Aurangzeb Treasure Mystery: 1695 में लूटा गया था औरंगजेब का जहाज, अब अमेरिका में मिले सिक्के ने फिर जगाया खजाने का रहस्य

Aurangzeb Treasure Mystery: औरंगजेब के शाही जहाज गंज-ए-सवाई की 1695 में हुई लूट का रहस्य फिर चर्चा में है। अमेरिका में मिले 1693 के दुर्लभ सिक्के ने कहानी को नई कड़ी दी है।

Shweta Srivastava
Published on: 6 Aug 2026 8:27 PM IST (Updated on: 6 Aug 2026 8:27 PM IST)
Aurangzeb Treasure Mystery
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Aurangzeb Treasure Mystery (Image Credit-Social Media)

Aurangzeb Treasure Mystery: इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनका जिक्र सदियों बाद भी रहस्य और रोमांच के साथ किया जाता है। मुगल बादशाह औरंगजेब के शाही जहाज ‘गंज-ए-सवाई’ की लूट भी ऐसी ही एक घटना है। करीब तीन शताब्दी पहले समुद्री डाकुओं द्वारा लूटे गए इस जहाज और उसके गायब खजाने का रहस्य आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। अब अमेरिका में मिला एक पुराना चांदी का सिक्का इस ऐतिहासिक कहानी की एक नई कड़ी के तौर पर सामने आया है।

यह सिक्का करीब 300 साल पुरानी उस समुद्री लूट की ओर इशारा करता है, जिसके बाद कुख्यात समुद्री डाकू कैप्टन हेनरी एवरी और उसके साथी भारी संपत्ति लेकर गायब हो गए थे। लंबे समय तक इतिहासकारों के लिए यह सवाल बना रहा कि लूट के बाद एवरी कहां गया और उसके हाथ लगा खजाना आखिर कहां पहुंचा।

जब मुगल शाही जहाज पर पड़ा समुद्री डाकुओं का हमला

यह घटना वर्ष 1695 की बताई जाती है। उस समय कैप्टन हेनरी एवरी और उसके साथियों ने मुगल साम्राज्य के एक बेहद महत्वपूर्ण जहाज गंज-ए-सवाई को निशाना बनाया था।



यह जहाज मक्का से भारत लौट रहा था। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम तीर्थयात्री सवार थे और उनके साथ बहुमूल्य सामान, सोना, चांदी तथा अन्य कीमती वस्तुएं भी मौजूद थीं। समुद्र में जहाज को रोककर एवरी और उसके साथियों ने उस पर कब्जा कर लिया और भारी मात्रा में संपत्ति अपने कब्जे में ले ली।

इतिहास में इस घटना को उस दौर की सबसे बड़ी समुद्री लूट की घटनाओं में गिना जाता है। लूटे गए माल का मूल्य आज के हिसाब से करोड़ों डॉलर के बराबर बताया जाता है।

लूट के बाद एवरी बना सबसे बड़ा रहस्य

जहाज पर कब्जे के दौरान यात्रियों और चालक दल के साथ हिंसा किए जाने की बात भी ऐतिहासिक विवरणों में मिलती है। घटना की खबर मुगल दरबार तक पहुंची तो इसे बेहद गंभीरता से लिया गया। इस लूट ने तत्कालीन भारत और अंग्रेजों के बीच संबंधों को भी प्रभावित किया।

मुगल बादशाह औरंगजेब की ओर से कार्रवाई का दबाव बढ़ा तो ईस्ट इंडिया कंपनी भी सक्रिय हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंग्लैंड के राजा विलियम तृतीय ने एवरी और उसके साथियों को पकड़ने के लिए अभियान चलाने का आदेश दिया।

लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद एवरी हाथ नहीं आया। इसके बाद उसका कोई निश्चित पता इतिहास में नहीं मिलता। उसके साथ लूटा गया खजाना भी रहस्य बन गया। यही वजह है कि सदियों से एवरी का नाम एक ऐसे समुद्री डाकू के रूप में लिया जाता रहा है, जो बड़ी लूट के बाद अचानक गायब हो गया।

