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Prostitution Laws: भारत में वेश्यावृत्ति अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट के आदेश से समझिए पूरा कानून
Prostitution Laws Explained: नीदरलैंड, जर्मनी, स्वीडन, अमेरिका और भारत में वेश्यावृत्ति को लेकर क्या कानून हैं? जानिए कहाँ सेक्स वर्क कानूनी है, कहाँ ग्राहक अपराधी है और भारत में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है।
Prostitution Laws Around the World | Countries Where Prostitution is Legal | Newstrack Hindi
Prostitution Laws Explained: दुनिया में कुछ देश ऐसे हैं जहाँ वयस्कों के बीच सहमति से होने वाला सेक्स वर्क कानूनी है। कहीं इसके लिए सरकारी लाइसेंस जरूरी है, कहीं सेक्स वर्कर्स को रोजगार के अधिकार मिले हैं और कहीं इसे अपराध की श्रेणी से ही बाहर कर दिया गया है। दूसरी ओर, स्वीडन और फ्रांस जैसे देशों ने ऐसा रास्ता चुना है जहाँ यौन सेवा बेचने वाले व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जाता, लेकिन उसे खरीदने वाले ग्राहक को सजा हो सकती है।
आखिर देशों के कानून इतने अलग क्यों हैं? क्या वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता देने से शोषण कम होता है या बढ़ता है? और भारत में कानून वास्तव में किसकी अनुमति देता है और किस पर रोक लगाता है?
'कानूनी वेश्यावृत्ति' का मतलब क्या है
वेश्यावृत्ति या प्रॉस्टिट्यूशन (prostitution) का अर्थ पैसे या किसी अन्य भुगतान के बदले यौन सेवाएँ देना है।आजकल इसके लिए 'सेक्स वर्क' शब्द का भी इस्तेमाल होता है।
इस विषय में सबसे अहम अंतर स्वेच्छा और जबरदस्ती का है। कोई वयस्क अपनी इच्छा से यह काम कर रहा है या उसे हिंसा, धोखे, धमकी अथवा मानव तस्करी के जरिए इसमें धकेला गया है - दोनों स्थितियाँ कानूनी रूप से अलग हैं।
दुनिया के कानूनों को समझने में सबसे बड़ी गलती यह मानना है कि जहाँ सेक्स बेचना कानूनी है, वहाँ इससे जुड़ा पूरा कारोबार भी कानूनी होगा। वास्तव में किसी देश में वयस्क व्यक्ति का स्वेच्छा से यौन सेवा देना अपराध नहीं हो सकता, लेकिन वेश्यालय चलाना प्रतिबंधित हो सकता है। कहीं वेश्यालय के लिए लाइसेंस जरूरी है, तो कहीं ग्राहक को सजा मिलती है, जबकि सेवा देने वाला व्यक्ति अपराधी नहीं माना जाता।
इसी आधार पर दुनिया में चार प्रमुख व्यवस्थाएँ दिखाई देती हैं : व्यापक अपराधीकरण, आंशिक अपराधीकरण, सरकारी नियमन और अपराधमुक्तिकरण। इनके अलावा ग्राहक को दंडित करने वाला मॉडल भी है, जिसे नॉर्डिक मॉडल कहा जाता है।
नीदरलैंड और जर्मनी: कानूनी कारोबार, लेकिन सरकारी निगरानी
नीदरलैंड इस विषय में दुनिया के सबसे चर्चित देशों में है। एम्स्टर्डम के रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट की तस्वीरें देखकर कई लोग मानते हैं कि वहाँ वेश्यावृत्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। जबकि वास्तविकता यह है कि वयस्कों के बीच सहमति से होने वाला सेक्स वर्क कानूनी जरूर है, लेकिन उसके संचालन पर सरकारी और स्थानीय नियम लागू होते हैं। यहां वेश्यालय और दूसरे प्रतिष्ठानों को स्थानीय नियमों के अनुसार लाइसेंस लेना पड़ सकता है। नगर प्रशासन कुछ क्षेत्रों में ऐसे कारोबार की अनुमति देता है और कुछ जगहों पर रोक लगा सकता है। जबरन वेश्यावृत्ति और नाबालिगों का यौन शोषण गंभीर अपराध हैं।
