Barf Pani Mein Kyu Tairti Hai: बर्फ पानी से हल्की कैसे हो जाती है? जानिए अणुओं की बनावट का रहस्य?

Barf Pani Mein Kyu Tairti Hai: बर्फ पानी में डूबने के बजाय तैरती क्यों है? जानिए पानी के अणुओं, हाइड्रोजन बॉन्ड, घनत्व और जमने पर पानी का आयतन बढ़ने के पीछे का विज्ञान।

Neel Mani Lal
Published on: 23 Oct 2026 4:29 PM IST
Barf Pani Mein Kyu Tairti Hai | ICE Float on Water Science Explained in Hindi | Newstrack Hindi
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Barf Pani Mein Kyu Tairti Hai | ICE Float on Water Science Explained in Hindi | Newstrack Hindi 

Barf Pani Mein Kyu Tairti Hai: आपने एक गिलास पानी में बर्फ के कुछ टुकड़े डाल दिए। वे नीचे जाने के बजाय पानी की सतह पर तैरने लगते हैं। यह दृश्य हमें इतना सामान्य लगता है कि शायद ही कभी हम सोचते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है। लेकिन विज्ञान की नजर से देखें, तो यह एक बेहद दिलचस्प घटना है। ज्यादातर पदार्थ जब ठंडे होकर ठोस बनते हैं, तो उनके कण एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं और उनका घनत्व बढ़ जाता है। यानी उनका ठोस रूप अक्सर उसी पदार्थ के तरल रूप से ज्यादा सघन होता है।

लेकिन पानी इस नियम का एक असाधारण अपवाद है। पानी जमकर बर्फ बनता है, तो उसके अणु एक ऐसी संरचना में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिसमें उनके बीच पहले से ज्यादा खाली जगह होती है। नतीजा यह होता है कि समान मात्रा में बर्फ का द्रव्यमान तरल पानी से कम होता है। इसलिए बर्फ का घनत्व पानी से कम हो जाता है और वह पानी पर तैरने लगती है। इसका संबंध पानी के अणुओं की बनावट, उनके बीच बनने वाले खास आकर्षण और एक ऐसी आणविक व्यवस्था से है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

घनत्व क्या होता है?

बर्फ पानी पर क्यों तैरती है, यह समझने से पहले एक छोटी-सी वैज्ञानिक अवधारणा समझना जरूरी है: घनत्व (Density)।

आसान शब्दों में, किसी पदार्थ के एक निश्चित आयतन में कितना द्रव्यमान मौजूद है, उसे उसका घनत्व कहते हैं। मान लीजिए, आपके पास एक लीटर पानी और एक लीटर बर्फ है। अगर दोनों का आयतन समान हो, तो पानी का द्रव्यमान बर्फ से ज्यादा होगा। यानी पानी की समान जगह में ज्यादा पदार्थ मौजूद है।

इसीलिए पानी का घनत्व बर्फ से अधिक होता है। आमतौर पर कोई वस्तु किसी तरल में तब तैरती है, जब उसका औसत घनत्व उस तरल के घनत्व से कम होता है। लकड़ी पानी पर तैरती है, जबकि लोहे का ठोस टुकड़ा आमतौर पर डूब जाता है, क्योंकि लोहे का घनत्व पानी से काफी ज्यादा होता है। बर्फ के मामले में भी यही सिद्धांत काम करता है, लेकिन यहां असली सवाल यह है कि पानी के जमने पर उसका घनत्व कम क्यों हो जाता है?इसका जवाब पानी के अणुओं के भीतर छिपा है।

पानी के अणुओं की बनावट में छिपा है राज

पानी का एक अणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं और एक ऑक्सीजन परमाणु से मिलकर बनता है। इसीलिए पानी का रासायनिक सूत्र H₂O है। लेकिन इस अणु की बनावट की एक खास बात है: इसके भीतर विद्युत आवेश समान रूप से वितरित नहीं होता। ऑक्सीजन की ओर थोड़ा ऋणात्मक और हाइड्रोजन की ओर थोड़ा धनात्मक प्रभाव होता है। इस कारण पानी के एक अणु का हाइड्रोजन हिस्सा दूसरे अणु के ऑक्सीजन हिस्से की ओर आकर्षित हो सकता है। इस आकर्षण से बनने वाले संबंध को हाइड्रोजन बॉन्ड (Hydrogen Bond) कहते हैं।