अमेरिका की जमीन से निकला 300 साल पुराना सिक्का

इस रहस्य को नई दिशा करीब तीन शताब्दी बाद मिली। वर्ष 2014 में अमेरिका के रोड आइलैंड के मिडलटाउन में रहने वाले जिम बेली नाम के एक शौकिया इतिहासकार को जमीन के भीतर एक पुराना चांदी का सिक्का मिला।



पहली नजर में यह सिक्का किसी सामान्य पुराने सिक्के जैसा ही लगा। लेकिन जब उसकी बारीकी से जांच की गई तो उस पर लिखी अरबी लिपि ने इसकी कहानी को दिलचस्प बना दिया।

सिक्के की पहचान और उसके निर्माण से जुड़े विवरणों की जांच के बाद पता चला कि इसे यमन में वर्ष 1693 में ढाला गया था। यानी यह सिक्का गंज-ए-सवाई की लूट से करीब दो साल पहले का है।

यमन का सिक्का अमेरिका कैसे पहुंचा?

यही सवाल इस खोज को और महत्वपूर्ण बना देता है। 1693 में यमन में बना सिक्का हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका की धरती में कैसे पहुंचा? क्या यह उस समय समुद्री व्यापार के जरिए यहां पहुंचा था? या फिर इसका संबंध उन समुद्री यात्राओं और लूट की घटनाओं से था, जिनमें कैप्टन एवरी और उसके साथी शामिल थे?

इतिहासकारों के लिए यह सिक्का इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उस दौर में समुद्री व्यापार, तीर्थयात्रा और समुद्री लूट के रास्ते एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। अरब क्षेत्र से आने वाली वस्तुएं और मुद्राएं समुद्री मार्गों के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती थीं।

हालांकि, सिर्फ एक सिक्के के आधार पर यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि उसका सीधा संबंध एवरी की लूट से था। लेकिन इसकी तारीख और स्थान ने इतिहास के उस दौर से जुड़े सवालों को जरूर फिर चर्चा में ला दिया है।

क्या अमेरिका में छिपा है एवरी के खजाने का कोई सुराग?

कैप्टन हेनरी एवरी के लूटे गए खजाने की वास्तविक मंजिल आज भी इतिहास का अनसुलझा सवाल है। यह स्पष्ट नहीं है कि लूट के बाद खजाने का कितना हिस्सा उसके साथियों के बीच बंटा, कितना सामान बेचा गया और कितना कहीं छिपाया गया।



अमेरिका में मिले पुराने सिक्के ने इस रहस्य को फिर से जीवित कर दिया है। यह खोज इस संभावना पर चर्चा को बढ़ाती है कि समुद्री डाकुओं के जरिए उस दौर में एशिया और अरब क्षेत्र की संपत्ति अमेरिका तक पहुंची हो सकती है।

फिलहाल यह सिक्का औरंगजेब के खजाने का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं, बल्कि उस दौर के समुद्री संपर्कों और संभावित रास्तों को समझने वाला एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सुराग माना जा सकता है।

करीब 300 साल बाद भी गंज-ए-सवाई, कैप्टन हेनरी एवरी और उसके गायब खजाने की कहानी इतिहास के सबसे दिलचस्प समुद्री रहस्यों में शामिल है। अमेरिका से मिला यह छोटा-सा चांदी का सिक्का उस रहस्य की परतें खोलने में कितना मददगार साबित होगा, यह आने वाले शोध और ऐतिहासिक साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगा।

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मैं श्वेता श्रीवास्तव 15 साल का मीडिया इंडस्ट्री में अनुभव रखतीं हूँ। मैंने अपने करियर की शुरुआत एक रिपोर्टर के तौर पर की थी। पिछले 9 सालों से डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्यरत हूँ। इस दौरान मैंने मनोरंजन, टूरिज्म और लाइफस्टाइल डेस्क के लिए काम किया है। इसके पहले मैंने aajkikhabar.com और thenewbond.com के लिए भी काम किया है। साथ ही दूरदर्शन लखनऊ में बतौर एंकर भी काम किया है। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एंड फिल्म प्रोडक्शन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। न्यूज़ट्रैक में मैं लाइफस्टाइल और टूरिज्म सेक्शेन देख रहीं हूँ।

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