जर्मनी में भी स्वैच्छिक वयस्क सेक्स वर्क कानूनी है। वर्ष 2002 में इससे जुड़े अधिकारों को कानूनी मान्यता दी गई। इसके बाद 2017 में लागू 'प्रॉस्टिट्यूट प्रोटेक्शन एक्ट' के तहत सेक्स वर्कर्स के पंजीकरण, स्वास्थ्य परामर्श और प्रतिष्ठानों के लिए अनुमति की व्यवस्था बनाई गई।
दोनों देशों का तर्क है कि स्वैच्छिक सेक्स वर्क को कानून के दायरे में रखकर श्रमिकों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण बेहतर किया जा सकता है। लेकिन कानूनी मान्यता के बावजूद वहाँ मानव तस्करी, हिंसा और शोषण की समस्याएँ पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
न्यूजीलैंड और बेल्जियम: अपराधमुक्तिकरण से रोजगार तक
न्यूजीलैंड ने 2003 में 'प्रॉस्टिट्यूशन रिफॉर्म एक्ट' लागू करके वयस्कों के बीच सहमति से होने वाले सेक्स वर्क को व्यापक रूप से अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। इसका मतलब यह है कि किसी गतिविधि को विशेष आपराधिक प्रतिबंधों से बाहर निकालकर सामान्य श्रम, स्वास्थ्य और व्यावसायिक कानूनों के दायरे में लाया जाए।
इस कानून में सेक्स वर्कर्स की सुरक्षा, स्वास्थ्य और वेश्यालय संचालन से जुड़े नियम बनाए गए। हालाँकि नाबालिगों का यौन शोषण, जबरदस्ती और मानव तस्करी अब भी गंभीर अपराध हैं। विदेशी नागरिकों के लिए भी कुछ विशेष प्रतिबंध लागू हैं। बेल्जियम ने इससे आगे बढ़कर दिसंबर 2024 से निर्धारित शर्तों के तहत सेक्स वर्कर्स को औपचारिक रोजगार अनुबंध देने की व्यवस्था लागू की। इसका उद्देश्य उन्हें रोजगार संबंधी अधिकार और सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
इस मॉडल के समर्थकों का कहना है कि कानूनी अधिकार मिलने से शोषण और हिंसा की शिकायत करना आसान होता है। आलोचकों को आशंका है कि इससे सेक्स उद्योग का विस्तार हो सकता है। इस विवाद का फैसला केवल विचारों से नहीं, बल्कि वास्तविक परिणामों से होना चाहिए।
स्वीडन, फ्रांस और नॉर्वे: सेवा बेचने वाला नहीं, ग्राहक अपराधी
स्वीडन ने 1999 में यौन सेवा खरीदने को अपराध बनाया, लेकिन सेवा बेचने वाले व्यक्ति को केवल इसी कारण अपराधी नहीं माना। इस व्यवस्था के पीछे तर्क है कि यदि यौन सेवाओं की मांग कम कर दी जाए, तो सेक्स उद्योग और उससे जुड़े शोषण को सीमित किया जा सकता है। इसे 'नॉर्डिक मॉडल' या 'सेक्स-बायर मॉडल' कहते हैं।
बाद में फ्रांस, नॉर्वे, आइसलैंड और कुछ अन्य देशों ने भी इसी तरह के कानून अपनाए। कनाडा ने 2014 में यौन सेवाएँ खरीदने और इस उद्देश्य से संपर्क करने को अपराध बनाया। वहाँ सेवा बेचने वाले व्यक्ति को उसके अपने कार्य के लिए कुछ आपराधिक जिम्मेदारियों से संरक्षण दिया गया है।
इस मॉडल के समर्थकों का कहना है कि ग्राहक को दंडित करने से मांग घटती है और शोषण के खिलाफ संदेश जाता है। आलोचकों का तर्क है कि ग्राहक के अपराधी होने से कुछ सेक्स वर्कर्स को छिपकर काम करना पड़ सकता है, जिससे उनकी सुरक्षा और पुलिस तक पहुँच प्रभावित हो सकती है।
