GSB Ganpati 2026: कहां विराजे हैं ₹703 करोड़ के बीमा वाले बप्पा? 66 किलो सोने से हुआ है श्रृंगार

GSB Ganpati 2026: मुंबई के किंग्स सर्कल में विराजे महागणपति को 66 किलो से ज्यादा सोने और 335 किलो चांदी से सजाया गया है। जानें ₹703.27 करोड़ के बीमा की वजह।

Jyotsana Singh
Published on: 17 Sept 2026 10:56 AM IST (Updated on: 17 Sept 2026 10:56 AM IST)
GSB Ganpati 2026: 66 Kg Gold, 335 Kg Silver and ₹703 Crore Insurance
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GSB Ganpati 2026: 66 Kg Gold, 335 Kg Silver and ₹703 Crore Insurance


GSB Ganpati 2026: गणपति उत्सव के आगाज के साथ ही देशभर के पंडालों में आस्था, भक्ति और रौनक का संगम देखने को मिल रहा है। मनौतियों के राजा बप्पा के दरबार में अपनी मुराद लेकर पहुंच रहे श्रद्धालुओं की भीड़ से पंडाल गुलजार हैं। खासकर गणपति उत्सव शुरू होते ही मुंबई की गलियों में बप्पा के भव्य पंडालों की भव्यता देखते ही बन रही है। जहां जब भी बड़े और प्रसिद्ध गणपति पंडालों का नाम आता है, सबसे पहले लालबागचा राजा का जिक्र होता है। लेकिन मुंबई के किंग्स सर्कल में विराजने वाले GSB सेवा मंडल के महागणपति की भव्यता भी किसी से कम नहीं है। इस गणपति को देश के सबसे समृद्ध गणपति मंडलों में गिना जाता है। इस साल GSB सेवा मंडल ने गणेशोत्सव के लिए ₹703.27 करोड़ का बीमा कवर लिया है। वहीं बप्पा की प्रतिमा को 66 किलो से ज्यादा सोने और करीब 335 किलो चांदी के आभूषणों से सजाया गया है।

72वें गणेशोत्सव में फिर दिखी बप्पा की भव्यता

मुंबई के किंग्स सर्कल स्थित GSB सेवा मंडल इस साल अपना 72वां गणेशोत्सव मना रहा है। मंडल के मुताबिक, उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर 2026 से हुई और यह 18 सितंबर तक चलेगा। इस आयोजन की परंपरा 1955 से चली आ रही है। यहां गणपति की सजावट का अंदाज भी बाकी कई पंडालों से अलग है। फिल्मी सेट या आधुनिक थीम के बजाय धार्मिक और वैदिक परंपराओं पर जोर दिया जाता है। बप्पा के आभूषणों में सोने-चांदी के साथ कीमती रत्नों का भी इस्तेमाल किया जाता है।

₹703.27 करोड़ का बीमा आखिर किस चीज का है?

GSB सेवा मंडल का ₹703.27 करोड़ का बीमा इस गणपति की कीमत नहीं है। यह पूरे गणेशोत्सव से जुड़े अलग-अलग जोखिमों के लिए लिया गया व्यापक बीमा कवर है। इसमें कीमती आभूषण और संपत्तियां तो शामिल हैं ही, साथ ही उत्सव से जुड़े लोगों और अन्य जोखिमों का भी प्रावधान है। सबसे खास बात यह है कि पिछले साल यानी 2025 में मंडल ने करीब ₹474.46 करोड़ का बीमा कवर लिया था। इस तरह एक साल में बीमा कवर की राशि में काफी बढ़ोतरी हुई है।

66 किलो से ज्यादा सोने से सजे हैं बप्पा

इस गणपति की सबसे बड़ी खासियतों में इसकी स्वर्ण सजावट शामिल है। मंडल के अनुसार, 2026 में महागणपति को 66 किलो से ज्यादा सोने के आभूषणों से सजाया गया है। मुकुट, हार, बाजूबंद और अन्य आभूषण बप्पा के श्रृंगार का हिस्सा हैं।

इसके साथ करीब 335 किलो चांदी के आभूषण और दूसरी वस्तुएं भी सजावट में शामिल हैं। बप्पा के श्रृंगार में कीमती पत्थरों और रत्नों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इनमें से कई आभूषण भक्तों और सेवदारों की ओर से दान किए जाते हैं।

करोड़ों के आभूषणों के पीछे वर्षों की श्रद्धा

GSB सेवा मंडल की संपन्नता सिर्फ सोने-चांदी के वजन से नहीं समझी जा सकती। इन आभूषणों के पीछे वर्षों से भक्तों की ओर से दिए गए दान और धार्मिक आस्था की परंपरा जुड़ी है। यही वजह है कि इस गणपति को मुंबई के सबसे समृद्ध गणपति मंडलों में गिना जाता है।

भक्त इसे 'नवसाला पावणारा विश्वाचा राजा' के नाम से भी पुकारते हैं। मंडल की वेबसाइट के अनुसार, बप्पा की सेवा और उत्सव से जुड़ी परंपरा सात दशकों से ज्यादा पुरानी है।

