Durga Puja in Lucknow: लखनऊ में कहां दिखता है मिनी बंगाल का नजारा? इन 6 दुर्गा पंडालों की कहानी है खास

Durga Puja in Lucknow के दौरान मिनी बंगाल का नजारा देखना चाहते हैं? जानिए बंगाली क्लब, मॉडल हाउस, रविंद्र पल्ली, लखनऊ कैंट और जानकीपुरम समेत 6 प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों का इतिहास और खासियत।

Jyotsana Singh
Published on: 11 Oct 2026 1:38 PM IST (Updated on: 11 Oct 2026 1:39 PM IST)
Durga Puja in Lucknow: Explore 6 Famous Pandals and Their Rich History
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Durga Puja in Lucknow: Explore 6 Famous Pandals and Their Rich History

Durga Puja in Lucknow: लखनऊ में दुर्गा पूजा के दौरान शहर का नजारा ही बदल जाता है। सड़कों पर उत्सव की रौनक, पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन के लिए उमड़ती भीड़ और ढाक की गूंज के बीच ऐसा लगता है, जैसे नवाबों के शहर में बंगाल उतर आया हो। यहां दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दशकों पुरानी परंपरा, बंगाली संस्कृति और सामाजिक एकता का उत्सव भी है। यही वजह है कि नवरात्रि के दिनों में लखनऊ को 'मिनी बंगाल' कहा जाता है। शहर में अलग-अलग दुर्गा पूजा समितियां वर्षों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। कहीं एक सदी से भी पुराना इतिहास देखने को मिलता है, तो कहीं भव्य आयोजन और मां दुर्गा की विशाल प्रतिमाएं लोगों को आकर्षित करती हैं। इन पंडालों में बंगाली समुदाय के साथ दूसरे समुदायों के लोग भी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।

अगर आप लखनऊ में दुर्गा पूजा के दौरान मां के दर्शन करने और शहर की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने की योजना बना रहे हैं, तो मॉडल हाउस, बंगाली क्लब, रविंद्र पल्ली, कैंट, जानकीपुरम और सहारा स्टेट जैसे प्रमुख पूजा केंद्रों के बारे में जानना जरूरी है।

1. बंगाली क्लब, हिवेट रोड:लखनऊ की दुर्गा पूजा का ऐतिहासिक केंद्र


लखनऊ की दुर्गा पूजा की चर्चा बंगाली क्लब के बिना अधूरी है। हिवेट रोड, जिसे अब शिवाजी मार्ग के नाम से जाना जाता है, पर स्थित यह क्लब शहर में बंगाली संस्कृति के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहां दुर्गा पूजा की परंपरा एक सदी से भी अधिक पुरानी है।

क्लब के इतिहास के अनुसार, अतुल कृष्ण सिन्हा 1901 में रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में नौकरी के सिलसिले में लखनऊ आए थे। उन्हें बंगाली नाटक, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों से गहरा लगाव था। इसी रुचि ने बंगाली समुदाय के लिए एक सांस्कृतिक संस्था बनाने की प्रेरणा दी।

क्लब की स्थापना 1914 में हुई और उसी साल यहां सार्वजनिक दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई। हालांकि, समुदाय के बुजुर्गों की स्मृतियों के अनुसार, इससे पहले करीब 1909 में ब्रिटिश रेजिडेंसी के आसपास निजी तौर पर पूजा आयोजित किए जाने की परंपरा भी रही थी। बंगाली क्लब की एक खास परंपरा प्रतिमा निर्माण से जुड़ी है। यहां मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाओं को एक ही संरचना में प्रस्तुत करने की परंपरा रही है। इसे बंगाली परंपरा में 'एकचाला ठाकुर' कहा जाता है। क्लब परिसर में प्रतिमा तैयार करने की परंपरा भी इसकी विशिष्ट पहचान रही है।समय के साथ यह आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बंगाली समाज के सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा बन गया। यहां मां दुर्गा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा के साथ पारंपरिक रस्में और सांस्कृतिक गतिविधियां इस आयोजन की पहचान हैं।