यहां एक बात समझना जरूरी है। हाइड्रोजन बॉन्ड पानी के अणु के भीतर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को जोड़ने वाले रासायनिक बंधन से अलग होता है। यह मुख्य रूप से अलग-अलग पानी के अणुओं के बीच काम करने वाला आकर्षण है। तरल पानी में ये अणु लगातार गति करते रहते हैं। हाइड्रोजन बॉन्ड बनते और टूटते रहते हैं, इसलिए अणुओं की व्यवस्था लगातार बदलती रहती है।

यही गतिशील व्यवस्था पानी को एक असामान्य पदार्थ बनाती है।

पानी जमता है, तो अणुओं के बीच ज्यादा जगह क्यों बनती है?

अब कल्पना कीजिए कि पानी का तापमान लगातार कम किया जा रहा है। तापमान घटने पर पानी के अणुओं की औसत गति धीमी होने लगती है। जब पानी लगभग 0°C पर जमने लगता है, तो हाइड्रोजन बॉन्ड अणुओं को एक अधिक व्यवस्थित क्रिस्टलीय संरचना में बांधने लगते हैं।

साधारण बर्फ में पानी के अणु मुख्य रूप से एक खुली, षट्कोणीय क्रिस्टलीय संरचना (Hexagonal Crystal Structure) बनाते हैं।

इस संरचना में प्रत्येक पानी का अणु अपने आसपास के दूसरे अणुओं के साथ एक निश्चित ज्यामितीय व्यवस्था में जुड़ता है। इसके कारण अणुओं के बीच अपेक्षाकृत ज्यादा खाली जगह रह जाती है।

यही सबसे महत्वपूर्ण बात है। तरल पानी में अणु अलग-अलग दिशाओं में गति करते हैं और उनकी व्यवस्था लगातार बदलती रहती है। इस दौरान कुछ अणु एक-दूसरे के ज्यादा करीब आ सकते हैं। लेकिन बर्फ की व्यवस्थित संरचना में अणु एक ऐसी जगह पर स्थिर हो जाते हैं, जहां उनके बीच औसतन ज्यादा खाली स्थान होता है। इसलिए जब पानी जमकर बर्फ बनता है, तो उसका आयतन बढ़ जाता है। पानी जमने पर उसके अणु अचानक बड़े नहीं हो जाते। वे बस एक ऐसी संरचना में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिसमें समान द्रव्यमान को ज्यादा जगह चाहिए।

बर्फ पानी से लगभग 9 प्रतिशत ज्यादा जगह घेरती है

मान लीजिए, आपके पास एक निश्चित मात्रा में पानी है। जब इसे सामान्य वायुमंडलीय दबाव पर जमाया जाता है, तो बनने वाली बर्फ का आयतन तरल पानी की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत बढ़ सकता है। दूसरे शब्दों में, पानी जमने पर उसका आयतन बढ़ता है, लेकिन उसका द्रव्यमान लगभग वही रहता है। इसलिए समान द्रव्यमान अब ज्यादा जगह घेरता है और घनत्व कम हो जाता है।

लगभग 0°C पर बर्फ का घनत्व करीब 0.917 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है, जबकि 0°C के आसपास तरल पानी का घनत्व करीब 1 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है।

यानी बर्फ का घनत्व पानी से लगभग 8 से 9 प्रतिशत कम होता है।

इसी वजह से बर्फ पानी में डूबने के बजाय तैरती है। यहां एक दिलचस्प प्रयोग भी कर सकते हैं। पानी से भरी ऐसी बोतल को फ्रीजर में रखना, जो जमने पर फैलने के लिए पर्याप्त जगह न दे, खतरनाक हो सकता है। पानी जमने पर फैलता है और बंद बोतल में दबाव बढ़ने से वह टूट सकती है। इसलिए पानी को जमाने के लिए बंद, पूरी तरह भरी हुई कांच की बोतल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अगर बर्फ पानी से भारी होती, तो क्या होता?

