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NDA के हो जाएंगे शरद पवार? अटकलों पर सुप्रिया सुले के बयान ने चौंकाया, सस्पेंस बरकरार
Sharad Pawar NDA Row: क्या शरद पवार का गुट एनडीए में शामिल होने जा रहा है? सुप्रिया सुले ने जयंत पाटिल-विनोद तावड़े की कथित मुलाकात और भाजपा गठबंधन की अटकलों पर प्रतिक्रिया दी। वित्त मंत्रालय पर फंसा पेच।
Sharad Pawar NDA Row: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों हर पल एक नया और चौंकाने वाला मोड़ देखने को मिल रहा है। कयासों का बाजार उस समय और गर्म हो गया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले को दिल्ली से लेकर मुंबई तक चल रही एक बड़ी चर्चा पर सफाई देने सामने आना पड़ा। सुप्रिया सुले ने उन तमाम खबरों और राजनीतिक अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उनकी पार्टी के कद्दावर नेता जयंत पाटिल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े के बीच कोई गुप्त समझौता होने जा रहा है। इन चर्चाओं के मुताबिक, शरद पवार की पार्टी केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर भाजपा गठबंधन को अपना खुला समर्थन दे सकती है।
अटकलों पर खुलकर हंसी सुप्रिया
इस पूरे मामले पर पत्रकारों से रूबरू होते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्हें जयंत पाटिल और विनोद तावड़े के बीच हुई ऐसी किसी भी सीक्रेट मुलाकात की कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे भी इस पूरे घटनाक्रम के बारे में केवल मीडिया के माध्यम से ही पता चला है। जब सुप्रिया से पूछा गया कि क्या शरद पवार की पार्टी वाकई एनडीए में शामिल होने की कोई बड़ी योजना बना रही है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं पिछले 12 सालों से लगातार ऐसी ही हवा-हवाई चर्चाएं सुनती आ रही हूं। उन्होंने आगे बताया कि विनोद तावड़े और वे खुद कई बार मिलते हैं, क्योंकि वे दोनों संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य हैं। सुप्रिया ने खुलासा किया कि पिछले 1 महीने में ही दोनों के बीच कम से कम 21 बार मुलाकात हुई होगी, इसलिए इन बातों को सुनकर उन्हें सिर्फ हंसी आ रही है।
कांग्रेस ने साधा तीखा निशाना
इस सियासी हलचल के बीच एनसीपी के युवा विधायक रोहित पवार ने भी इन खबरों को कोरी बकवास करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल होने के नाते वे किसानों, छात्रों और मजदूरों के मुद्दों को उठाते रहेंगे। दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने इस मामले में घी डालने का काम किया है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि यह बात तो बिल्कुल पक्की है कि पर्दे के पीछे ऐसी कोई बड़ी बातचीत जरूर चल रही है। अब शरद पवार के गुट को खुद तय करना है कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज, बाबासाहब आंबेडकर और महात्मा ज्योतिराव फुले के प्रगतिशील विचारों के साथ चलना चाहते हैं या फिर सिर्फ पैसे और राजनीतिक सत्ता के दम पर काम करना चाहते हैं।
कैबिनेट मंत्री पद का बड़ा ऑफर
हालांकि, अंदरूनी सूत्रों की मानें तो जयंत पाटिल और विनोद तावड़े के बीच शुक्रवार को हुई इस बेहद खास बैठक में कई बड़े राजनीतिक फायदों पर विस्तार से चर्चा हुई है। सूत्रों का दावा है कि शरद पवार के सामने एनडीए का हिस्सा बनने या फिर उसे बाहर से समर्थन देने का एक बड़ा विकल्प खुला हुआ है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि पवार को अपने पाले में लाने की यह कोशिश महाराष्ट्र के स्तर पर नहीं, बल्कि सीधे दिल्ली में केंद्रीय स्तर पर की जा रही है। कयास हैं कि अगर शरद पवार एनडीए में आते हैं, तो उनकी पार्टी को केंद्र सरकार में 1 कैबिनेट मंत्री का पद और महाराष्ट्र सरकार में 3 कैबिनेट मंत्री के पद सौंपे जा सकते हैं।
वित्त मंत्रालय का असली सस्पेंस
इस पूरे समझौते में सबसे बड़ा सस्पेंस महाराष्ट्र के वित्त मंत्रालय को लेकर बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य का बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला वित्त विभाग, जो इस समय खुद देवेंद्र फडणवीस के पास है, उसे शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। यही वजह है कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार द्वारा बार-बार दावा ठोकने के बावजूद यह भारी-भरकम विभाग अब तक किसी भी अन्य नेता को नहीं सौंपा गया है। राजनीति के पंडित मान रहे हैं कि 2026 के इस दौर में अगर यह डील पक्की हो जाती है, तो महाराष्ट्र का पूरा सियासी समीकरण हमेशा के लिए बदल जाएगा।


