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Kuno National Park: कूनो में 5 शावकों का जन्म क्यों है खास? भारत में शुरू हुई बोत्सवाना की वंशावली
Kuno National Park में KJP21 ने 5 शावकों को जन्म दिया। जानें कैसे इनसे भारत में Botswana Cheetah Lineage की शुरुआत हुई।
Kuno National Park: 5 Cheetah Cubs Start Botswana Lineage in India
Kuno National Park: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 5 अक्टूबर को इस उपलब्धि की जानकारी दी। लेकिन इस खबर की खास बात सिर्फ पांच नए शावकों का जन्म लेना नहीं है। इन शावकों के जरिए भारत में बोत्सवाना की चीता वंशावली की शुरुआत भी हुई है। इनके पिता बोत्सवाना से लाए गए नर चीता हैं। यानी कूनो में अब चीतों की आबादी बढ़ने के साथ उनकी आनुवंशिक विविधता भी मजबूत होने की उम्मीद जगी है।
32 महीने की KJP21 बनी तीसरी भारतीय मां
KJP21 करीब 32 महीने की मादा चीता है और उसका जन्म भारत में ही हुआ था। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, वह भारत में जन्मी तीसरी मादा चीता है, जिसने देश की धरती पर शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी मां बन चुकी हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका मतलब है कि कूनो में अब सिर्फ विदेशों से लाए गए चीते ही प्रजनन नहीं कर रहे, बल्कि भारत में पैदा हुई अगली पीढ़ी भी आगे वंश बढ़ा रही है। यही किसी भी पुनर्वास कार्यक्रम की बड़ी सफलता मानी जाती है। क्योंकि किसी प्रजाति को दोबारा जंगल में बसाने के लिए केवल जानवरों को दूसरे देश से लाना पर्याप्त नहीं होता। बल्कि वे नए वातावरण में जीवित रहें, प्रजनन करें और उनकी अगली पीढ़ियां भी प्राकृतिक परिस्थितियों में पनप सकें, तभी इस तरह के अभियान सफल माने जाते हैं।
5 शावकों से जुड़ा है बोत्सवाना का नया जेनेटिक लिंक
इन पांच शावकों का पिता बोत्सवाना का नर चीता है। इसलिए इनके जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना की आनुवंशिक वंशावली की शुरुआत हुई है। वन्यजीव संरक्षण में जेनेटिक विविधता का अपना महत्व है। अलग-अलग वंशावलियों के चीतों के बीच प्रजनन से आबादी में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लंबे समय में यह किसी छोटी आबादी को स्वस्थ और टिकाऊ बनाने के लिहाज से अहम हो सकता है।
भारत में ऐसे वापस आए चीते
भारत में चीता 1952 में विलुप्त घोषित हो गया था। इसके बाद देश में इस प्रजाति को दोबारा बसाने की योजना पर काम शुरू हुआ। प्रोजेक्ट चीता के तहत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीतों को कूनो लाया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारत में छोड़ा। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत लाए गए। इस तरह शुरुआती चरण में कुल 20 चीते नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कूनो पहुंचे।
फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नौ और चीते भारत लाए गए, जिनमें छह मादा और तीन नर थे। इन्हें भी कूनो में रखा गया और स्वास्थ्य जांच तथा वातावरण के अनुकूल होने की प्रक्रिया से गुजारा गया।
कभी 20 से शुरू हुआ सफर अब 60 तक पहुंचा
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 20 चीतों से हुई थी, लेकिन इस दौरान कुछ चीतों और शावकों की मौत भी हुई। इसके बावजूद भारत में जन्म लेने वाले चीतों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
मार्च 2026 में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया था। उस समय देश में चीतों की संख्या 53 और भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 33 हो गई थी।
इसके बाद अप्रैल 2026 में KGP12 ने जंगल में चार शावकों को जन्म दिया। यह प्रोजेक्ट चीता के लिए खास उपलब्धि थी, क्योंकि भारत में चीता पुनर्वास शुरू होने के बाद यह किसी भारतीय जन्मी मादा द्वारा जंगल में शावकों को जन्म देने का पहला दर्ज मामला था।
अब KJP21 के पांच शावकों के जन्म के साथ भारत में चीतों की संख्या 60 हो गई है। सरकार का लक्ष्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी आबादी तैयार करना है जो लंबे समय तक भारतीय जंगलों में अपने दम पर टिक सके।
कूनो से आई यह नई खबर इसी दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है। पांच नन्हे शावकों की आवाज में भारत में उस प्रजाति की वापसी की उम्मीद बढ़ गई है, जो कभी इस देश से पूरी तरह गायब हो गई थी।