अब एक पल के लिए कल्पना कीजिए कि पानी के साथ भी ज्यादातर पदार्थों जैसा व्यवहार होता। यानी जमने पर उसका घनत्व बढ़ जाता और बर्फ पानी से भारी हो जाती।

ऐसी स्थिति में सर्दियों के दौरान बनने वाली बर्फ पानी की सतह पर तैरने के बजाय नीचे बैठ जाती।

इसके बाद सतह पर मौजूद पानी फिर से जमता और वह बर्फ भी नीचे चली जाती। अनुकूल परिस्थितियों में यह प्रक्रिया आगे बढ़ सकती थी, जिससे झीलों और तालाबों के गहरे हिस्सों में भी बर्फ जमा होने लगती।

इसका जलीय जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता था।

वास्तविक दुनिया में बर्फ सतह पर तैरती है और उसके नीचे पानी तरल रह सकता है। सतह पर बनी बर्फ एक तरह की इन्सुलेटिंग परत का काम करती है, जो नीचे के पानी से वातावरण में गर्मी जाने की गति कम करती है।

इसी कारण ठंडे क्षेत्रों की कई झीलें सर्दियों में ऊपर से जम जाती हैं, जबकि नीचे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के रहने के लिए तरल पानी बचा रह सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि बर्फ के नीचे का पानी हमेशा सुरक्षित तापमान पर रहेगा। झील की गहराई, मौसम, पानी की गति और बर्फ की मोटाई जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं। फिर भी, बर्फ का तैरना जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या पानी का घनत्व हमेशा ठंडा होने पर बढ़ता है?

पानी का व्यवहार और भी दिलचस्प है, क्योंकि इसका घनत्व तापमान के साथ सामान्य तरीके से नहीं बदलता। ज्यादातर तरल पदार्थों में तापमान घटने पर अणुओं की गति धीमी होती है और पदार्थ सिकुड़ता है। इससे उसका घनत्व बढ़ जाता है। पानी भी सामान्य तौर पर ठंडा होने पर सिकुड़ता है, लेकिन लगभग 4°C पर इसका घनत्व सबसे ज्यादा होता है। इसके बाद यदि पानी को और ठंडा किया जाए, तो उसका घनत्व घटने लगता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हाइड्रोजन बॉन्ड की वजह से पानी में बर्फ जैसी खुली संरचनाओं का प्रभाव बढ़ने लगता है।

जब पानी जमकर बर्फ बनता है, तो यह प्रभाव और स्पष्ट हो जाता है। इसी विशेषता के कारण सर्दियों में झीलों का पानी अक्सर परतों में व्यवस्थित हो सकता है। लगभग 4°C वाला ज्यादा घना पानी नीचे की ओर जा सकता है, जबकि उससे ठंडा पानी सतह के करीब रह सकता है। जब सतह का पानी जम जाता है, तो बर्फ ऊपर बनी रहती है।

क्या पानी ही ऐसा पदार्थ है जो जमने पर फैलता है?

पानी अकेला ऐसा पदार्थ नहीं है, जो जमने पर फैलता हो या जिसका ठोस रूप तरल रूप से कम घना हो। कुछ दूसरे पदार्थों में भी ऐसी विशेषताएं देखने को मिलती हैं। उदाहरण के लिए, बिस्मथ और सिलिकॉन कुछ परिस्थितियों में जमते समय फैल सकते हैं। लेकिन पानी का यह गुण खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि पृथ्वी पर पानी अत्यंत व्यापक मात्रा में मौजूद है और जीवन के लिए अनिवार्य है। पानी के जमने पर फैलने का प्रभाव केवल बर्फ के तैरने तक सीमित नहीं है। चट्टानों की दरारों में घुसा पानी जमकर फैल सकता है, जिससे समय के साथ चट्टानें टूट सकती हैं। इसे फ्रॉस्ट वेदरिंग यानी पाले के कारण चट्टानों का अपक्षय कहा जाता है। इसी तरह, पानी का असामान्य घनत्व व्यवहार झीलों, तालाबों और दूसरे जलीय वातावरण में तापमान तथा पानी की परतों के वितरण को प्रभावित करता है। इसलिए बर्फ का तैरना केवल एक साधारण भौतिक घटना नहीं है। इसके कई पर्यावरणीय और भूवैज्ञानिक परिणाम भी हैं।

कभी अगली बार गिलास में तैरती बर्फ देखें, तो याद रखिएगा: उस छोटे-से टुकड़े के पीछे पानी के अणुओं की बनावट और हाइड्रोजन बॉन्ड की एक बेहद दिलचस्प कहानी छिपी है।

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