Durga Puja 2026: 140 करोड़ के सोने से सजीं मां दुर्गा.. कोलकाता में 13 हजार पुराने पेन से बनी अनोखी प्रतिमा,

Durga Puja 2026 में सिलीगुड़ी में मां दुर्गा को 100 किलो से ज्यादा सोने के गहनों से सजाया गया है, जिनकी कीमत 140 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। वहीं, कोलकाता में 13 हजार पुराने पेन से अनोखी कलाकृति बनाई गई है।

Jyotsana Singh
Published on: 17 Oct 2026 11:30 AM IST (Updated on: 17 Oct 2026 11:30 AM IST)
Durga Puja 2026: Goddess Durga Adorned with Gold Worth ₹140 Crore, 13,000-Pen Artwork
X

Durga Puja 2026: Goddess Durga Adorned with Gold Worth ₹140 Crore, 13,000-Pen Artwork

140 करोड़ के सोने से सजीं मां दुर्गा.. कोलकाता में 13 हजार पुराने पेन से बनी अनोखी प्रतिमा, देखें खासियत

शारदीय नवरात्र के आते ही दुर्गा पूजा का भव्य नजारा मंदिरों से लेकर पंडालों तक लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। खास तौर पर काली पूजा का गढ़ माने जाने वाला सम्पूर्ण पश्चिम बंगाल अपनी जगमगाती सड़कें, भव्य पंडाल और मां दुर्गा के दर्शन के लिए उमड़ती श्रद्धालुओं से उत्सव में डूबा नजर आने लगा है। यहां दुर्गा पूजा सिर्फ धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और रचनात्मकता का ऐसा अवसर बनकर आती है, जिसमें हर साल कुछ नया रोमांचक देखने को मिलता है। इस बार सिलीगुड़ी की सेंट्रल कॉलोनी दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की प्रतिमा को 100 किलो से अधिक सोने के गहनों से सजाया गया है। इन आभूषणों की अनुमानित कीमत 120 से 140 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वहीं, कोलकाता के त्रिधारा सम्मिलनी में करीब 13 हजार पुराने प्लास्टिक पेन और रिफिल से मां दुर्गा की एक अनोखी कलाकृति तैयार की गई है। एक पंडाल में सोने की चमक लोगों को आकर्षित कर रही है, तो दूसरे में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। आइए जानते हैं इन खास दुर्गा पूजा पंडालों की खूबियां और यहां की गई व्यवस्थाओं के बारे में।

सिलीगुड़ी की सेंट्रल कॉलोनी में 100 किलो से ज्यादा सोने के गहनों से सजीं मां दुर्गा


पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सेंट्रल कॉलोनी की दुर्गा पूजा इस बार अपनी भव्यता को लेकर चर्चा में है। पूजा के 64वें वर्ष में यहां मां दुर्गा की प्रतिमा को 100 किलो से अधिक सोने के गहनों से सजाया गया है। सोने के इन आभूषणों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 120 से 140 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में सोने के गहनों से सजी मां की प्रतिमा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल पहुंच रहे हैं।

मां दुर्गा के भव्य स्वरूप और आभूषणों की चमक ने इस पंडाल को खास आकर्षण बना दिया है। श्रद्धालु मां के दर्शन करने के साथ प्रतिमा की

'A Fairy Tale of Sculptures' थीम पर तैयार किया गया भव्य पंडाल



लखनऊ बंगीय नागरिक समाज के संयोजक प्रकाश कुमार दत्ता के मुताबिक सेंट्रल कॉलोनी दुर्गा पूजा की खासियत केवल सोने के गहने ही नहीं हैं। बल्कि इस बार पूजा समिति ने पंडाल की थीम 'A Fairy Tale of Sculptures' रखी है, जिसका अर्थ है मूर्तियों की परीकथा। इस थीम के जरिए मूर्तिकला, कलात्मक संरचनाओं और सजावट को खास महत्व दिया गया है।

पंडाल को इस तरह सजाया गया है कि यहां आने वाले श्रद्धालु धार्मिक वातावरण के साथ कला की खूबसूरती का भी अनुभव कर सकें। मां दुर्गा की प्रतिमा के अलावा पंडाल की कलात्मक सजावट लोगों का ध्यान खींच रही है। यही वजह है कि उद्घाटन के बाद से यहां लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी है।

इस दुर्गा पूजा का औपचारिक उद्घाटन जलपाईगुड़ी के सांसद जयंत रॉय ने किया। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचे। सोने के गहनों से सजी प्रतिमा और अनोखी थीम ने सिलीगुड़ी के इस आयोजन को इस साल खास पहचान दी है।

Senco Gold & Diamonds ने प्रायोजित किए सोने के आभूषण

आयोजकों के अनुसार, मां दुर्गा की प्रतिमा पर सजाए गए सोने के गहने मशहूर आभूषण ब्रांड Senco Gold & Diamonds की ओर से प्रायोजित किए गए हैं। इन गहनों की अनुमानित कीमत 120 से 140 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। आभूषणों की मात्रा और भव्यता ने इस आयोजन को लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम बंगाल के अलग-अलग शहरों में हर साल अनोखी सजावट देखने को मिलती है। कहीं पारंपरिक कला को महत्व दिया जाता है, तो कहीं आधुनिक तकनीक और नई सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। सेंट्रल कॉलोनी की पूजा में सोने के गहनों से सजी प्रतिमा इसी भव्यता का उदाहरण है।

40 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे, पंडाल में सुरक्षा के खास इंतजाम

