Ganesh Visarjan 2026: गणपति विसर्जन में ये गलती पड़ सकती है भारी, फूल-माला, वस्त्र और सुपारी को लेकर जान लें नियम

Ganesh Visarjan 2026: गणपति विसर्जन से पहले फूल-माला, दूर्वा, वस्त्र, सुपारी, नारियल और सजावट का क्या करें? जानें CPCB गाइडलाइन और सही तरीका।

Jyotsana Singh
Published on: 19 Sept 2026 2:02 PM IST (Updated on: 19 Sept 2026 2:02 PM IST)
Ganesh Visarjan 2026: What to Do With Flowers, Clothes and Puja Items
X

Ganesh Visarjan 2026: What to Do With Flowers, Clothes and Puja Items


Ganesh Visarjan 2026: गणपति बप्पा की विदाई का समय जितना भावुक होता है, उतना ही जरूरी यह जानना भी है कि विसर्जन के बाद पूजा में इस्तेमाल हुई सामग्री का क्या किया जाए। गणेश प्रतिमा के साथ चढ़ाए गए फूल-माला, दूर्वा, वस्त्र, सुपारी, नारियल और सजावट की चीजों को लेकर अक्सर भक्त असमंजस में रहते हैं। कई लोग इन सभी चीजों को प्रतिमा के साथ ही पानी में प्रवाहित कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना जरूरी नहीं है।

गणपति प्रतिमा का विसर्जन और पूजा सामग्री का निस्तारण दो अलग प्रक्रियाएं हैं। वहीं धार्मिक परंपराओं के साथ पर्यावरण का ध्यान रखते हुए भी पूजा सामग्री को अलग करना चाहिए। आइए जानते हैं बप्पा को विदा करने से पहले किन चीजों को प्रतिमा से हटाना चाहिए और उनका क्या किया जा सकता है।

विसर्जन से पहले करें उत्तर पूजा

गणपति प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले कई परिवारों में उत्तर पूजा या विदाई पूजा करने की परंपरा है। इस दौरान बप्पा को अंतिम बार फूल, दूर्वा और भोग अर्पित किया जाता है। आरती के बाद भक्त पूजा में हुई किसी भूल के लिए गणपति जी से क्षमा मांगते हैं और अगले वर्ष फिर घर आने की प्रार्थना करते हैं।

उत्तर पूजा पूरी होने के बाद प्रतिमा को उसके स्थापित स्थान से थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा भी कई जगह निभाई जाती है। इसे स्थापना के संकल्प की पूर्णता और बप्पा की विदाई की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसी समय प्रतिमा पर लगी ऐसी सामग्री को अलग कर लेना चाहिए, जिसे विसर्जन के पानी में डालना उचित नहीं है।

फूल-माला और दूर्वा को प्रतिमा से पहले हटा लें

गणपति को अर्पित किए गए फूल, माला, दूर्वा और पत्तियों को प्रतिमा के साथ पानी में प्रवाहित करने की जरूरत नहीं है। विसर्जन से पहले इन्हें श्रद्धापूर्वक अलग कर लें। प्राकृतिक फूल-पत्तियों को अलग इकट्ठा करके खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। घर में इसकी व्यवस्था न हो तो इन्हें साफ मिट्टी में दबाया जा सकता है या स्थानीय निकाय की ओर से बनाए गए निर्माल्य पात्र यानी भगवान को अर्पित की गई सामग्री, जैसे फूल, माला, दूर्वा, पत्तियां और अन्य पूजन सामग्री को पवित्र जगह पर विसर्जित करने के लिए गड्ढों में डाला जा सकता है।

यह तरीका धार्मिक भावना के साथ पर्यावरण का ध्यान रखने में भी मदद करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB की मूर्ति विसर्जन संबंधी गाइडलाइन में भी प्रतिमा से फूल, पत्तियां और सजावटी सामग्री हटाने की सलाह दी गई है।

प्लास्टिक और थर्मोकोल की सजावट पानी में न डालें

गणपति उत्सव में सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की माला, रिबन, थर्मोकोल, चमकीली पन्नी, कृत्रिम फूल और दूसरी गैर-जैविक सामग्री को फूल-पत्तियों के साथ नहीं मिलाना चाहिए। विसर्जन से पहले इन्हें अलग कर लें और स्थानीय कचरा संग्रह व्यवस्था के अनुसार इनका निस्तारण करें।

खास तौर पर थर्मोकोल और प्लास्टिक को नदी, तालाब या किसी अन्य जलस्रोत में डालने से बचना चाहिए। पूजा की आस्था अपनी जगह है, लेकिन जलस्रोतों को साफ रखना भी हमारी खुद की जिम्मेदारी है।

बप्पा को पहनाए गए वस्त्र का क्या करें?