ब्रिटेन: सेक्स खरीदना-बेचना वैध, लेकिन वेश्यालय चलाना अपराध
ब्रिटेन में भी एक जैसी कानूनी व्यवस्था नहीं है। इंग्लैंड और वेल्स में वयस्कों के बीच सहमति से यौन सेवाएँ खरीदना और बेचना अपने आप अपराध नहीं है। लेकिन वेश्यालय चलाना, सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों को आकर्षित करना और किसी दूसरे व्यक्ति की वेश्यावृत्ति से शोषणकारी तरीके से लाभ कमाना दंडनीय हो सकता है।
नॉर्दर्न आयरलैंड में यौन सेवा खरीदना अपराध है, जबकि स्कॉटलैंड में खरीद और बिक्री अपने आप अपराध नहीं हैं। वहाँ भी सार्वजनिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर अलग प्रतिबंध लागू होते हैं।
अमेरिका: अधिकांश जगह प्रतिबंध, नेवादा में सीमित छूट
अमेरिका के अधिकांश राज्यों में वेश्यावृत्ति से जुड़े सामान्य लेनदेन प्रतिबंधित हैं। सेक्स बेचना, खरीदना या ग्राहकों को आकर्षित करना राज्य के कानून के अनुसार अपराध हो सकता है। नेवादा राज्य इसका सीमित अपवाद है। वहाँ कुछ ग्रामीण काउंटियों में लाइसेंस प्राप्त वेश्यालय चलाने की अनुमति है। लेकिन लास वेगास और रेनो जैसे बड़े शहरों में सामान्यतः यह अनुमति नहीं है।
यानी पूरे नेवादा में भी वेश्यावृत्ति कानूनी नहीं है। छूट केवल कुछ विशेष क्षेत्रों और लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठानों तक सीमित है। अमेरिका में एडल्ट मनोरंजन उद्योग के कई रूप कानूनी हो सकते हैं, लेकिन इससे प्रत्यक्ष रूप से यौन सेवाएँ खरीदने-बेचने को मान्यता नहीं मिल जाती। पोर्नोग्राफी और वेश्यावृत्ति कानून की नजर में अलग गतिविधियाँ हैं।
एशिया: थाईलैंड का विरोधाभास और दूसरे देशों के नियम
थाईलैंड को अक्सर ऐसा देश माना जाता है जहाँ वेश्यावृत्ति पूरी तरह कानूनी है। बैंकॉक और पटाया जैसे पर्यटन क्षेत्रों में सेक्स उद्योग की खुली मौजूदगी इस धारणा को मजबूत करती है। लेकिन वहाँ 1996 का 'प्रिवेंशन एंड सप्रेशन ऑफ प्रॉस्टिट्यूशन एक्ट' लागू है। इसके तहत सार्वजनिक रूप से ग्राहकों को आकर्षित करने, वेश्यावृत्ति प्रतिष्ठान चलाने, विज्ञापन और संबंधित मध्यस्थता जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध हैं।
यह उदाहरण बताता है कि किसी देश में कोई कारोबार खुले तौर पर दिखाई दे रहा हो, तो इसका अर्थ यह नहीं कि कानून ने उसे पूरी अनुमति दे रखी है।
जापान में भी वेश्यावृत्ति विरोधी कानून है। वहाँ निर्धारित प्रकार के यौन संभोग के बदले भुगतान प्रतिबंधित है, जबकि कुछ दूसरी एडल्ट मनोरंजन सेवाओं के लिए अलग नियम हैं।
दक्षिण कोरिया और चीन में वेश्यावृत्ति से जुड़ी गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंध हैं। सिंगापुर में वयस्क का स्वैच्छिक सेक्स वर्क अपने आप हर परिस्थिति में अपराध नहीं है, लेकिन वेश्यालय संचालन, दलाली और सार्वजनिक आग्रह जैसी गतिविधियों पर नियम लागू हैं।
मध्य पूर्व के अनेक देशों, खासकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में व्यावसायिक यौन सेवाओं पर कठोर प्रतिबंध हैं।
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका: अलग-अलग कानूनी रास्ते
अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका में वेश्यावृत्ति से जुड़ी खरीद और बिक्री पर आपराधिक प्रतिबंध लागू रहे हैं। इसे अपराधमुक्त करने पर लंबे समय से बहस चल रही है।सेनेगल में पंजीकरण और स्वास्थ्य संबंधी शर्तों के तहत कुछ प्रकार के वयस्क सेक्स वर्क की अनुमति है। लैटिन अमेरिका में कोलंबिया और ब्राजील जैसे देशों में वयस्कों का स्वैच्छिक सेक्स वर्क अपने आप अपराध नहीं है, लेकिन वेश्यालय, दलाली और तीसरे पक्ष की कमाई पर अलग नियम लागू हैं। मेक्सिको में संघीय, राज्य और स्थानीय कानूनों के कारण स्थिति जगह के अनुसार बदलती है। उरुग्वे में 2002 से निर्धारित शर्तों के तहत सेक्स वर्क को विनियमित किया गया है।
भारत में वेश्यावृत्ति कानूनी है या अपराध?
भारत में इस विषय को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम है। सच्चाई यह है कि किसी वयस्क व्यक्ति का अपनी इच्छा से सेक्स वर्क करना अपने आप अपराध नहीं है। लेकिन इससे जुड़ी कई गतिविधियाँ दंडनीय हैं। इस विषय का प्रमुख कानून है 'अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956', जिसे आईटीपीए कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण से जुड़ी गतिविधियों पर नियंत्रण करना है। इस कानून में हर वयस्क व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा से यौन सेवा देने को सामान्य रूप से अपराध घोषित नहीं किया गया है। लेकिन इसकी अलग-अलग धाराएँ वेश्यालय चलाने, दलाली, सार्वजनिक आग्रह और शोषण से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाती हैं।
वेश्यालय चलाना और दलाली अपराध
आईटीपीए की धारा 3 के तहत वेश्यालय चलाना, उसका प्रबंधन करना या उसके संचालन में मदद देना दंडनीय है।धारा 4 किसी दूसरे व्यक्ति की वेश्यावृत्ति से होने वाली कमाई पर निर्धारित परिस्थितियों में जीवनयापन करने से संबंधित है। धारा 5 किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से प्राप्त करने, बहलाने या ले जाने से जुड़े अपराधों पर लागू होती है। धारा 6 किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले परिसर में गैरकानूनी रूप से रोके रखने से संबंधित है। इसलिए भारत में किसी व्यक्ति का स्वेच्छा से सेक्स वर्क करना अपराध न होने का अर्थ यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से वेश्यालय खोल सकता है या दूसरों की यौन सेवाओं से मनमाना लाभ कमा सकता है।
सड़क पर ग्राहक बुलाना भी पड़ सकता है भारी
आईटीपीए की धारा 8 सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों को आकर्षित करने और यौन सेवाओं के लिए आग्रह करने के कुछ निर्धारित व्यवहारों को दंडनीय बनाती है। धारा 7 कुछ अधिसूचित सार्वजनिक क्षेत्रों और निर्धारित स्थानों के आसपास वेश्यावृत्ति से संबंधित गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाती है। इनमें धार्मिक स्थल, स्कूल, छात्रावास और अस्पताल जैसे स्थान शामिल हो सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में 200 मीटर की दूरी का भी प्रावधान है।
इसका अर्थ है कि निजी तौर पर स्वैच्छिक सेक्स वर्क अपने आप अपराध न होने के बावजूद सार्वजनिक रूप से ग्राहकों को आकर्षित करना कानून के दायरे में आ सकता है।
भारत में ग्राहक अपराधी है या नहीं?