बंगाली क्लब का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि यह लखनऊ में बंगाली समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को एक सदी से अधिक समय से संजोए हुए है। यहां की दुर्गा पूजा शहर के पुराने और प्रतिष्ठित आयोजनों में गिनी जाती है।

2. मॉडल हाउस पार्क: दशकों पुरानी परंपरा और भव्य आयोजन

मॉडल हाउस पार्क की दुर्गा पूजा लखनऊ के लोकप्रिय आयोजनों में शामिल है। यहां मां दुर्गा के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा के दिनों में यह क्षेत्र उत्सव के रंग में रंग जाता है और आसपास के इलाकों से भी लोग यहां आते हैं।

मॉडल हाउस में मित्र संघो समिति की दुर्गा पूजा की शुरुआत 1975 में हुई थी। वर्षों से जारी इस परंपरा ने इसे शहर के प्रमुख दुर्गा पूजा केंद्रों में शामिल कर दिया है। समिति के आयोजन में धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है।

इस पंडाल की पहचान इसके भव्य आयोजन और मां दुर्गा के आकर्षक स्वरूप से जुड़ी रही है। यहां पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। परिवार के साथ दर्शन करने आने वाले लोगों के लिए यह लखनऊ के प्रमुख दुर्गा पूजा स्थलों में से एक है।

मॉडल हाउस की खासियत यह है कि यहां की दुर्गा पूजा केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से जुड़ी सामुदायिक परंपरा का हिस्सा है। यही निरंतरता इसे शहर की सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण स्थान दिलाती है।

3. रविंद्र पल्ली, इंदिरा नगर: लोकप्रिय दुर्गा पूजा का प्रमुख ठिकाना

इंदिरा नगर के रविंद्र पल्ली इलाके में होने वाला दुर्गा पूजा आयोजन भी लखनऊ में खास पहचान रखता है। नवरात्रि के दौरान यहां मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के साथ दूसरे इलाकों से आने वाले भक्त भी इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं। रविंद्र पल्ली की दुर्गा पूजा की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी सामुदायिक भागीदारी है। यहां पूजा के अवसर पर बंगाली परंपराओं का पालन किया जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उत्सव का माहौल देखने को मिलता है।

लखनऊ में दुर्गा पूजा का विस्तार केवल पुराने शहर या बंगाली समुदाय की पारंपरिक बस्तियों तक सीमित नहीं रहा है। इंदिरा नगर जैसे इलाकों में भी ऐसे आयोजन शहर की बदलती सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। रविंद्र पल्ली इसका एक उदाहरण है, जहां दुर्गा पूजा स्थानीय समुदाय के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए मां दुर्गा के दर्शन के साथ सामूहिक उत्सव का अनुभव भी खास रहता है।

4. लखनऊ कैंट: सात दशक से अधिक पुरानी दुर्गा पूजा परंपरा

लखनऊ कैंट क्षेत्र में आयोजित दुर्गा पूजा भी शहर के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। कैंट पूजा सेवा समिति की ओर से होने वाली पूजा की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। समिति से जुड़े पुराने विवरणों में इसके अध्यक्ष एसएन पाल ने बताया था कि यहां करीब 70 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इतने लंबे समय से जारी यह परंपरा कैंट क्षेत्र में बसे परिवारों और बंगाली समुदाय के सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाती है। यहां मां दुर्गा की पूजा पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ की जाती है। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु परिवार और दोस्तों के साथ दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूजा के अवसर पर सामुदायिक भागीदारी और धार्मिक आस्था का विशेष महत्व रहता है। कैंट की दुर्गा पूजा की खासियत इसकी पुरानी परंपरा और निरंतरता है। बदलते समय के साथ शहर का विस्तार हुआ, लेकिन ऐसे आयोजन आज भी लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हैं।

