साल में सिर्फ एक दिन खुलता है मां श्रृंगार गौरी का मंदिर, न्याय के इंतज़ार में सिद्धपीठ

Maa Shringar Gauri Temple Varanasi: साल में सिर्फ एक दिन दर्शन क्यों? वाराणसी के मां श्रृंगार गौरी मंदिर का इतिहास, आस्था और विवाद, जानिए पूरी कहानी

Jyotsana Singh
Published on: 23 March 2026 2:00 PM IST
साल में सिर्फ एक दिन खुलता है मां श्रृंगार गौरी का मंदिर, न्याय के इंतज़ार में सिद्धपीठ
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Maa Shringar Gauri Temple Varanasi

Maa Shringar Gauri Temple Varanasi: वाराणसी को यूं ही मोक्ष की नगरी नहीं कहा जाता। यहां हर दिन लाखों लोग भगवान शिव और मां गंगा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इसी शहर में एक ऐसा मंदिर भी है जो पूरे साल बंद रहता है और केवल एक दिन खुलता है। मां श्रृंगार गौरी का यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह एक लंबे समय से चल रहे विवाद और न्याय की प्रतीक्षा का प्रतीक भी बन चुका है। चैत्र नवरात्र के चतुर्थी के दिन जब इसके कपाट खुलते हैं, तो श्रद्धालुओं की असंख्य भीड़ देवी दर्शन को आतुर रहती है। इस बार भी पिछले कई वर्षों की तुलना में कहीं ज्यादा भक्त दर्शन के लिए मौजूद रहे। आइए चलते वाराणसी के देवी मंदिर से जुड़े महत्व और विवाद के बारे में विस्तार से -

साल में एक दिन दर्शन की परंपरा आस्था या अड़चन

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित मां श्रृंगार गौरी का मंदिर अपनी परंपरा के कारण बेहद खास माना जाता है। यह मंदिर पूरे साल आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहता है और केवल चैत्र नवरात्र के चौथे दिन ही दर्शन के लिए खोला जाता है। इस दिन हजारों भक्त सुबह से ही लाइन में लग जाते हैं और मां के दर्शन के लिए घंटों इंतज़ार करते हैं।

इस परंपरा के पीछे मुख्य कारण सुरक्षा व्यवस्था और ऐतिहासिक परिस्थितियां मानी जाती हैं। प्रशासन इस पूरे क्षेत्र को संवेदनशील मानता है, इसलिए आम दिनों में यहां प्रवेश सीमित रखा जाता है। लेकिन नवरात्र के इस खास दिन को भक्तों के लिए विशेष रूप से खोल दिया जाता है, जिससे लोगों की आस्था बनी रहे।

सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं मां श्रृंगार गौरी

मां श्रृंगार गौरी को देवी पार्वती का ही एक विशेष रूप माना जाता है, जो सौंदर्य, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। ‘श्रृंगार’ शब्द से ही स्पष्ट है कि यह रूप विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि जो महिलाएं यहां सच्चे मन से पूजा करती हैं, उन्हें वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता प्राप्त होती है।

काशी में भगवान शिव के साथ मां गौरी की उपासना का विशेष महत्व है। इस मंदिर को सिद्धपीठ माना जाता है, यानी यहां की गई पूजा जल्दी फल देती है। यही कारण है कि एक दिन के दर्शन के बावजूद यहां श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

इतिहास की परतों में छिपा मंदिर का भव्य अस्तित्व

मां श्रृंगार गौरी मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन माना जाता है और यह काशी के पुराने धार्मिक ढांचे का हिस्सा रहा है। समय के साथ इस क्षेत्र में कई बदलाव हुए, खासकर मध्यकाल के दौरान जब कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया।

माना जाता है कि वर्तमान में जहां यह मंदिर स्थित है, वह क्षेत्र कभी बड़े मंदिर परिसर का हिस्सा था। बाद में यहां संरचनात्मक बदलाव हुए और पास में मस्जिद का निर्माण हुआ। इसी ऐतिहासिक परिवर्तन ने इस स्थल को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील बना दिया।

ज्ञानवापी मस्जिद से निकटता ही संवेदनशीलता की बड़ी वजह

मां श्रृंगार गौरी मंदिर ज्ञानवापी मस्जिद के बेहद करीब स्थित है। दोनों स्थल एक ही परिसर के भीतर माने जाते हैं और इनके बीच की दूरी बहुत कम है। यही कारण है कि प्रशासन इस पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन के रूप में देखता है।

इस निकटता के कारण ही यहां नियमित रूप से आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगी रहती है। सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर नजर रखती हैं और विशेष अवसरों पर ही सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाता है।

विवाद और कानूनी लड़ाई बनी आस्था और अधिकार की जंग

मां श्रृंगार गौरी मंदिर का मामला केवल धार्मिक नहीं, बल्कि कानूनी और ऐतिहासिक विवाद से भी जुड़ा हुआ है। वर्ष 2021 में पांच महिलाओं ने अदालत में याचिका दाखिल कर नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि उन्हें अपने धार्मिक अधिकारों के तहत रोज़ाना पूजा करने का हक मिलना चाहिए।

इसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया और अदालत ने इस पूरे क्षेत्र के सर्वेक्षण के आदेश दिए। सर्वे रिपोर्ट, साक्ष्य और ऐतिहासिक दावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस जारी है। इस मामले से जुड़े कई अन्य मुकदमे भी अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं, जिससे यह विवाद और जटिल हो गया है।

अदालत में जारी सुनवाई, फैसले का इंतज़ार


वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। अदालत में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और साक्ष्य पेश कर रहे हैं।

जब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं आता, तब तक मंदिर में नियमित दर्शन की अनुमति मिलना संभव नहीं है। यही कारण है कि प्रशासन ने परंपरा के अनुसार केवल विशेष अवसर पर ही मंदिर खोलने की व्यवस्था जारी रखी है। भक्तों को उम्मीद है कि आने वाले समय में अदालत का निर्णय उनके पक्ष में आएगा और उन्हें रोज़ाना मां के दर्शन करने का अवसर मिलेगा।

क्यों खास है यह सिद्धपीठ

मां श्रृंगार गौरी का यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा स्थान माना जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां मां की शक्ति अत्यंत प्रभावशाली है और सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।

नवरात्र के दौरान यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं की भीड़ इस स्थान को एक विशेष ऊर्जा से भर देती है। यही वजह है कि हर साल यहां आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है।

न्याय का इंतज़ार ....कब खुलेगा मां का दरबार हर दिन

आज मां श्रृंगार गौरी का यह सिद्धपीठ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक प्रतीक्षा का प्रतीक बन चुका है। लाखों श्रद्धालु इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि उन्हें साल में एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन मां के दर्शन का अवसर मिले। यह इंतज़ार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। लोगों की आस्था इस उम्मीद से जुड़ी है कि एक दिन न्याय मिलेगा और यह मंदिर फिर से अपनी पुरानी परंपराओं के अनुसार आम भक्तों के लिए खुल जाएगा।

साल में केवल एक दिन खुलने वाला यह मंदिर आज भी लाखों लोगों के दिलों में बसा हुआ है।

Jyotsana Singh

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