भारत में स्वीडन की तरह हर यौन सेवा खरीद को स्वतंत्र रूप से अपराध घोषित नहीं किया गया है। इसलिए वयस्कों के बीच सहमति से हुए हर निजी व्यावसायिक यौन संपर्क में ग्राहक अपने आप अपराधी नहीं हो जाता।
लेकिन उसे हर परिस्थिति में कानूनी छूट भी नहीं है। प्रतिबंधित स्थानों से जुड़े मामलों में धारा 7 के तहत ग्राहक पर कार्रवाई हो सकती है। नाबालिगों का यौन शोषण, मानव तस्करी और जबरदस्ती जैसे मामलों में भी अलग आपराधिक कानून लागू होते हैं। इसलिए ग्राहक की कानूनी जिम्मेदारी मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों पर क्या कहा?
भारत में इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का 19 मई 2022 का आदेश महत्त्वपूर्ण है। यह 'बुद्धदेव कर्मस्कार बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' मामले से जुड़ा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेक्स वर्कर्स भी संविधान के तहत समान कानूनी संरक्षण और सम्मान के अधिकारी हैं। यदि कोई वयस्क अपनी सहमति से सेक्स वर्क कर रहा है, तो पुलिस केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि किसी वेश्यालय पर छापेमारी के दौरान वहाँ मौजूद स्वैच्छिक वयस्क सेक्स वर्कर्स को केवल उनके काम के कारण गिरफ्तार या प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, सेक्स वर्कर्स के साथ यौन हिंसा या अन्य अपराध होने पर उन्हें भी दूसरे नागरिकों की तरह कानूनी और चिकित्सकीय सहायता मिलनी चाहिए। हालाँकि इस आदेश ने वेश्यालय चलाने, मानव तस्करी या नाबालिगों के शोषण को कानूनी नहीं बनाया।
2026 में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का महत्त्व
29 मई 2026 को 'प्रज्वला बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण से प्रभावित लोगों की पहचान, बचाव और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर विचार किया। इसमें स्वैच्छिक वयस्क सेक्स वर्कर्स और जबरन वेश्यावृत्ति में धकेले गए लोगों के बीच अंतर करने पर जोर दिया गया। अदालत ने माना कि अपनी इच्छा से काम करने वाले वयस्कों को बिना उचित आधार के संरक्षण गृह में भेजना उनकी स्वतंत्रता से जुड़ी समस्या पैदा कर सकता है।
13 अक्टूबर 2026 को इसी मामले में आगे की कार्यवाही के दौरान अदालत ने संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। किसी व्यक्ति को संरक्षण गृह में रखने या पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह जाँचना जरूरी है कि वह स्वेच्छा से सेक्स वर्क कर रहा है या तस्करी और जबरदस्ती का शिकार है।
यह अंतर बेहद महत्त्वपूर्ण है। किसी वेश्यालय पर कार्रवाई के दौरान वहाँ मौजूद हर व्यक्ति को तस्करी की पीड़िता मान लेना सही नहीं। कुछ लोग जबरदस्ती वहाँ पहुँचाए गए हो सकते हैं, जबकि कुछ वयस्क अपनी इच्छा से काम कर रहे हो सकते हैं। हालाँकि इन निर्देशों से भारत में वेश्यालयों को सामान्य व्यावसायिक लाइसेंस देकर चलाने की अनुमति नहीं मिल गई है। आईटीपीए के प्रतिबंध अब भी लागू हैं।
क्या नाबालिग की सहमति से वेश्यावृत्ति हो सकती है?
