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Credit Card Psychology: क्या Credit Card आपकी जेब से ज्यादा दिमाग को करता है कंट्रोल? स्टडी में बड़ा खुलासा
Credit Card Psychology: क्रेडिट कार्ड का दिमाग पर असर! स्टडी में सामने आया बड़ा खुलासा, कैसे बढ़ती है ओवरस्पेंडिंग की आदत
Credit Card Psychology
Credit Card Psychology: ऑन लाईन शॉपिंग कल्चर और कैशलेश ट्रेंड ने क्रेडिट कार्ड के चलन को तेजी से पंख लगा दिए हैं। यही वजह है कि आज के दौर में क्रेडिट कार्ड ने खरीदारी को बेहद आसान बना दिया है। मोबाइल या कार्ड का एक टैप और खरीदारी पूरी। लेकिन यही सुविधा कई बार लोगों को जरूरत से ज्यादा खर्च करने की ओर भी धकेल सकती है। अमेरिका में हुई एक रिसर्च में दावा किया गया है कि क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने के दौरान दिमाग के उस हिस्से में गतिविधि बढ़ जाती है, जो खुशी और इनाम का एहसास कराता है। यही कारण है कि कई लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे खरीदारी करते रहते हैं और धीरे-धीरे यह आदत एक तरह की लत का रूप ले सकती है।
कैश की तुलना में क्रेडिट कार्ड से खर्च करना क्यों लगता है आसान?
जब कोई व्यक्ति नकद पैसे देकर खरीदारी करता है, तो उसे तुरंत एहसास होता है कि उसकी जेब से पैसे निकल रहे हैं। यही एहसास उसे सोच-समझकर खर्च करने के लिए प्रेरित करता है। दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर पैसे तुरंत हाथ से निकलते हुए महसूस नहीं होते। यही वजह है कि कई लोग कार्ड से खरीदारी करते समय खर्च की सीमा भूल जाते हैं और जरूरत से ज्यादा सामान खरीद लेते हैं।
रिसर्च में सामने आई लोगों की खर्च करने की आदत
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने पाया कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लोगों को अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित करता है। अध्ययन में यह भी देखा गया कि जो लोग रोजमर्रा की खरीदारी में कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, वे नकद भुगतान करने वालों की तुलना में अधिक पैसा खर्च कर देते हैं। कई बार वे खरीदारी के समय खर्च की परवाह भी नहीं करते।
'कोकीन जैसा असर' का क्या मतलब है?
रिसर्च में यह नहीं कहा गया कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना कोकीन लेने जैसा है। इसका मतलब यह है कि खरीदारी के दौरान दिमाग के 'रिवॉर्ड सिस्टम' में वैसी ही गतिविधियां देखी जाती हैं, जैसी किसी बेहद सुखद अनुभव के समय होती हैं। जब व्यक्ति अपनी पसंद की चीज खरीदता है या किसी बड़े डिस्काउंट का फायदा उठाता है, तो दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल सक्रिय होता है। यही केमिकल खुशी और संतुष्टि का एहसास देता है और बार-बार खरीदारी की इच्छा पैदा कर सकता है।
ऑफर और भारी छूट देखकर क्यों बढ़ जाती है खरीदारी?
रिसर्चर प्रोफेसर द्राजेन प्रीलेक के मुताबिक, इंसानों के दिमाग में मौजूद रिवॉर्ड नेटवर्क आकर्षक ऑफर और भारी छूट देखकर तेजी से सक्रिय हो जाता है। यही वजह है कि 'फ्लैश सेल', '70 प्रतिशत तक छूट' या 'आज आखिरी मौका' जैसे ऑफर लोगों को बिना ज्यादा सोचे खरीदारी करने के लिए प्रेरित करते हैं। कई बार लोग ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं, जिनकी उन्हें वास्तव में जरूरत नहीं होती। हर क्रेडिट कार्ड खर्च करने के तरीके को अलग तरह से प्रभावित कर सकता है।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि अलग-अलग तरह के क्रेडिट कार्ड लोगों की खरीदारी की आदतों को अलग तरीके से प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, रेस्टोरेंट या लाइफस्टाइल ब्रांड से जुड़े रिवॉर्ड कार्ड लोगों को खाने-पीने और मनोरंजन पर ज्यादा खर्च करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जबकि फ्यूल कार्ड का इस्तेमाल आमतौर पर सीमित जरूरतों तक ही रहता है।
कैसे धीरे-धीरे आदत बन जाती है ज्यादा खरीदारी?
शुरुआत में लोग केवल जरूरत का सामान खरीदते हैं। इसके बाद कैशबैक, रिवॉर्ड प्वाइंट, नो-कॉस्ट ईएमआई और विशेष ऑफर जैसी सुविधाएं उन्हें बार-बार कार्ड इस्तेमाल करने के लिए आकर्षित करती हैं। धीरे-धीरे कई लोग बिना जरूरत के भी खरीदारी करने लगते हैं। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण न रखा जाए, तो बढ़ता हुआ क्रेडिट कार्ड बिल आर्थिक तनाव और कर्ज की वजह बन सकता है।
किन संकेतों से समझें कि खर्च नियंत्रण से बाहर हो रहा है?
अगर हर महीने क्रेडिट कार्ड की लिमिट लगभग पूरी हो जाती है, केवल ऑफर देखकर खरीदारी की जाती है, बिल समय पर भरने में परेशानी होती है या पुराने कार्ड का बिल चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ता है, तो यह संकेत हो सकते हैं कि खर्च करने की आदत अब नियंत्रण से बाहर जा रही है। ऐसे में समय रहते अपनी वित्तीय योजना पर दोबारा ध्यान देना जरूरी है।
समझदारी से इस्तेमाल करेंगे तो फायदेमंद भी है क्रेडिट कार्ड
फाइनेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रेडिट कार्ड अपने आप में कोई बुरी चीज नहीं है। अगर इसका इस्तेमाल तय बजट के भीतर किया जाए और हर महीने पूरा बिल समय पर चुका दिया जाए, तो यह सुविधाजनक भुगतान, बेहतर क्रेडिट स्कोर और कई तरह के रिवॉर्ड का फायदा भी देता है। लेकिन बिना योजना के लगातार खर्च करना भविष्य में आर्थिक मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसलिए हर खरीदारी से पहले जरूरत और बजट दोनों पर जरूर विचार करना चाहिए।
इनका कहना है कि क्रेडिट कार्ड अपने आप में कोई बुरी चीज नहीं है। अगर इसका इस्तेमाल तय बजट के भीतर किया जाए और हर महीने पूरा बिल समय पर चुका दिया जाए, तो यह सुविधाजनक भुगतान, बेहतर क्रेडिट स्कोर और कई तरह के रिवॉर्ड का फायदा भी देता है। लेकिन बिना योजना के लगातार खर्च करना भविष्य में आर्थिक मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसलिए हर खरीदारी से पहले जरूरत और बजट दोनों पर जरूर विचार करना चाहिए।


