Karwa Chauth 2026: छलनी से चांद देखकर क्यों खुलता है व्रत? वीरवती की कथा से जुड़ी है खास परंपरा

Karwa Chauth 2026 पर छलनी से चांद और पति का चेहरा देखने की परंपरा क्यों निभाई जाती है? जानें वीरवती की लोककथा, धार्मिक मान्यता और लखनऊ में चंद्रोदय का अनुमानित समय।

Jyotsana Singh
Published on: 23 Oct 2026 8:58 AM IST
Karwa Chauth 2026:Why Do Women See the Moon| LATEST HINDI NEWS|NEWS TRACK HINDI SAMACHAR
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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर चांद निकलने का इंतजार हर व्रत रखने वाली महिला के लिए खास होता है। दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद जब आसमान में चंद्रमा दिखाई देता है, तो महिलाएं पूजा करती हैं, अर्घ्य देती हैं और फिर छलनी से चांद देखने के बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा निहारती हैं। पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलने का यह पल कई परिवारों के लिए भावनाओं और प्रेम से जुड़ा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चांद को सीधे देखने के बजाय छलनी से देखने की परंपरा क्यों निभाई जाती है? इसके पीछे धार्मिक आस्था, लोककथाओं और पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी मान्यताओं का खास महत्व है।

करवा चौथ पर छलनी से चांद देखने की क्या है परंपरा?

करवा चौथ का व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कई अविवाहित महिलाएं भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। शाम को पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन करना इस व्रत का अहम हिस्सा है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं छलनी में से चांद को देखती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा निहारती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं।

छलनी से चांद देखने के पीछे क्या है धार्मिक मान्यता?

धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को शीतलता, मन और भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है। करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और पति के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। छलनी से चांद देखने के बाद पति का चेहरा देखना जीवनसाथी के प्रति प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

वीरवती की कथा से जुड़ा है छलनी का प्रसंग

करवा चौथ की परंपराओं को समझने के लिए भारतीय संस्कृति में वीरवती की कथा का उल्लेख अक्सर किया जाता है। लोककथा के अनुसार, वीरवती अपने भाइयों की लाडली बहन थी। विवाह के बाद उसने अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। दिनभर निर्जला उपवास करने के कारण शाम तक उसे तेज भूख-प्यास लगने लगी और वह कमजोर पड़ गई। बहन की परेशानी देखकर उसके भाइयों से रहा नहीं गया। कथा के एक प्रचलित प्रसंग में बताया जाता है कि उन्होंने दूर पेड़ पर दीपक जलाया और उसके सामने छलनी इस तरह रखी कि रोशनी चांद जैसी दिखाई देने लगी। वीरवती ने उस रोशनी को चंद्रमा समझ लिया और व्रत खोल लिया। कथा के अनुसार, व्रत समय से पहले खोलने के बाद उसके पति की तबीयत बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई। यह देखकर वीरवती दुखी हो गई। बाद में उसने श्रद्धा और नियम के साथ दोबारा व्रत किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी-देवताओं ने उसके पति को जीवनदान दिया। वीरवती की कथा को छलनी से चांद देखने की परंपरा के पीछे बताई जाने वाली प्रमुख लोककथाओं में गिना जाता है। इसमें छलनी के जरिए दिखाई गई नकली चांद जैसी रोशनी को असली चंद्रमा समझ लेने का प्रसंग है। आज छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखना वैवाहिक प्रेम, साथ और मंगलकामना से जुड़ी परंपरा के रूप में निभाया जाता है।

करवा चौथ 2026 पर कब होगा चांद का दीदार?

29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ मनाया जाएगा। लखनऊ में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात करीब 8:06 बजे है। हालांकि, स्थानीय पंचांग और मौसम के अनुसार चांद दिखाई देने के समय में अंतर हो सकता है।


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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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