5. जानकीपुरम सेक्टर एफ: भव्य दुर्गा पूजा का उभरता केंद्र

लखनऊ के उत्तरी हिस्से में स्थित जानकीपुरम सेक्टर एफ में आयोजित दुर्गा पूजा भी श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय रही है। यहां उत्सव दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से आयोजन किया जाता है। क्षेत्र के विस्तार के साथ इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों ने स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। जानकीपुरम में दुर्गा पूजा की पहचान भव्य आयोजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी से जुड़ी है। यहां आसपास की कॉलोनियों के लोग मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचते हैं। पूजा के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए उत्सव का माहौल बनता है। लखनऊ में दुर्गा पूजा की परंपरा पुराने इलाकों से आगे बढ़कर नए आवासीय क्षेत्रों तक पहुंची है। जानकीपुरम इसका उदाहरण है। यहां होने वाले आयोजन दिखाते हैं कि दुर्गा पूजा अब शहर के व्यापक सामाजिक जीवन का हिस्सा बन चुकी है। जो लोग लखनऊ के उत्तरी हिस्से में रहते हैं, उनके लिए यह प्रमुख दुर्गा पूजा स्थलों में से एक है। हालांकि, दर्शन के समय और इस वर्ष के आयोजन की जानकारी के लिए संबंधित समिति की सूचना देखना बेहतर होगा।

6. सहारा स्टेट, जानकीपुरम: धार्मिक आस्था और सामुदायिक एकता का उत्सव

सहारा स्टेट क्षेत्र में सद्भावना सांस्कृतिक समिति की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। इस आयोजन ने इलाके में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बीच अपनी पहचान बनाई है।

यहां दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। आयोजन का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों को एक साथ आने और उत्सव में भाग लेने का अवसर भी देता है। लखनऊ की दुर्गा पूजा की एक विशेष पहचान विभिन्न समुदायों की भागीदारी है। सहारा स्टेट जैसे इलाकों में आयोजित पूजा इस परंपरा को आगे बढ़ाती है। उत्सव के दौरान लोग अपनी धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेलजोल और आपसी सद्भाव को भी महत्व देते हैं। दुर्गा पूजा के आयोजन शहर के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। यही कारण है कि इन पंडालों में केवल बंगाली समुदाय ही नहीं, बल्कि दूसरे समुदायों के लोग भी मां दुर्गा के दर्शन करने और उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचते हैं।

लखनऊ को क्यों कहा जाता है मिनी बंगाल?

लखनऊ में दुर्गा पूजा की लोकप्रियता के पीछे बंगाली समुदाय का लंबा सांस्कृतिक इतिहास है। नौकरी, शिक्षा और दूसरे कारणों से यहां बसे बंगाली परिवारों ने अपनी परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया। समय के साथ दुर्गा पूजा शहर के सबसे प्रमुख सामुदायिक आयोजनों में शामिल हो गई। दुर्गा पूजा के दौरान ढाक की थाप, पारंपरिक पूजा विधियां, मां दुर्गा की प्रतिमाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम शहर को अलग पहचान देते हैं। इन आयोजनों में बंगाली समाज की परंपराएं दिखाई देती हैं, लेकिन उत्सव में शामिल होने वाले लोगों की विविधता इसे पूरे लखनऊ का पर्व बना देती है।

यही वजह है कि दुर्गा पूजा के दिनों में लखनऊ का माहौल बंगाल की याद दिलाता है। पुराने पूजा केंद्र शहर के इतिहास को जीवित रखते हैं, जबकि नए इलाकों में होने वाले आयोजन इस परंपरा का विस्तार कर रहे हैं।

दुर्गा पूजा पंडालों में जाने से पहले ध्यान रखें

नवरात्रि और दुर्गा पूजा के प्रमुख दिनों में पंडालों में भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए दर्शन के लिए निकलने से पहले संबंधित पूजा समिति से समय और आयोजन स्थल की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और भीड़ के बीच स्थानीय व्यवस्था का पालन करने से यात्रा आसान हो सकती है।


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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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