Kurukshetra Hindi Festival 2025: कुरुक्षेत्र में हिंदी का जयघोष, साहित्य साधक हुए सम्मानित

निर्मला स्मृति साहित्यिक समिति और हरियाणा संस्कृति अकादमी के संयुक्त आयोजन में हिंदी उत्सव पर देशभर के साहित्यकारों को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिला।

Ramkrishna Vajpei
Published on: 5 Oct 2025 3:49 PM IST
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Kurukshetra Hindi Festival 2025: हरियाणा की धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में आज साहित्य और संस्कृति का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला, जब निर्मला स्मृति साहित्यिक समिति, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी (पंचकूला) और अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी उत्सव एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। राम स्वरूप सभागार में आयोजित इस गरिमामय समारोह में देश भर के साहित्यकारों को उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी रहे, जिन्होंने हिंदी भाषा के विस्तार और साहित्यकारों के योगदान की सराहना की। उनके साथ मंच पर पद्म प्रोफेसर रविन्द्र और प्रो. बाबूराम भी उपस्थित रहे, जिन्होंने साहित्य की वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

लखनऊ के अमित कुमार मल्ल 'हिंदी साहित्य रत्न' से सम्मानित

इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लखनऊ के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री अमित कुमार मल्ल को 'हिंदी साहित्य रत्न सम्मान' से विभूषित किया गया। वर्तमान में लखनऊ में रह रहे श्री मल्ल पिछले 42 वर्षों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी अब तक दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह सम्मान उनके साहित्यिक अवदान का एक और प्रमाण है।


इससे पूर्व भी श्री मल्ल को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, और राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है, जो राष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिभा की पहचान को दर्शाता है।

इस सम्मान समारोह में कई अन्य प्रतिष्ठित विद्वानों को भी पुरस्कृत किया गया। इनमें प्रोफेसर पूरन चंद टंडन (दिल्ली), प्रोफेसर प्रदीप और प्रोफेसर पवन अग्रवाल (लखनऊ), तथा मिजोरम से प्रोफेसर शर्मा जैसे साहित्य जगत के पुरोधा शामिल रहे।

आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी भाषा को वैश्विक पटल पर ले जाने में ऐसे साहित्यकारों की भूमिका निर्णायक है। समारोह ने देश के विभिन्न कोनों से आए साहित्य प्रेमियों और विद्वानों को एक मंच पर लाकर हिंदी की गौरवशाली परंपरा को और समृद्ध किया।

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