सुरक्षित है। दोषी ठहराए जाने पर उन्हें दो साल तक की सजा हो सकती है, जिससे उनकी संसद सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है।

Shivam Shrivastava
Published on: 20 Feb 2026 9:00 PM IST
फिर छिन जाएगी राहुल गांधी की सांसदी? 8 साल पुराने इस केस में फंसा पेंच
X

केंद्रीय गृहमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विरुद्ध दायर मानहानि का मामला अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। लगभग आठ वर्षों से चल रही यह न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मामले में अदालत द्वारा दिए जाने वाले निर्णय का असर न केवल राहुल गांधी की व्यक्तिगत छवि पर पड़ेगा, बल्कि उनके संसदीय और राजनीतिक भविष्य पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

मामला कब और कैसे शुरू हुआ?

यह मामला 4 अगस्त 2018 को दायर किया गया था। परिवादी के रूप में जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन और भाजपा नेता विजय मिश्र ने अदालत में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

यह मामला प्रारंभ में एसीजेएम प्रथम की अदालत में विचाराधीन रहा, बाद में इसे एमपी-एमएलए की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान परिवादी सहित तीन गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

गवाहों की गवाही और अदालत की कार्रवाई

प्रथम गवाह के रूप में स्वयं परिवादी विजय मिश्र ने अदालत में अपना पक्ष रखा। इसके बाद पीतांबरपुर गांव के अनिल मिश्र ने दूसरे गवाह के रूप में बयान दर्ज कराया। तीसरे गवाह के तौर पर मलिकपुर निवासी रामचंद्र दुबे ने भी अदालत के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए।

इन गवाहियों के आधार पर अदालत ने मामले को विचारण योग्य माना और 27 नवंबर 2023 को तत्कालीन मजिस्ट्रेट योगेश यादव ने राहुल गांधी को तलब किया।

20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने जमानत ली। इसके बाद 25 जुलाई 2024 को वे दूसरी बार अदालत में पेश हुए, जहां उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया।

हाल ही में, शुक्रवार को उन्होंने तीसरी बार अदालत में हाजिरी लगाई। इस दौरान दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 313 के अंतर्गत उनका बयान दर्ज किया गया। इस धारा के तहत अदालत अभियुक्त से सीधे प्रश्न पूछती है ताकि आरोपों पर उसका पक्ष स्पष्ट हो सके।

कोर्ट ने पूछे आठ सवाल

मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने राहुल गांधी से कुल आठ प्रश्न पूछे। इन प्रश्नों में लगाए गए आरोपों की प्रकृति, कथित टिप्पणी की पृष्ठभूमि तथा मुकदमा चलाने के कारणों से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

राहुल गांधी ने अपने उत्तर में कहा कि उनके खिलाफ लगाया गया मुकदमा राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध टिप्पणी करने का आरोप है, उसी ने स्वयं कोई मुकदमा दायर नहीं किया है।

उनके वकील द्वारा एक लिखित बयान भी अदालत में प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह तर्क दिया गया कि मामला विधिक दृष्टि से पोषणीय नहीं है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

सजा का प्रावधान और राजनीतिक असर

इस मानहानि प्रकरण में अधिकतम दो वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यदि अदालत दोष सिद्ध करती है और दो वर्ष की सजा सुनाती है, तो राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर संकट आ सकता है।

भारतीय कानून के अनुसार, दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सदस्यता समाप्त हो सकती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में उनके पास उच्च न्यायालय में अपील दायर करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। अंतिम निर्णय अपीलीय प्रक्रिया के बाद ही प्रभावी माना जाएगा।

दोनों पक्षों की दलीलें

परिवादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय का कहना है कि पत्रावली में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिनके आधार पर अदालत दोष सिद्ध कर सकती है। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल का दावा है कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। उनका कहना है कि अदालत में ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनसे राहुल गांधी को बेगुनाह साबित किया जा सके।

कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा

राहुल गांधी की हालिया पेशी के दौरान अदालत परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुबह से ही पुलिस बल तैनात रहा और प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की गई। केवल वकीलों और अधिकृत व्यक्तियों को ही भीतर जाने की अनुमति दी गई।

सीआरपीएफ के जवानों के साथ कई थानों की पुलिस बल मौजूद रही। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की। अदालत कक्ष में आम वादकारियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।

राहुल गांधी सुबह लगभग 10:40 बजे अदालत पहुंचे और लगभग 40 मिनट तक वहां रहे। उन्होंने अदालत में प्रवेश करते समय मजिस्ट्रेट को प्रणाम किया और कार्यवाही पूर्ण होने पर धन्यवाद कहकर बाहर निकले।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रही भारी मौजूदगी

अदालत परिसर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा। मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक समर्थक उनके समर्थन में मौजूद रहे। स्वागत के लिए पोस्टर लगाए गए थे।

हालांकि, राहुल गांधी कार्यवाही के बाद सीधे अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए और किसी से औपचारिक मुलाकात नहीं की।

पेशी के बाद शोक संवेदना जताने पहुंचे नेता विपक्ष

कोर्ट से निकलने के बाद उनका काफिला गुप्तारगंज स्थित स्वर्गीय रामचेत मोची की दुकान पर रुका। राहुल गांधी ने उनके परिवार से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने रामचेत की पोती श्रद्धा को गोद में लेकर स्नेह जताया और उसके स्वास्थ्य संबंधी समस्या को देखते हुए उपचार की व्यवस्था कराने के निर्देश भी दिए। परिवार को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया गया।

अब फैसले पर टिकी निगाहें

करीब आठ साल से चल रहा यह मामला अब निर्णायक मोड़ पर है। अदालत का फैसला न केवल एक कानूनी निर्णय होगा, बल्कि उसके राजनीतिक मायने भी दूरगामी हो सकते हैं।

एक ओर इसे राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा मामला बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक जवाबदेही के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

अब सबकी निगाहें अदालत के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह प्रकरण राहुल गांधी के राजनीतिक करियर के लिए कितना निर्णायक साबित होता है।

Shivam Shrivastava

Shivam Shrivastava

Senior Content Writer Mail ID - shivam09231@gmail.com

Shivam Shrivastava is Senior Content Writer

Next Story