नहीं। नाबालिगों के मामले में वयस्कों की सहमति से जुड़े सामान्य कानूनी मानदंड लागू नहीं होते। भारत में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के यौन शोषण से संबंधित पॉक्सो अधिनियम और मानव तस्करी से जुड़े अन्य कानून लागू होते हैं। किसी नाबालिग को पैसे देकर यौन सेवा लेना उसकी स्वतंत्र सहमति का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। स्वैच्छिक वयस्क सेक्स वर्क और बच्चों के यौन शोषण के बीच स्पष्ट अंतर करना अनिवार्य है।
वेश्यावृत्ति को कानूनी बनाने के पक्ष में क्या तर्क हैं?
इसके समर्थकों का कहना है कि यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से कोई गतिविधि कर रहे हैं, तो केवल उसी वजह से उन्हें अपराधी नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार अपराधीकरण से सेक्स वर्कर्स में पुलिस का डर बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में हिंसा, धमकी, जबरन वसूली और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायत करना मुश्किल हो जाता है। कानूनी मान्यता या अपराधमुक्तिकरण से स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षित कामकाज और कानूनी सहायता तक पहुँच बेहतर हो सकती है। वर्ष 2018 में 'पीएलओएस मेडिसिन' में प्रकाशित एक वैज्ञानिक समीक्षा में दमनकारी पुलिस कार्रवाई और सेक्स वर्कर्स के प्रतिकूल स्वास्थ्य तथा सुरक्षा परिणामों के बीच संबंध पाया गया था। हालाँकि ऐसे अध्ययन यह साबित नहीं करते कि हर देश में एक ही कानूनी मॉडल समान परिणाम देगा।
क्या प्रतिबंध लगाने से वेश्यावृत्ति समाप्त हो जाती है?
किसी गतिविधि को अपराध घोषित कर देना और उसका पूरी तरह समाप्त हो जाना दो अलग बातें हैं। थाईलैंड में संबंधित गतिविधियों पर प्रतिबंध होने के बावजूद सेक्स उद्योग मौजूद है। अमेरिका के अधिकांश राज्यों में वेश्यावृत्ति प्रतिबंधित है, लेकिन वहाँ भी व्यावसायिक यौन सेवाएँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। दूसरी ओर, नीदरलैंड और जर्मनी जैसे देशों में कानूनी मान्यता के बावजूद मानव तस्करी और शोषण की समस्या बनी हुई है।
इसलिए किसी नीति की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि कानून में वेश्यावृत्ति को अपराध घोषित किया गया है या नहीं। यह भी देखना होगा कि उस व्यवस्था से हिंसा, तस्करी, स्वास्थ्य जोखिम और शोषण पर क्या असर पड़ा।
इस पूरे विषय का सबसे बड़ा सबक यह है कि 'वेश्यावृत्ति कानूनी है या नहीं' का सवाल जितना सरल लगता है, उसका जवाब उतना ही जटिल है।
किसी देश में सेक्स बेचना कानूनी हो सकता है, लेकिन खरीदना अपराध। खरीदना और बेचना दोनों कानूनी हो सकते हैं, लेकिन वेश्यालय चलाना प्रतिबंधित। और जहाँ पूरा कारोबार अपराध घोषित है, वहाँ भी वह पूरी तरह समाप्त हो जाए, इसकी गारंटी नहीं।
इसलिए किसी देश का कानून समझने के लिए चार बातें देखनी चाहिए: क्या वयस्क अपनी इच्छा से यौन सेवा दे सकता है, क्या ग्राहक उसे खरीद सकता है, क्या वेश्यालय या तीसरे पक्ष का कारोबार कानूनी है और मानव तस्करी तथा जबरदस्ती के खिलाफ क्या सुरक्षा है।
कानूनी मॉडल पर दुनिया में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन एक बात पर समझौता नहीं हो सकता: बच्चों का यौन शोषण, जबरदस्ती, हिंसा और मानव तस्करी अपराध हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटना और हर व्यक्ति की गरिमा तथा सुरक्षा सुनिश्चित करना ही किसी भी व्यवस्था की असली परीक्षा है।