रोज 40 हजार से ज्यादा लोगों के लिए अन्नदान

GSB सेवा मंडल का गणेशोत्सव केवल भव्य सजावट तक सीमित नहीं है। यहां अन्नदान सेवा भी आयोजन का बड़ा हिस्सा है। आयोजकों के अनुसार, उत्सव के दौरान हर दिन 40 हजार से ज्यादा लोगों को भोजन कराया जाता है। पांच दिनों में दो लाख से अधिक लोगों तक प्रसाद भोजन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

पर्यावरण का भी रखा जा रहा ध्यान

भव्यता के साथ इस बार पर्यावरण पर भी जोर दिया गया है। मंडल के अनुसार, गणपति की प्रतिमा पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से तैयार की जाती है। इसके अलावा कागज की पारंपरिक रसीदों को बंद करके डिजिटल व्यवस्था अपनाई गई है, ताकि कागज की खपत कम हो।

यानी किंग्स सर्कल का यह गणपति सिर्फ 66 किलो सोने और 335 किलो चांदी की वजह से चर्चा में नहीं है। सात दशक से ज्यादा पुरानी परंपरा, भक्तों का दान, अन्नदान सेवा, वैदिक रीति और बड़े सुरक्षा इंतजाम मिलकर इसे मुंबई के सबसे चर्चित और समृद्ध गणपति आयोजनों में शामिल करते हैं। यही वजह है कि इस आयोजन में शामिल होने के लिए लोगों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।

उत्सव खत्म होने के बाद चढ़ावा और आभूषण कहां जाते हैं?

GSB सेवा मंडल जैसे बड़े गणपति उत्सव में जब लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तो बप्पा के चरणों में नकदी के साथ सोने-चांदी के आभूषण भी चढ़ाए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि उत्सव खत्म होने के बाद यह सारा चढ़ावा आखिर जाता कहां है? इसका जवाब पंडाल की आयोजन समिति या संबंधित ट्रस्ट की व्यवस्था पर निर्भर करता है। आमतौर पर नकदी और कीमती सामान की गिनती, रिकॉर्डिंग और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया समिति या ट्रस्ट की निगरानी में होती है।

चढ़ावे की रकम का इस्तेमाल अगले साल के गणेशोत्सव की तैयारियों, पंडाल, सुरक्षा, धार्मिक कार्यक्रमों और दूसरे आयोजन संबंधी खर्चों में किया जा सकता है। इसके अलावा कई बड़े गणपति मंडल अपने फंड से चिकित्सा, शिक्षा, जरूरतमंदों की मदद और आपदा राहत जैसे सामाजिक कार्य भी करते हैं। हालांकि हर पंडाल में चढ़ावे के इस्तेमाल के नियम और प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती।

सोने-चांदी के आभूषणों का क्या होता है?

भक्तों की ओर से चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों को भी आमतौर पर रिकॉर्ड में दर्ज कर सुरक्षित रखा जाता है। कुछ मंडल इन्हें भविष्य के उत्सवों में बप्पा के श्रृंगार के लिए सुरक्षित रखते हैं, जबकि कुछ जगहों पर नियमों के अनुसार इनकी नीलामी की जाती है। नीलामी से मिलने वाली रकम को संबंधित धार्मिक या सामाजिक कार्यों में लगाया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि हर पंडाल में चढ़ाया गया हर आभूषण सीधे बेच दिया जाए। उसका इस्तेमाल या निपटान संबंधित मंडल की नीति, ट्रस्ट के नियम और स्थानीय व्यवस्था के मुताबिक होता है।


लालबागचा राजा में कैसे होता है चढ़ावे का प्रबंधन?

मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल गणेशोत्सव समाप्त होने के बाद दानपेटियों में जमा नकदी और दूसरी वस्तुओं की गिनती की जाती है। इसमें भारतीय मुद्रा के अलावा विदेशी मुद्रा और भक्तों की ओर से चढ़ाए गए सोने-चांदी के सामान भी मिलते हैं।

मंडल की ओर से वर्षों से चढ़ावे में मिली कुछ कीमती वस्तुओं की नीलामी भी कराई जाती रही है। नीलामी में आम लोग बोली लगा सकते हैं और इससे प्राप्त रकम मंडल के सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों में इस्तेमाल की जाती है।


चढ़ावे की रकम से होते हैं सामाजिक काम

लालबागचा राजा मंडल से जुड़े सामाजिक कार्यों में चिकित्सा और शिक्षा से जुड़ी सहायता प्रमुख रही है। मंडल की ओर से जरूरतमंद मरीजों के लिए चिकित्सा सहायता, डायलिसिस जैसी सेवाओं और विद्यार्थियों की मदद से जुड़े कार्य किए जाते हैं। प्राकृतिक आपदा या किसी बड़े संकट के समय भी सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए फंड का इस्तेमाल किया जाता है। यानी गणपति उत्सव में भक्तों की ओर से चढ़ाया गया पैसा और कीमती सामान केवल कुछ दिनों की सजावट तक सीमित नहीं रहता। कई संस्थाएं इसे धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक सेवा से जोड़ती हैं। हालांकि किसी खास मंडल के चढ़ावे का कितना हिस्सा किस काम में खर्च होता है, यह उसके आधिकारिक रिकॉर्ड और नियमों से ही तय होता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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