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बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें फिर बढ़ी! बरी होने के खिलाफ महिला पहलवानों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
महिला पहलवानों ने पूर्व BJP सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ दिल्ली की सेशंस कोर्ट का रुख किया है।
Brij Bhushan Sharan Singh: पूर्व BJP सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी किए जाने के खिलाफ छह महिला पहलवानों ने दिल्ली की सेशंस कोर्ट का रुख किया है।
पहलवानों ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है और आरोप लगाया है कि फैसले में पीड़ितों से जुड़े एक 'आदर्श व्यवहार' की सोच को आधार बनाया गया। महिला पहलवानों की यह याचिका शनिवार सुबह 10 बजे राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह के सामने लिस्टेड है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले पर क्या आपत्ति?
पहलवानों की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट ने पूरे फैसले में 'आदर्श पीड़ित' को लागू किया।
याचिका के मुताबिक, कोर्ट ने इस आधार पर शिकायतकर्ताओं के बयानों पर सवाल उठाए कि यौन उत्पीड़न का शिकार होने वाली महिला को किस तरह व्यवहार करना चाहिए।
पहलवानों का दावा है कि कोर्ट ने पीड़ितों के व्यवहार को लेकर बनी कुछ रूढ़िवादी धारणाओं को फैसले का आधार बनाया, जबकि मामले में उपलब्ध सबूतों का निष्पक्ष तरीके से आकलन किया जाना चाहिए था।
'विरोध नहीं किया तो आरोप झूठे कैसे?'
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कई जगह पीड़िताओं की ओर से तुरंत विरोध या जवाबी कार्रवाई नहीं किए जाने को आरोपों के झूठे होने का आधार माना।
पहलवानों का कहना है कि सिर्फ इस आधार पर यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता कि शिकायतकर्ता ने कथित घटना के समय या उसके तुरंत बाद विरोध नहीं किया था।
'तारीख याद न होने को बनाया गया आधार'
महिला पहलवानों ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने शिकायतकर्ताओं को सिर्फ इसलिए अविश्वसनीय माना क्योंकि वे कथित घटनाओं की तारीखों को बिल्कुल सटीक तरीके से याद नहीं कर सकीं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ताओं ने कथित घटनाओं के तुरंत बाद विरोध नहीं किया और आरोपी के साथ पेशेवर संबंध बनाए रखे। पहलवानों के मुताबिक, इसका कारण यह था कि बृजभूषण का उनके करियर पर पूरा नियंत्रण था।
3 अगस्त को बरी हुए थे बृजभूषण
बृजभूषण शरण सिंह को 3 अगस्त को इस मामले में बरी किया गया था। छह महिला पहलवानों ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मामले की सुनवाई और ट्रायल चार्जशीट दाखिल होने के तीन साल बाद पूरा हुआ था।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने अपने फैसले में आरोपों को 'झूठा और मनगढ़ंत' बताया था। अदालत ने यह भी कहा था कि आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ शिकायतकर्ताओं के बयानों का हवाला देते हुए कहा था कि उनके बयानों से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर होता है और आरोपों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कोर्ट ने देरी और गलत जानकारी को माना था अहम
3 अगस्त के फैसले में ट्रायल कोर्ट ने यह भी दर्ज किया था कि शिकायतकर्ताओं ने शुरुआत में आरोपी के खिलाफ आरोप लगाने में हिचकिचाहट दिखाई थी। कोर्ट के मुताबिक, पीड़िताओं ने कहा था कि उन्हें डर था कि शिकायत करने से उनका करियर प्रभावित हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब उन्होंने बाद में आरोप लगाए तो कथित घटनाओं के देश और साल को लेकर गलत जानकारी दी गई।