जब किसी पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, तो भीड़ को संभालना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आयोजकों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। सेंट्रल कॉलोनी में इस बात को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। आयोजकों के मुताबिक, पंडाल परिसर में 40 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा सके। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, सशस्त्र बलों और निजी सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने और भीड़ के कारण होने वाली परेशानी को कम करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इतने बड़े आकर्षण वाले पंडाल में सुरक्षा इंतजाम इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि प्रतिमा को देखने के लिए लगातार लोगों के पहुंचने की संभावना रहती है।

कोलकाता के त्रिधारा सम्मिलनी में 13 हजार पुराने पेन से बनी मां दुर्गा की कलाकृति

सिलीगुड़ी में जहां सोने से सजी प्रतिमा लोगों का ध्यान खींच रही है, वहीं कोलकाता के त्रिधारा सम्मिलनी दुर्गा पूजा परिसर में एक अलग तरह की कलाकृति चर्चा में है। यहां करीब 13 हजार इस्तेमाल किए जा चुके प्लास्टिक पेन और रिफिल को जोड़कर मां दुर्गा की अनोखी आकृति तैयार की गई है। आमतौर पर लिखने के बाद बेकार समझे जाने वाले पेन को इस तरह कला का रूप देना अपने आप में एक खास प्रयोग है। इस कलाकृति को कलाकार चंद्रनाथ साहा ने तैयार किया है। इसकी ऊंचाई करीब 5.5 फीट, चौड़ाई 4.5 फीट और गहराई 3 फीट बताई गई है। हजारों पेन को एक साथ जोड़कर मां दुर्गा के स्वरूप को उभारना आसान काम नहीं था। इसके लिए सामग्री को इस तरह व्यवस्थित करना जरूरी था कि अलग-अलग पेन मिलकर एक बड़ी और पहचानने योग्य आकृति बना सकें। इस कलाकृति की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें किसी पारंपरिक सामग्री के बजाय रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पेन का उपयोग किया गया है। यह प्रयोग दिखाता है कि सही सोच और रचनात्मकता से साधारण वस्तुओं को भी आकर्षक कलाकृति में बदला जा सकता है।

पूजा के बाद विसर्जित नहीं होगी पेन से बनी कलाकृति, रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा प्लास्टिक

त्रिधारा सम्मिलनी की इस पहल में कला के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी शामिल है। पेन से बनी इस कलाकृति को मुख्य पारंपरिक प्रतिमा के पास एक अलग कला स्थापना के रूप में रखा गया है। पूजा के बाद मुख्य प्रतिमा का विसर्जन धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाएगा, लेकिन पेन से बनी कलाकृति को विसर्जित नहीं किया जाएगा।

इसके बजाय इसे खोलकर इसमें इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक को रीसाइक्लिंग के लिए भेजने की योजना है। इस प्रक्रिया के जरिए प्लास्टिक को दोबारा उपयोगी सामग्री में बदलने का प्रयास किया जाएगा। इससे लोगों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि इस्तेमाल के बाद हर वस्तु को कचरा मानकर फेंक देना जरूरी नहीं है। कई चीजों को नए तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

त्योहारों के दौरान सजावट और अन्य गतिविधियों से बड़ी मात्रा में कचरा पैदा हो सकता है। ऐसे में प्लास्टिक का दोबारा इस्तेमाल करने की यह पहल लोगों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर देती है। त्रिधारा सम्मिलनी की कलाकृति इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक आयोजन के जरिए भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

कोलकाता की दुर्गा पूजा में हर साल क्यों दिखता है कुछ नया?

Durga Puja 2026: कोलकाता की दुर्गा पूजा देशभर में अपनी भव्यता और अनोखे पंडालों के लिए मशहूर है। यहां पूजा समितियां हर साल नई थीम, आकर्षक सजावट और कलात्मक प्रयोगों के जरिए श्रद्धालुओं को कुछ अलग दिखाने की कोशिश करती हैं। कई पंडाल ऐतिहासिक इमारतों, लोककला और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित होते हैं, जबकि कुछ में आधुनिक तकनीक और पर्यावरण से जुड़े विषयों को जगह दी जाती है। पंडालों की यह खासियत दुर्गा पूजा को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने देती। यहां कलाकारों, कारीगरों और सजावट से जुड़े लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। साथ ही, श्रद्धालुओं को अलग-अलग कलात्मक प्रयोगों और सामाजिक संदेशों से जुड़ने का मौका भी मिलता है। सिलीगुड़ी की सेंट्रल कॉलोनी और कोलकाता के त्रिधारा सम्मिलनी की पूजा इसी विविधता का उदाहरण हैं।। एक ओर सोने के गहनों से सजी मां दुर्गा की प्रतिमा अपनी भव्यता से लोगों को आकर्षित कर रही है, तो दूसरी ओर पुराने प्लास्टिक पेन से बनी कलाकृति पर्यावरण संरक्षण की बात कह रही है।

दुर्गा पूजा पंडाल घूमने जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान

लोकप्रिय दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शन के लिए जाने से पहले स्थानीय यातायात व्यवस्था और प्रवेश से जुड़े निर्देशों की जानकारी लेना उपयोगी रहता है। भीड़ अधिक होने पर कतार में इंतजार करना पड़ सकता है, इसलिए परिवार के साथ जाने वाले लोगों को बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सेंट्रल कॉलोनी जैसे बड़े आकर्षण वाले पंडाल में सुरक्षा जांच और भीड़ नियंत्रण के कारण दर्शन में समय लग सकता है। ऐसे में सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना और धक्का-मुक्की से बचना जरूरी है। वहीं, त्रिधारा सम्मिलनी में पेन से बनी कलाकृति देखने जाने वाले लोगों को भी प्रदर्शित सामग्री को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।

Jyotsana Singh
ABOUT THE AUTHOR

Jyotsana Singh

Content Writer Mail ID - jyotsana.b.singh@gmail.comjyotsana.b.singh@gmail.com

Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

Next Story