Hanuman Mandir: कोटा का वो धाम जहां ‘कुछ अनदेखा’ करता है असर, वैज्ञानिक भी हैरान!

Kota Hanuman Temple Ka Rahasya: राजस्थान के कोटा स्थित गोदावरी धाम हनुमान मंदिर का रहस्य, जहां प्रेतबाधा से राहत और अनदेखी शक्ति की मान्यता है।

Jyotsana Singh
Published on: 6 May 2026 9:37 AM IST (Updated on: 6 May 2026 10:16 AM IST)
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Kota Godavri Dham Hanuman Temple

Kota Godavri Dham Hanuman Mandir: राजस्थान के कोटा शहर में चंबल नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित गोदावरी धाम हनुमान मंदिर लोगों के बीच आस्था, इतिहास और रहस्यों का अद्भुत संगम बना हुआ है। करीब 1043 वर्ष पुराने इस मंदिर को एक जाग्रत धाम माना जाता है, जहां हनुमान जी के रौद्र रूप की पूजा होती है। मान्यता है कि यहां आने मात्र से प्रेतबाधा से ग्रस्त व्यक्ति को राहत मिलती है। यही वजह है कि यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

चंबल किनारे बसा हजार साल पुराना आस्था का केंद्र

कोटा शहर में चंबल नदी के शांत किनारे स्थित यह मंदिर अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है। इसकी स्थापना संवत 1005 में मानी जाती है, यानी आज से लगभग 1043 वर्ष पूर्व। मंदिर के प्राचीन शिलालेखों में इसका उल्लेख मिलता है, हालांकि अब ये शिलालेख खंडित हो चुके हैं। मंदिर के संस्थापक स्वामी रामदास जी माने जाते हैं। यह स्थान पहले नागा साधुओं का प्रमुख मठ था, जहां सदियों तक साधना और तपस्या की परंपरा चली। आज भी यहां उस आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास किया जा सकता है।

1963 में हुआ जीर्णोद्धार, राम नवमी से जुड़ा इतिहास

मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1963 में सामने आया, जब कोटा के एक प्रतिष्ठित समाजसेवी, धर्मप्रेमी और आस्थावान व्यक्ति श्री गोपीनाथ जी भार्गव ने राम नवमी के शुभ दिन इसका जीर्णोद्धार कराया। पहले यह स्थान चंबल नदी के जल निकास क्षेत्र में आता था और हनुमान जी की प्रतिमा नदी के पास एक छतरी में स्थापित थी। समय के साथ वह संरचना जर्जर होकर नष्ट हो गई, लेकिन प्रतिमाएं सुरक्षित रहीं। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा को ऊंचे चबूतरे पर पुनः स्थापित किया गया, जिससे मंदिर को स्थायित्व और भव्यता मिली।

भव्य संरचना और मार्बल से सजा मंदिर परिसर

आज मंदिर का स्वरूप बेहद भव्य है। 12 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना मुख्य भवन 120 फुट लंबा और 60 फुट चौड़ा है, जिसे सफेद मार्बल से सजाया गया है। गर्भगृह 15 फुट का है और इसमें भी संगमरमर लगाया गया है। मंदिर के अंदर एक विशाल सत्संग हॉल भी बना है, जहां धार्मिक आयोजन होते हैं। इसके अलावा परिसर में गौशाला, व्यायामशाला, संत निवास, यात्रियों के लिए हाल और भोजनशाला जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इसे एक पूर्ण धार्मिक केंद्र बनाती हैं।

वीर आसन में विराजमान अनोखी हनुमान प्रतिमा

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा है, जो करीब 6 फुट ऊंची है और काली शिला पर वीर आसन में विराजमान है। इस प्रतिमा का स्वरूप अत्यंत अनोखा है। हनुमान जी का मुख मानव रूप में है और वे ब्रह्मचारी स्वरूप में दिखाई देते हैं। उनके सिर पर जटा बंधी है और गले में रुद्राक्ष की माला है, जिसमें श्रीराम की चरण पादुकाओं का लॉकेट दर्शाया गया है। मस्तक पर चांदी का मुकुट और ऊपर चांदी का छत्र है। साथ ही चांदी की गदा और खड़ाऊ भी रखी गई हैं। विशेष बात यह है कि हनुमान जी का मुख दक्षिण दिशा की ओर है, जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मुख्य हनुमान मंदिर के अलावा यहां सिद्ध विनायक गणेश जी, बटुक भैरव और तुलसी जी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। हनुमान जी के सामने राम, सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएं विराजमान हैं, जो इस स्थान को रामभक्ति का केंद्र बनाती हैं। यहां पिछले चार वर्षों से अखंड रामायण का पाठ लगातार चल रहा है, जो मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाता है।

प्रेतबाधा से मुक्ति की मान्यता

गोदावरी धाम हनुमान मंदिर की सबसे खास पहचान इसकी चमत्कारी मान्यता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति प्रेतबाधा या नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित होता है, वह यहां आकर हनुमान जी के सामने बैठते ही राहत महसूस करता है। यही कारण है कि दूर-दराज से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने यहां आते हैं और इसे एक जाग्रत धाम के रूप में मानते हैं।

रूद्राभिषेक की अनोखी परंपरा

यह मंदिर हनुमान जी के रूद्राभिषेक के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां की पूजा-पद्धति अन्य मंदिरों से अलग मानी जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस अनुष्ठान से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह परंपरा इस मंदिर की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

पूजा, आरती और भोग की नियमित व्यवस्था

मंदिर में पूजा-पाठ का क्रम सुव्यवस्थित तरीके से चलता है। मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है और रात 10 बजे शयन आरती के बाद बंद होता है। हालांकि मंगलवार और शनिवार को मंदिर पूरे दिन खुला रहता है। हनुमान जी को बेसन के लड्डू, चूरमा-बाटी और दाल-चावल का भोग लगाया जाता है। सुबह और शाम वाद्य यंत्रों के साथ भव्य आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

त्योहारों पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

मंदिर में सामान्य दिनों में भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन त्योहारों पर यहां की रौनक देखने लायक होती है। नवरात्रि के दौरान करीब 3 लाख श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जबकि हनुमान जयंती पर यह संख्या 8 लाख तक पहुंच जाती है। आम दिनों में भी लगभग 2 हजार लोग रोजाना मंदिर के दर्शन करने आते हैं, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

करीब ढाई एकड़ में फैले इस मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां लगभग 10 पुजारी और 20 कर्मचारी मंदिर की व्यवस्था संभालते हैं। मंदिर के आसपास प्रसाद, फूल और पूजा सामग्री की कई दुकानें भी हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होती।

यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटता है, जो इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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