गणपति की प्रतिमा को पहनाए गए कपड़े को भी विसर्जन के समय पानी में प्रवाहित करना जरूरी नहीं है। इसे सम्मान के साथ उतारकर साफ और संरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। परिवार चाहे तो इसे अगले वर्ष गणपति की चौकी सजाने या दूसरी धार्मिक पूजा में इस्तेमाल कर सकता है।

अगर वस्त्र नया और उपयोग योग्य है तो पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसे किसी जरूरतमंद को भी दिया जा सकता है। यदि कपड़े में प्लास्टिक, तार, चमकीली पन्नी या कृत्रिम सजावट लगी है तो इन चीजों को अलग कर देना चाहिए। किसी मंदिर में वस्त्र अर्पित करने की इच्छा हो तो वहां की व्यवस्था पहले पूछ लेना बेहतर रहेगा।

गणेश पूजा की सुपारी को पानी में डालना जरूरी नहीं

गणेश पूजा में सुपारी का इस्तेमाल सामान्य पूजन सामग्री के रूप में किया जाता है। यदि सुपारी केवल पूजा के लिए रखी गई थी तो उत्तर पूजा के बाद उसे लाल या पीले कपड़े में लपेटकर पूजाघर में रखा जा सकता है। कई परिवार इसे प्रसाद के रूप में भी सुरक्षित रखते हैं।

वहीं कुछ परंपराओं में सुपारी को किसी देवता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाता है। ऐसी स्थिति में उसे हटाने की विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए ऐसी सुपारी के मामले में अपनी कुल परंपरा या पुरोहित की सलाह का पालन करना उचित रहेगा। इसे खुले जलस्रोत में फेंकना आवश्यक नहीं है।

नारियल और फल को प्रसाद के रूप में बांट सकते हैं

गणपति पूजा में रखा नारियल और अन्य फल अगर खाने योग्य हैं तो उन्हें प्रसाद के रूप में परिवार और आसपास के लोगों में बांटा जा सकता है। पूजा के बाद प्रसाद को लंबे समय तक रखने के बजाय समय पर इस्तेमाल करना बेहतर है। अगर फल खराब हो गया है तो उसे खाने से बचना चाहिए।

वहीं कलश में रखा स्वच्छ जल किसी पौधे में डाला जा सकता है या साफ मिट्टी में अर्पित किया जा सकता है। पूजा में रखे सिक्के, धातु के आभूषण या दूसरी दोबारा इस्तेमाल होने वाली सामग्री को साफ करके भविष्य की पूजा में रखा जा सकता है।

विसर्जन के समय प्रशासन के निर्देशों का रखें ध्यान

गणपति विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन या नगर निकाय की ओर से निर्धारित स्थान का इस्तेमाल करना चाहिए। जहां कृत्रिम विसर्जन कुंड या टैंक की व्यवस्था की गई हो, वहां प्रतिमा का विसर्जन करना अधिक उचित है। प्राकृतिक जलस्रोत में विसर्जन की अनुमति होने पर भी स्थानीय नियमों का पालन करना चाहिए।

विसर्जन से पहले प्रतिमा से फूल-माला, दूर्वा, वस्त्र और कृत्रिम सजावट अलग कर लेने से पूजा सामग्री और प्रतिमा का निस्तारण अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है। इस तरह गणपति बप्पा की विदाई श्रद्धा और परंपरा के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए भी की जा सकती है।

Jyotsana Singh
ABOUT THE AUTHOR

Jyotsana Singh

Content Writer Mail ID - jyotsana.b.singh@gmail.comjyotsana.b.singh@gmail.com

Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

Next Story